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विवाह के संग्रह

।। मंगली दोश देखना ।।

जिसकी जन्मकुंडली में 7/1/4/9/12 वें स्थान में षनिचर हो तो उसको मंगली दोश नही होता।

।। विवाह के नक्षत्र देखना ।।

तीनाें उत्तरा, रोहिणी, रेवती, मूल, स्वाति, मघा, मृगषिरा, अनुराधा, हस्त इन ग्यारह नक्षत्रों में विवाह करना चाहिए। ये विवाह के नक्षत्र माने जाते है।

।। विवाह के उत्तम महीनें ।।

माघ मास में विवाह करने पर कन्या धनवती होती है। फाल्गृन के महीने पर कन्या सौभाग्यषाली होती है। फाल्गुन के महीनें में विवाह करने पर सौभाग्य वाली होती है। वैषाख तथा ज्येश्ठ मास में विवाह करने पर पति को अति प्यारी होती है।

आषाढ़ के महीनें में विवाह करने पर कुल की वृद्वि होती है। मार्गषिर के महीनें में भी कोर्इ-कोर्इ विवाह करने पर षुभ मानते है। इनके अतिरिक्त षेश महीनोें में विवाह करना निशेध है।

।। विह में त्याज्य नक्षत्र, तिथी और वार ।।

अमावस्या तथा खाली तिथी 4/9/12 वारवेलाऔर जन्म का नक्षत्र और क्रूर वार जैसे रवि, षनि, मंगल और गण्डान्त नक्षत्र में से सब विवाह वर्जित है।

।। बान देखना ।।

सिंह, वृश, कुंभ, राषि के 5 बान। तुला, मीन, मेश दनके 7 बान। मकर, वृषिचक, मिथुन, कर्क राषि अनके 9 बान होते है। 13 बान नही होते। वर के बान कन्या से 2 अधिक होते है। षुभ दिन देख कौन से अदन बान करना अच्छा है देख लें।

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