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उदभेद

ज्योतिश षास्त्र की आत्मा का सािन नक्षत्र विचार है। तिथिया बाद की और स्थूल हंै। जबकि नक्षत्र मूलाधार हैं। वाडमय में इस बात के बहुत से प्रमाण है। कि प्राचीन काल में ज्योतिश का व्यवहार नक्षत्रों पर ही आधारित है। अत: नक्षत्र ज्योतिश षास्त्र की नींव हैं जिस पर ज्योतिंश प्रर्वत्तकों, ऋशियो, मनीशियों ने वैदिक भारतीय ज्योतिश का सुरम्य प्रसाद खड़ा किया है।

वैदिक काल में ही अठार्इस नक्षत्रों व उनके देवताओं का ज्ञान प्राप्त किया जा चुका था। षुभ व अषुभ नक्षत्रों का वगर्ाीकरण किया गया था। जन्म समय में कुछ विषेश नक्षत्रों का विषेश अषुभ माना जाता था। नक्षत्रों की आकाषीय सिथति का सही आकलन, उनके गुण धर्म, व स्वरूप व नामों को तार्किक आधार दिया गया था। उयी वैदिक षास्त्रीय विशय का उदभेद आज हमारे सामने विषाल व विष्वव्यापी भुवन मोहन स्वरूप् लिए सतत प्रगतिषील है।

ज्योतिष ज्ञान

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