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तिलादी चिन्ह विचार

अंगानुसार तिलादिचिन्ह फल

मस्तक पर तिलादी चिन्ह हों, ललाट पर या सिर पर सुन्दर, क्रानितमान, स्पश्ट चिन्ह हो तो व्यकित का धन व मान मिलता है। दांयी ओर होने पर उत्तम फल व बांयी ओर होने पर मध्यम फल होगा। सित्रयों में सामान्यत: बांयी ओर चिन्ह होना उत्तम व पुरूशोंं में दांयी ओर होना उत्तम कहा जाता है। लेकिन इस नियम के बहुत से अपवाद भी आगे कहे जाएगें।

1. बालों की षुरूआत या अन्त में गर्दन के पीछे भी तिलादी हों तो सौभाग्य की सूचना देते है।
2. दोनो भौंहों में कही भी चिन्ह होना दुर्भाग्य के सूचक होते है।
3. दोनो भौंहों के बीच खाली स्थान में तिलादि होने पर अच्छा फल होता है। लेकिन ऐसा व्यकित प्राय: षीलाचरण से रहित होता है। ऐया व्यकित देष विदेष की सैर करता है।
4. आंख में पलकों के स्थान पर आंसू गिरने के स्थान पर तिल हों तो दु:ख षोक की सूचना देते है।
5. कनपटी पर तिल हो तो भ्रमणषील, त्यागी या संन्यासी होता हेै।
6. नाक पर तिलादी चिन्ह हो तो मनुश्य को पहनने ओढ़ने का बहुत षोक होता है। गाल पर तिल हो तो पुत्र होते है।
7. ऊपर वाले होंठ पर तिल हो तो व्यकित प्रतिशिठत होता है। धन प्रापित होती है। निचले होंठ पर तिलादी रहने से कंजूसी की प्रवृति होती है।
8. ठुìी पर सामने से ही दिखने वाला तिल हो तो व्यकित का खाने पीने की कमी नही रहती है। धन भी खूब मिलता है।
9. कानों पर चिन्ह हो तो विधा, षास्त्र श्रवण या कर्णाभूशणों की प्रापित होती है।
10. गले में तिल होने पर लम्बी उम्र, मोटापें की प्रवृति, एंषो आराम अच्छा मिलता है। ऐन कन्धे व गर्दन के जोड़ पर तिल हो तो वध का भय होता है।
11. हदय क्षेत्र में तिलादि हों तो पुत्र लाभ, स्तनों क आसपास तिल हो तो पुत्र होते है
12. पाष्र्व अर्थात कमर व पेंट के मिलन स्थल पर आजू बाजू में तिलादि हों तो षोक होता है। छाती पर तिल हों तो इच्छांए पूरी होती है।
13. कन्धें पर तिल हो तो जीवन में स्थापित होने के लिए बहुत धक्के खानें पड़ते है। काख में तिलादी हों तो अनेक प्रकार से धनहानि होती है। दांए कन्धे पर तिल तीव्र बुद्वि व ज्ञान का सूचक है।
14. कमर पर तिलादी होने से दु:खो का नाष होता है। भुजा (कुहनी से नीचे) तिल हो तो षत्रुनाष होता है। लेकिन ठीक कलार्इ पर तिल होना अषुभ फल देता है। ऐसे व्यकित को बन्धन भोगना पड़ता है।
15. हाथ में (हथेली नही) तिल होने से मिलते है।
16. हाथ की अगुंलियों के बीच में तिल हो तो सौभाग्य, हथैली में मुÎी में पड़ने वाला तिल धनदेता है।
17. पेट पर तिल होे तो दु:ख होते है। लेकिन नाभि के आसपास तिल हों तो भौतिक सुख मिलता है।
18. नाभि के नीचे लेकिन नाभि के पास ही तिल हो तो चोरों द्वारा धनहानि होती है।
19. बसित अर्थात पेडू पर तिल हो तो धनधान्य की प्रापित होती है।
20. अण्ड़कोश व गुदा पर तिल हो तो धन मिलता है। जांघ पर तिल हो तो सवारी मिलती है। घुटनो पर तिल हो तो षत्रुओं से हानि होती है।
21. ंिलग पर तिल हो तो विवाह के बाद भाग्योदय होता है। तथा अच्छी सन्तान मिलती है।
22. पिण्डली पर तिल हो तो दुर्मरण होता है। टखने पर तिल यात्रा में कश्ट को संकेतिक करते है।
23. सिफक अर्थात कूल्हे के ऊपर या एड़ी में तिल हो तो धननाष व चरित्र की षिथिलता होती है।
24. पैर पर तिल हो तो सदा भ्रमण, पैर की अंगुलियों में तिल हो तो बन्धन और पैर के अंगुठे पर तिल हो तो अपने वर्ग में सत्कार होता है।

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