गुप्त नवरात्रि- 3 जुलाई से पूजा विधि एवं महत्व?

जान लें कि आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को ही ‘गुप्त नवरात्र’ कहा जाता है। हालांकि इस नवरात्रि के बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है।
 
ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्र के दौरान भी अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा व अर्चना ज़रूर से करनी चाहिए। पूरे नौ (9) दिनों के उपवास का संकल्प लेना चाहिए और साथ ही प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना भी ज़रूर से करनी चाहिए। यही नहीं, घटस्थापना के बाद रोजाना सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा याद से करनी चाहिए और फिर अष्टमी या नवमी के दिन आप कन्या का पूजन करें और इसी के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन भी याद से कर लें।
 
गुप्त नवरात्रि का महत्त्व
 
क्या आप जानते हैं कि देवी भागवत के अनुसार जिस तरह साल में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। ध्यान रहें कि गुप्त नवरात्रि खासतौर से तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है।
 
गौरतलब है कि इस दौरान देवी भगवती के साधक बड़े ही कड़े नियम के साथ व्रत और साधना को करते हैं। साथ ही साथ इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का भी प्रयास करते हैं।
 
कौन सी हैं गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां –
 
आपको बता दें कि गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या व तंत्र साधना के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा बड़े ही श्रद्धा से करते हैं।
 
गुप्त नवरात्रि पूजा की विधि-
 
दुर्गा पूजा में जैसे प्रथम गुप्त नवरात्रि के शुरू हो जाने से पहले ही कलश स्थापना करने का विधान होता है ठीक वैसे ही गुप्त नवरात्रि में भी यही विधान होता है। कलश स्थापना का अपना एक अलग ही महत्व होता है। लोगों की यही कामना रहती है कि मां दुर्गा की पूजा बिना किसी विध्न व रोक-टोक के साथ कुशलता-पूर्वक संपन्न हो जाएं और मां अपनी कृपा हम सभी पर बनाएं रखें।
 
इस बात का खास ध्यान रखें कि कलश स्थापना के तुरंत बाद मां दुर्गा का श्री रूप या चित्रपट लाल रंग के पाटे को ज़रूर से सजाएं। फिर मां दुर्गा के बाएं ओर गौरी पुत्र श्री गणेश का श्री रूप या चित्रपट भी विराजित करें। वही साथ ही पूजा स्थान की उत्तर-पूर्व दिशा में धरती माता पर सात तरह के अनाज, पवित्र नदी की रेत और जौं डालना ना भूलें। गुप्त नवरात्रि के समय मां दुर्गा के कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, अक्षत, हल्दी, सिक्का, पुष्पादि अवश्य डालें।