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मकर संक्रांति पर्व

सर्वार्थ सिद्धि ,पारिजात योग में मनेगी संक्रांति,जानिए किस राशि पर क्या होगा प्रभाव
महा योग में सूर्य का राशि परिवर्तन ,खरमास समाप्त ,संक्रांति पर मिलेगी सुख ,समृद्धि, ऐश्वर्य
 
भैंसे पर सवार होकर आएंगी मकर संक्रांति....
इस बार संक्रांति का आगमन कई विशेष योग में हो रहा है।इस बार मकर संक्रांति सर्वार्थ सिद्धि योग में रविवार को आने से इसका महत्व और बढ़ गया है। शनिवार को रात 1.13 मिनिट पर सर्वार्थसिद्धि योग लगेगा जो रविवार को सूर्योदय के समय तक रहने से दिवस पर्यंत माना जाएगा। इसके साथ ही गुरु और मंगल के तुला राशि में होने से परिजात योग भी बनेगा
माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि, मूल नक्षत्र, सिंह लग्न और धु्रव योग के संयोग ,शुभ फल प्रदान करने वाले हैं।
यह कई राशि वालों के लिए बेहतर फलदायी साबित होगा। मकर संक्रांति के आगमन से धन धान्य में वृद्धि, समाज में प्रसन्नता एवं आर्थिक उन्नति के योग हैं।
मूल नक्षत्र की संक्रांति में अच्छी वर्षा और कृषि की उन्नति होती है। सिंह लग्न में संक्रांति का आगमन होगा। इस स्थिर लग्न की संक्रांति सुख समृद्धि प्रदान करती है। संक्रांति के प्रवेश के बाद कुछ राशियों पर शुभ एवं कुछ जातकों पर अशुभ प्रभाव पड़ेगा।
 
मध्य भारत में अच्छा रहेगा प्रभाव....
मकर संक्रांति का वाहन भैंसा एवं सहायक वाहन ऊंट है। दही खाते हुए आएंगी, जबकि हाथों में पीला फल है। काले रंग की साड़ी और मृग चर्म की कंचुकी, नीलम का आभूषण, अर्क पुष्प की माला धारण किए हुए संक्रांति उत्तर दिशा की ओर से आ रही है और दृष्टि नैऋत्य कोण में है। उत्तर भारत में सुख सम्पन्नता एवं दक्षिण भारत में असंतोष व व्यग्रता का वातावरण रहेगा। मध्य भारत में अच्छा प्रभाव रहेगा।
संक्रांति पर्व का वाहन भैसा और उपवाहन ऊंट होने से व्यापारियों के लिए लाभदायक स्थिति निर्मित होगी।
 
निर्णय सागर पञ्चाङ्ग के अनुसार...
 
सूर्य का राशि परिवर्तन...
धनु से मकर राशि मे प्रवेश ...01:45
 
सर्वार्थ सिद्धि योग...
शनिवार रात 1:13 से रविवार दिन पर्यंत तक
 
पारिजात योग....
गुरु, मंगल के तुला राशि मे एक साथ रहने से यह योग
 
पुण्यकाल...
3 घंटे 53 मिनिट की अवधि के लिए रहेगा l
 
ऐसा होगा पर्व का स्वरूप
- वाहन भैसा
- उपवाहन ऊंट
- वस्त्र काले
- पात्र खप्पर
- भक्षण दही
 14 जनवरी को दोपहर 1.45 बजे सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश होगा। इस दिन सूर्य अस्त शाम 5.38 बजे होगा। इसके चलते श्रद्धालुओं को स्‍नान-दान के लिए पुण्यकाल 3 घंटे 53 मिनिट की अवधि के लिए रहेगा l
 
मकर संक्रांति का महत्व....
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है|
 
सूर्य के राशि परिवर्तन का असर...
 
मेष : मान -प्रतिष्ठा में वृद्धि और लाभ के अवसर मिलेंगे। संयम से कार्य करे
वृष : विवाद और मानसिक कष्ट की संभावना बनेगी।
मिथुन : कोर्ट-कचहरी के मसलों में कष्ट और धन का अपव्यय हो सकता है।
कर्क : दांपत्य संबंधों में विवाद और मान हानि की संभावना है।
सिंह : शत्रुओं पर विजय प्राप्ति और रोगों से निजात मिलेगी।
कन्या : उच्च अधिकारियों से तनाव मिलेगा, संभल कर यात्रा करने की आवश्यकता है।
तुला : जमीन-जयदादा संबंधी मामलों में सर्तकता रखने की आवश्यकता है। अपनी वाणी पर संयम रखें , किसी से भी विवाद ना करे
वृश्चिक : तरक्की के अवसर और आय में वृद्धि की संभवना है। विदेश यात्रा के भरपूर योग है
धनु : धन हानि और सिर और आंखों में पीड़ा के योग है।
मकर : मान-सम्मान में कमी आएगी। लाभ के अवसर के लिए अधिक प्रयास करने पड़ेंगे।
कुंभ : भगवान के प्रति आस्था रखे, आत्मविश्वास की कमी रहेगी, विद्वानों गुरुजनों ब्राह्मणों का सम्मान करें
मीन : धन, पदोन्नति और मान-सम्मान के अवसर मिलेंग
 
     विशेष प्रतिदिन  करे सूर्य नमस्कार
 
इनका करें दान...
1.सूर्य देव को अर्ध्य दे ,लाल पुष्प चढ़ाये सूर्य मन्त्र का जाप
करें ॐ आदित्याय नमः
2.माता पिता को प्राणम कर के घर से  बाहर जाए 
3.मंदिरो में दर्शन करे ,तिल, गुड़ और तिल के लड्डुओं        के दान का करे।
4.मन्दिर में भगवान के सामने अर्पित करे (खिचड़ी) चावल ,मूंग की दाल ,मिश्रित  को भी शास्त्रो में पुण्यकारी व शुभ फल देने वाला बताया गया है।
5.अन्न दान करे
6. ब्राह्मण को कम्बल,या शॉल, पञ्चाङ्ग, तिल के ग्यारह लड्डू दक्षिणा सहित वस्त्र जोड़ा दान करे।

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