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षुभाषुभ कालादि विचार

षुभाषुभ तिथी विवेक

अमावस्या, रिक्ता (4.9.14) तिथिया, अश्टमी, द्वादषी, शश्ठी एवं षुक्ल प्रतिपदा ' अषुभ तिथिया' एवं षेंश 'षुभ तिथिया' है। संक्रानित दिन व उससे पिछला दिन मासान्त व मासादि होने से छोड़ने योग्य है।

कृश्ण पक्ष की अश्टमी, अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दषी एवं सूर्य संक्रानित, ये 'पंचपर्व तिथिया' है। सामान्यत: से षुभ कार्यो में वर्जित है। तिथी व वारादिकों के योग से सिद्व, मृत्यु व अमृत योग बनता है। इनका विवके यहा प्रस्तुत है।

1. 5.10.15 तिथी में बृहस्पति, 1.6.11 में षुक्रवार, 3.8.13 में मंगलवार, 2.7.12 में बुधुवार, 4.9.14 में षनिवार रहने पर सिद्वि योग होते है। ये षुभ माने जाते है।

2. म्ांगलवार में भद्रा तिथी 2.7.12 रहने पर, 3.8.13 में गुरूवार रहने पर, 5.10.15 में रवि या सोमवार रहने पर, 1.6.11 में बुध या षनिवार रहने पर 'अमृतयोग' बनते है।

3. 5.10.15 तिथि में षनिवार, 1.6.11 मेंं रविवार व मंगलवार, 2.7.12 में सोम व षुक्रवार, 3.8.13 में बुधुवार, 4.9.14 तिथी में गुरूवार होने पर 'मृत्यु योग' बनता है।

वर्श के दस पदाधिकारी

आकाषीय कौंसिल में प्रतिवर्शग्रहों को दस पद दिऐ जाते है। इनसे प्रतिवर्श विभिन्न क्षैत्रों का षुभाषुभ फल विचार किया जाता है।

1. राजा विचार

चैत्र षुक्ल प्रतिपदा को जिस ग्रह का वार हो, वही ग्रह वर्श का राजा होता है। वह आकाषीय मनित्रपरिशद में प्रधान मंत्री की हैसियत रखता है। तथा वर्श में सभी प्रकार के षुभाषुभ मेदनीय भविश्य का प्रभावित करता है। क्रुर ग्रह राजा हो तो ठगी, बेर्इमान, कर वृद्वि दुर्घटनाए आदि अधिक होती है। तथा षुभ ग्रह राजा होने पर षुभ फलों की अधिकता होती है।

2. मंत्री विचार

प्रतिवर्श मेश संक्रानित के समय जो वार हो, वही ग्रह मंत्री कहलाता है। इससे भी क्रुर ग्रह व षुभ ग्रह के विभाग से षुभ या अषुभ फल का विचार किया जाता है।

3. सस्येष विचार

श्रावण या कर्क संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह सस्येष अर्थात फसलों का विभागाध्याक्ष होता है। षुभ ग्रह को यह विभाग मिलने से फसलों की वृद्वि हेंती है।

4. धान्येष विचार

यह षीतकालीन फसलों का स्वामी होता है। धनु संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह धान्येष कहलाता है।

5. मेघेश विचार

सूर्य के आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेष के समय जो वार हो वही ग्रह मेघेश कहलाता है। यह प्राय: 21 जून को घटीत होता है।

6. रसेष विचार

तुला संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह रसेष कहलाता है। इससे गुड, खाण्ड़, रसकस, र्इख आदि का विचार होता है।

7. नीरसेष विचार

मकर संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह नीरसेष कहलाता है। अससे सभी धातुओं व व्यापार का विषेश विचार होता है।

8. फलेष विचार

इससे फल फूल व साग सब्जी का विषेश विचार हेात है। मीन संक्रानित के समय जो वार हो वह फलेष होता है।

9. धनेष विचार

यह आर्थिक उन्नति का अधिश्ठाता होता है। कन्या संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह धनेष कहलाता है।

10. दुर्गेष विचार

यह सुरक्षा या प्रतिरक्षा विभागाध्यक्ष होता है। सिंह संक्रानित के दिन जो वार हो वही ग्रह दुर्गेष कहलाता है।

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