संतान का लिंग बताता है चीनी कैलेंडर

मनचाही संतान प्रापित के लिए सवरोदय विज्ञान का सिद्धांत आज भी लोक व्यवहार में काफी प्रचलित तथा फलदायी है। इस उíेष्य के लिए चीन का लिंग निर्धारण कैलेंडर विष्व विख्यात है, जो इचिछत संतान प्रापित का महत्वपूर्ण साधन है।

यह रवि के भ्रमण तथा महिला के गर्भधारण की आयु के मध्य एक निषिचत संबंध बता भावी संतान का लिंग बताता है।

उपरोक्त चीनी कैलेंडर बीजींग की एक शाही इमारत के खंंडहर में करीब 700 वर्ष पूर्व वैज्ञानिको को मिला था। इस कैलेंडर की सहायता से आप सरलता से अनुमान लगा सकते है कि आने वाली संतान लडका होगा या लडकी। उपरीेक्त कैलेंडर से 18 से 45 तक की संख्याएं स्त्री की आयु दर्षाती है तथा जनवरी से दिसम्बर माह गर्भधारण की सिथति से सूचित कराती है। उदाहरण के लिए स्त्री की आयु 27 वर्ष है और उसको गर्भधारण जनवरी माह में हुआ हो तो आने वाली संतान कन्या होगी। हजारो लोगो ने उपरोक्त चीनी कैलेंडर के आधार पर संतान का लिंग निर्धारण किया और 991 मामलों में सलता प्राप्त हुर्इ।

उदाहरण के लिए यदि किसी गर्भवती स्त्री जन्मतिथी 19 जनवरी 1970 है तो 19 जनवरी 1998 के दिन उसकी सही उम्र होगी वर्ष।

19.1.1998 - 19.1.1970 ¾ 28. गर्भधारण हुआ है जनवरी में तो पहले स्तंभ में 28 के नीचे जनवरी की लाइन में ष्गष् में यह चिन्ह है। उत्तर है - पुत्र होगा।

स्रल उपाय - यदि विवाह हुए कर्इ वर्ष बीत चुके है व संतान की प्रापित नहीं हुर्इ तो आप संतान गोपाल साधना करके देखे। यह साधना 90 दिन की हाकती हैं व पति - पतिन दोनो ˜ारा की जाती है। इस साधना में गोपाल यंत्र की आवष्यकता हाकती है। 90 दिन में सवा लाख जप पूरे करने होते है। 30 दिन तक शरीर पर पीला कपडा रखना आवष्यक है। अगले 30 दिन दोपहर के भोजन में पहले 5 ग्रास किसी भी पीली वस्तु के लें । अगले 30 दिन तक कोर्इ भी पीली वस्तु दान करे

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