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प्रकीर्णविशयाध्याय

सूर्य :

सूर्य स्नान, दान, जप, होम, यन्त्रधारण ये पंचविध षानित प्रकार कहे गए हैं। अनिश्ट प्रभाव दूर करने के लिए इनका प्रयोग करें।

  • गोचर सूर्य अनिश्ट कारक हो तो स्नान के जल में खसखस या लाल फूल या केसर डाल लें।
  • अनिश्ट गोचर के समय प्रत्येक रविवार या संक्रानित के दिन तांबा, गुड़, मसूर दान करे। इनमें से जो पद्वार्थ सुलभ हों। वे ले लें। सारे पद्वार्थ हों तो उत्तम है।
  • 'ऊ घृणि: सूर्य आदित्य:' इस मन्त्र का जाप करें व इसी से हवन करें। मन्त्रजप कम से कम 10 बार या 20 बार या 108 बार या अधिक बार भी कर सकते है।
  • तांबे के पत्र पर या भोजपत्र पर या दुर्लभता में कागज पर ही लाल चन्दन, केसर, कस्तुरी, रगड़कर, उससे यह यन्त्र लिख लें। अनार की कलम हो तो सर्वोतम है। ये लेखन पद्वार्थ व कलम सब ग्रहों के लिए उपयोगी है।

सूर्य यन्त्र :

भार्गव नाड़ी मुहूर्त :

प्रत्येक वार को सूर्योदय से 24-24 मिनट तक विशादि नाड़ी मुहूर्त होते है। 27 नक्षत्रों के 27 मुहूर्त, 28 वा ज्योत्सना, 29वा मैत्री, 30वा सन्ध्या मुहूर्त होता है। ये ही मुहूर्त इसी क्रम से रात में भी होते है। इस तरह 30 घटी या नाड़ी मुहूर्त रात दिनं में आवृत होने से कुल 60 मुहूत हो जाते है। प्रत्येक नाड़ी का फल व उपयोग अलग-अलग है। फल वारानुसार होता है।

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