पंचांग परिचय

पंचांग परिचय

अधिक व क्षय मास - 13 मास अधिकमास या मलिम्लुच मास या पुरूशोत्तम मास कहलाता है। सैद्वानितक रूपव से जिस चान्द्र मास में सूर्य की सकं्रानित न हो वह 'अधि या मल मास' कहा जाता है।

 

वार

सूर्यसिद्वान्त के मत से व पषिचमी मतानुसार प्रथम आधी रात से अगली आधी रात तक एक ही 'वार' रहता है। हमारे विचार से 'आधी रात' वाला मत अनेक कारणों से अधिक उपयोगी है।

 

योग

योग का अर्थ है जोड़। सूर्य व चन्द्रमा के स्पश्ट राषयादि के जोड़ को ही 'योग' कहते है। दनकी संख्या 27 है-

 

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करण

यह भी भारतीय पंचाग का मुख्य घटक अंग है। ये कुल मिलाकर 11 होते है।

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करण सारिणी

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