मंगली दोश के उपाय

• जातक के लग्न में अषुभ मंगल होने से मंगली दोश बनता हो तो जातक को हाथी के दांत से बनी वस्तुओ को घर में तथा अपने साथ रखना उपयोगीं होता है। (यदि दूसरे भाव में बुध भी हो तथा 7,9,11 भाव खालीं हो तो पीतल के बर्तनवस्तुएं आदि जातक के घर में रखें तथा पीपल ब्रह्राा की पूजा करे। ऐसे जातक को किसी से मुफत में कुछ नहीं लेना चाहिए)।
• चतुर्थ भाव में मंगल से जातक मंगली हो तो साधु, माता तथा बन्दरों की सेवा करनी चाहिए। प्रतिदिन प्रात: दातों की सफार्इ पर विषेश ध्यान देना चाहिए। चीनी, षहद का दान करना चाहिए तथा विंकलाग व काले व्यकित से मित्रता नहीं करनी चाहिए। ऐसे जसतक को षिवाराधना या हनुमानजी की पूजा भी षुभ रहती है। दूध, चांदी, चावल, मोती च हाथीदांत घर में रखने चाहिए।
• सप्तम भाव से जातक मंगली हो तो जातक का भैंस, सपंप बिच्छू, कौआ, मछली तथा चमगादड़ो को भोजन कराना चाहिए। काले उड़द, षराब, सरसों का तेल, कोयला, नमक आदि का दान करना चाहिए। भैरव मनिदर में षराब चढ़ाना भी उसके लिए लाभकारी होगा, बबूल व खजूर के वृृक्षों को पानी देना, चाचा की सेवा करना भी उसके लिए षुभ है। लाल किताब के अनुसार उसे षहद से भरा मिÍी का पात्र निर्जन स्थान में भूमि में दबाना चाहिए। तथा बांस की बासुंरी में चीनी भरकर निर्जन या ष्मषान में भूमि में दबा देना चाहिए। किन्तु अन कार्यो को किसी की जानकारी में आए बिना करना चाहिए।
• 8वें भाव में जातक मंगली हो तोें उसको मीठी रोटी (नित्य नही हो तो कम से प्रति मंगलवार (कुत्ते को खिलानी चाहिए।) रोटी गुड़ से बने, न कि चीनी से)। या रोटी पर सरसों का तेल चुपड़कर कुत्तो या गायों को खिलाए। विधवाओं का आर्षीवाद लें। भैरव की उपासना करें।
• 12वें भाव में जातक मंगली हो तो उसे चाहिए। कि अपने भाइयों सहित षिवराधना करे तथा भागयों को लाल वस्त्र व पहनने दें। मीठी वाणी बोले, मांस का सेवन न करे, सदाचारी रहे तथा हनुमान चालीसा का पाठ या हनुमानजी की पूजा करे अथवा दुर्गा सप्तषती का पाठ करें। मदिरा का सेवन न करे। मां, दादी व सास का आषीर्वाद लेता रहे।