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ज्यातिश तन्त्र द्वारा वास्तुदोश निवारण

  • भवन नम्बर 9,18,27,36,45,108 हो या प्रवेंष द्वार पर मुखी हो तो भवन का अक्षर प, षि, म, कु, अ, ध, भू, नाम लाल, गोल्डन, हल्का पीला, नांरगी, एंव हल्के रगों में होना चाहिए। नाम त्रिकोण आकृति में नही होना चाहिए नाम तख्ती पर ताम्र पत्र को उपयोग में लेना चाहिए। नाम को मुख्यद्वार मे दायें भाग में स्थापित करना चाहिए।
  • जंहा दक्षिण एंव पषिचम दिषा का मिलाप होता है। और उन भवनों के अंक 1, 10, 19, 28, 37, 100 या फिर भवन का प्रवेंष द्वार पूर्वमुखी हो उपयुक्त सिथति में भवन का नाम ग, पू, भा, प्र, दि, हि, हे, अ, आ, र के प्रथम अक्षरों में से चुनना चाहिए। भवन क नाम का पत्थर गोल आकृति अथवा अश्टकोण आकृति में पीले गुलाबी लाल हल्के रगों में होना चाहिए। पत्थर को भवन के दार्इ ओर लगाएं।
  • जिन मकानों की संख्या 2, 11, 20, 29, 38, 101 और भवन का मुख्यद्वार उत्तर-पषिचम या पूर्वमुखी हो तब भवन का नाम ष, हि, इ, क, ता, सो, र, म, इन अक्षरों में चुना करना चाहिए। नाम के पत्थर की आकृति अश्टकोण आकृति में सफेद क्रीम हल्के रगों में होनी चाहिए। पत्थर को भवन के बार्इ ओर स्थापित करे।
  • जिन मकान या भवन के नम्बर 12, 21, 30, 39 या भवन के प्रवेंष द्वार उत्तर पूर्वमुखी हो। इन सिथतियों में भवन का नाम गु, सु, र्इ, ज, अ अक्षरों के साथ चुना जा सकता है। भवन के नाम का पत्थर चौकोर हो पीला, बैगनी, हल्के हरें रगों में होना चाहिए।
  • जिन मकानों की संख्या 4, 13, 22, 31, 40, 103 या भवन का प्रवेंष द्वार पूर्वमुखी हो। इस सिथति मंें भवन का नाम क, दी, रा, अ, पू, हि रखा जा सकता है। भवन का नाम नीले, भूरे, क्रीम हल्के पीले केसरिया रगों में हों।
  • भवन का नम्बर 5, 14, 23, 32, 41, 104 या प्रवेंष द्वार उत्तरोमुखी हो तो नाम के प्रथम अक्षराेंं ता, वो, च , हे, रो, टी, सी, से चुना जा सकता है। भवन का नाम नीले, नांरगी रगों में हों। नाम पीतल धातु से लिखवाना चाहिए।
  • भवन का नम्बर 7, 16, 25, 34, 43, 106 या भवन का द्वार उत्तर-पषिचममुखी हो तो ऐसी सिथति में भवन के नाम का अक्षर ध, षि, ज, फ, प, रखा जा सकता है। भवन के नाम का पत्थर नीला, सफेद, क्रीम रगों में हों।
  • अगर भवन का नम्बर 8, 17, 26, 35, 44, 107 या भवन का प्रवेंष द्वार पषिचममुखी हो तो भवन के नाम का अक्षर से, था, सौं, र, द, छ रख सकते है। भवन का नाम चाकलेट कलर, राख जैसा रंग या नीले रगों में होना चाहिए। नाम के पात्र निर्माण पर पंच धातुओं से लिखा जाए।

पूजाघर में जाली (नेट) वाला पर्दा लगाएं। पर्दे का रंग कैसा हो कौन से कमरे में किस रंग का पर्दा लगांए। जिस दिषा में कमरा हो उस कमरे में निम्नानुसार रंग पुतवाएं।

  • दक्षिण दिषा - गुलाबी, मूंगिया, लाल।
  • पूर्व दिषा - सफेद, गोल्डन।
  • पषिचम दिषा - नीला, फिरोजी, हल्का आसमानी।
  • उत्तर दिषा - हल्का हरा, हल्का नीला,
  • षयनकक्ष मे - हल्का गुलाबी, सलेटी, गहरा नीला, चाकलेटी।
  • पूजा घर - सफेद या पीला।
  • अतिथि - गृह - पीला, नीला।
  • रसोर्इघर - पीला, नांरगी, चाकलेटी।
  • भोजनकक्ष - गुलाबी, सलेटी, गहरा नीला, चाकलेटी।

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