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ग्रह दान वस्तु चक्रम

टीका-साधु, ब्रáणों और भूखों को भोजन कराने से, पीपल की पूजा करने से, वेदपाठी ब्रáण को प्रणाम करने से, गुरूजनों की आज्ञा पालन से, कथा के पढ़ने सुनने से, हवन, दान, जप करने से ग्रह प्रसन्न होते है।

ज्योतिष ज्ञान

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नौ प्रकार की मणिया

मणिया अनेक प्रकार की होती है। उनमें से 9...

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रत्न और उनका प्रभाव

मेरे परिचित एक पारखी-तांत्रिक का कथन है कि रत्नों द्वारा...

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रत्न अभिमनित्रत कैसे करें

रत्न का रंग बदलना, तडक जाना अथवा अगूंठी से निकल...

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रत्नों का परिचय

रत्न षब्द श्रेश्ठता का परिचय देता है। इसे एक विषेशण के रूप मे...

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रूद्राक्ष द्वारा रोग निवारण

रूद्राक्ष संस्कृत में इसी उच्चारणके साथ अन्य...

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रूद्राक्ष का विवरण

रूद्राक्ष के जन्मदाता भगवान षंकर है। रूद्र का अर्थ...

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मंगली दोश का निराकरण

मंगल (1,4,7,8,12 भावों में मंगल बैठे तो मंगली दोश कहा जाता है।) जिस भाव में ...

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