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गर्भाधान

गर्भाधान का विचार

मासिक धर्म क समय जब चन्द्रमा अनुपचय स्थान (1,2,4,5,7,8,9,12) में हो और मंगल देखे तो उस समय गर्भधारण की सम्भावना होती है। यदि यह सिथति न बनें तो उस गर्भधारण की सम्भावना निर्बल रहती है।

ऐसे गर्भधारण योग्य मास में जब पुरूश की जन्मराषि से 3,6,10,11 स्थानों में चन्द्रमा गोचर करे और गुरू उसे देखता हो तो गर्भाधान करे।

गर्भाधान की समय षुद्वि में अमावस्या, पुर्णिमा, अपना या पतनी का जन्मदिन, संक्रानित, ग्रहण, अश्टमी आदि को छोड़ देना चाहिए।

गर्भाधान में वर्जित समय

भद्रा, 4,8,9,6,14,15,30 तिथिया, संक्रानित, ग्रहण, सन्ध्याकाल, मासिक धर्म प्रारम्भ में चार रातें, तीनों गण्डान्त, जन्म नक्षत्र, जन्म दिवस, पापयुक्त लग्न, जन्म लग्न, जन्म लग्न से अश्टम लग्न, माता-पिता का श्राद्व दिवस, दिन का समय, पापहत या उत्पातहत नक्षत्र व दिन।

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