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चक्र

।। उच्च-नीच चक्र ।।

।। स्वाभाविक मैत्री चक्र ।।

केतु, बुध व षनि नपुंसक। चन्द्र्र राहु षुक्र स्त्री व षेश ग्रह सूर्य मंगल गुरू पुरूश ग्रह है।

दिन में जन्म हो, सुर्य, लग्न व चन्द्रमा तीनों ही विशम राषियों में हों तो पुरूश की कुण्डली में महाभाग्य योग होता है।

रात्रि में जन्म हो और लग्न, चन्द्र, सूर्य तीनों ही सम राषियों में हों तो स्त्री की कुण्डली में महाभाग्य योंग होता है।

गुरू से कैन्द्र (1,4,7,10) में चन्द्रमा हो तो केसरी योग होंता है। असे पाराषरमें गजकेसरी योग कहा जाता है।

बृहस्पति से 6, 8, 12 भावों में चन्द्रमा हो तो षकटयोग होता हेै। लेकिन चन्द्रमा यदि लग्न से कैन्द्र में हो तो षकटयोग इस सिथति में भी नही बनता है।

सूर्य से 1, 4, 7, 10 में चन्द्रमा हो तो अधमयोग 2, 5, 8, 11 में चन्द्रमा हो तो सम योग व 3, 6, 9, 12 में चन्द्रमा हो तो वरिश्ठ योग बनता है।

गजकेसरी योग के वास्तविक उदाहरण दिए जा चुके है। पीछे उदाहृत प. नेहरू की कुण्डली में लग्न में चन्द्रमा व शश्ठ में गुरू है। यह षकटयोग का लक्षण होता, लेकिन चन्द्रमा कैन्द्र में होने से योग नही बनता है। अधम सम वरिश्ठयोग पीछे उदाहृत कुण्डलियों में सरलता से देखें जा सकते है।

बृहज्जातक के अभिनव भाश्य में दिगम्बर मुनि श्री विधानन्द जी की कुण्डली दी गर्इ है। तुला, लग्न, मेश, में सूर्य चन्द्र व सोयकाल सूर्यास्त से पूर्व जन्म है। महाभाग्य योग बनता है। हम समझते है कि महाभाग्य योग का उत्कट प्रभाव दोपहर या मध्यरात्रि के आसपास विषेश होता है। महाभाग्य योग का उदाहरण एक और दिया जा रहा है।

1.) सप्तेष यदि पंचम में हो जातक की स्त्री की अल्पायु होती है या वियोग होता है। अथवा सन्तान नही होती है।
2.) पंचमेष सप्तम में हो या अश्टमेष सप्तम में हो तो पत्नी की हानि, सुख में अत्यन्त कमी होती है।
3.) पंचम में क्षीण चन्द्रमा हो और 1, 7, 12 भवों में पापग्रह हों तो स्त्री व पुत्र का सुख कम होता है।
4.) सप्तम में राहु व सूर्य हों तो स्त्री के कारण धन नाष होता है।

इस कुण्डली में लग्नेष चन्द्रमा मकर नंवाष में व षनि कन्या नंवाष में है। चन्द्राश्टक वर्ग में मीन राषि में 6 रेखाए है। साथ ही मेश व सिंह में भी 6 रेखाए है।

10, 2, 6 राषि या 1, 5, 12 राषिया जीवन साथी की हो सकती है। लग्नेष व सप्तमेष की नीचोच्च राषिया 2, 8, 1, 7 है।

वास्तव में इनकी पत्नी की मीन राषि व वृषिचक लग्न है।

लग्नेष षुक्र की नवांष राषिया 6, 10, 2 तथा सप्तमेष मंगल की नंवाष राषिया 4, 8, 12 और नीचोच्चराषिया 10, 4, 12, 6 है। इनकी पत्नी की जन्मराषि कर्क है।

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