क्या आप जानते है क्या होते है पाप और पुण्य?

हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथ वेदों का संक्षिप्त है उपनिषद और उपनिषद संक्षिप्त गीता। स्मृतियां उक्त तीनों व्यवस्था और ज्ञान संबंधी बातों को क्रमशः और स्पष्ट तौर से समझाती है। जो विद्वान कहते है कि जीवन को ढालना चाहिए धर्मग्रंथ अनुसार। आज के लेख में हम धर्म के अनुसार प्रमुख दस पुण्य और दस पाप। तो इन्हे जानकर और इन पर अमल करके जो भी व्यक्ति है वो अपने जीवन में क्रांति कारी परिवर्तन ला सकते है।

जानिए कौनसे है दस पुण्य कर्म?

  • हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना।
  • दम- उदंड न होना।
  • क्षमा- बदला न लेना, क्रोध का कारण होने पर भी क्रोध न करना।
  • अस्तेय- दूसरे की वस्तु हथियाने का विचार न करना।
  • शौच- आहार की शुद्धता। शरीर की शुद्धता।
  • इंद्रियनिग्रह- इंद्रियों को विषयों (कामनाओं) में लिप्त न होने देना।
  • धी- किसी बात को भलीभांति समझना।
  • विद्या- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान।
  • सत्य- झूठ और अहितकारी वचन न बोलना।
  • अक्रोध- क्षमा के बाद भी कोई अपमान करें तो भी क्रोध न करना।

जानिए कौनसे है दस पाप कर्म?

  • दूसरों का धन हड़पने की इच्छा।
  • निषिद्ध कर्म (मन जिन्हें करने से मना करें) करने का प्रयास।
  • देह को ही सब कुछ मानना।
  • कठोर वचन बोलना।
  • झूठ बोलना।
  • निंदा करना।
  • बकवास
  • चोरी करना।
  • तन, मन, कर्म से किसी को दु:ख देना।
  • पर-स्त्री या पुरुष से संबंध बनाना।

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