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Hanuman Mantra

Hanuman Mantra

Hanuman Chalisa day Tuesday, Sunderkand, Ram defense sources, the epic verses in your heart to have his day off. Another name of Shri Hanuman Ji is devotion to earthly life. To conquer the difficulties of life following twelve names of Lord Hanuman show their miraculous effect. Chanting these names are earthly pleasures, not only in age but also leads to increase. Native continuous chanting of these namesis to protect against every type of Hanuman. Twelve of Hanuman miraculous Name:

1) Hanuman

2) AnjaniSut

3) Air Son

4) mahaabal

5) Ramesht

6) Falgun friend

7) Pingaksh

8) AmitVikram

9) Uddikramn

10) Sita mourning corrosion

11) Laxman life Advertisers

12) DsgrivDrpha

These Namoen when and at what time should chant:

- In the morning when they wake up in the state in which the person chanting the twelve names longevity is 11 times.

- In the afternoon, chanting the twelve names of 11 times the person is rich.

- Noon evening while chanting the twelve names of the person who is satiated family pleasures.

- While sleeping at night chanting the twelve names of the person who is the enemy victory.

These twelve continuous chanting of the names are of persons who are protected from all kinds of Shri Hanuman Ji.

Manglik dosh shanti pooja

Manglik dosh shanti pooja

India is a country where traditions are followed from the ancient time under the guidance of astrologers. Marriage is a pious relation in India and before marriage matching of kundali prevalent. If the girl or boy has manglik dosh then there is lot of troubles to get marry. So people take help astrologers to remove this effect or with the guidance of astrologers they organize a pooja that is called manglik dosh shanti pooja.

Manglik dosh in India like a phobia. Without removing this marriage cannot happen. This is known that manglik dosh is the bad effect of mangal on a person. Some people strongly believe in and some take it as a myth. Till now questions are raised on this it is real or not. It is known that when mangal graha is in their first home, fourth home, 12th home then mangal dosh comes into the existence.

If bride or groom has mangal dosh and also shani dosh then the effect of manglik dosh becomes null because mangal and shani are reciprocals to each other. The effect of one removes the effect of other.

A experienced and professional astrologers are highly educated and perfect in the Vedic and outside country astrology. If they have experience of more than 12 year and have read thousands of readings and kundali then easily they can solve all your problems like love related, education related, business related, marriage related, career related etc…

If people definitely detect mangal dosh in their kundali then people should conduct a highly experienced

Pandit ji and astrologers. Only they can remove your mangal dosh. In this condition never take manglik dosh in an easy way because this is effect of graha and Nakshatra. If in your kundali they are not on their correct position then they can harm your career. Never try to do this pooja on their own because of the money saving. So if you have this dosh then this highly recommendable that it must be remove.

 

Incarnations of Lord Shiva

Incarnations of Lord Shiva

Lord Shiva has many incarnations but we are describing five most of his incarnations, yet people do not know about them.

Tat Purusha: On earth, in the 21st Kalpa known as Peetavasa, Lord Brahma only wore yellow apparels.  Lord Brahma’s prayers resulted into the manifestation of an effulgent entity, considering those entities as Lord Shiva; Lord Brahma started chanting the Mantras of Shiva Gayatri. When he finished chanting the mantas, numerous avatars were born all wearing yellow clothes.

Namdeva: During the 20th Kalpa named ‘Rakta’ (blood), the complexion of Lord Brahma turned red, while he was busy in his deep meditation. That time, an entity was born whose complexion was also red. Lord Brahma named him Namdeva considering him to be an incarnation of Shiva; later on four sons were born to Namdeva.

Sadhojat: Lord Brahma gave him the name Sadhojat and eulogized him, later on from the physique of Sadhojat four of his disciples manifested, whose names were – Nandan, Sunand, Upanandan and Vishwanandan.

Ishan: During the Vishwaroop Kalpa, manifestations of Saraswati and Ishan Shiva took place. From Ishan Shiva four divine entities were born named, Jati, Shikhandi, Mundi and Ardhamundi.

Ghoresh: This time a black avatar was born while Lord Brahma was engrossed in his meditation. Their names were Krishna, Krishnashikha, Krishnamukha and Krishnakanthdhari.

देवी मंत्रो से करे अपने जीवन की हर बाधा को दूर

 

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कार्यक्षेत्र या परिवार से जुड़े मामलों में मिले कई अनचाहे नतीजे कुछ अवसरों पर गहरी चिंता में डूबो देते हैं। असल में काम और सफलता में संकल्प शक्ति निर्णायक होती है। मजबूत संकल्प शक्ति के बिना मनोबल कमजोर होता है। इससे कर्म पूरे समर्पण भाव से नहीं होता और मनचाहे लक्ष्य या सफलता को पाना मुश्किल हो जाता है।

शास्त्रों में देवी उपासना पावन और मजबूत संकल्प शक्ति से ही मन और कर्म में संयम व संतुलन बनाकर जीवन से जुड़े हर मकसद को पूरा करने के लिए बेहद असरदार मानी गई है।

भय, संशय से मुक्त जीवन के लिए ही देवी उपासना के विशेष दिनों जैसे शुक्रवार विशेष देवी मंत्रों के ध्यान का महत्व बताया गया है। जानिए ऐसे ही 10 देवी मंत्र, जो बोलने में मुश्किल से चंद पल ही लेंगे, लेकिन बड़ी से बड़ी परेशानियों से निजात देंगे।

शुक्रवार की सुबह व शाम स्नान के बाद स्वच्छ व यथासंभव लाल वस्त्र पहनकर दुर्गा प्रतिमा या नवदुर्गा की तस्वीर को लाल चंदन, अक्षत, सुहाग सामग्री, चुनरी, लाल फूल व दूध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।

देवी पूजा के बाद यहां बताए जा रहे चंद पलों में बोले जा सकने वाले 10 छोटे-छोटे, किंतु असरदार देवी मंत्रों का स्मरण परेशानियों से छुटकारे की कामना से करें। देवी के सामने धूप व दीप जलाकर ये 10 देवी मंत्र गहरी श्रद्धा और सुख-सफलता भरे जीवन की चाहत के साथ स्मरण करें-

ॐ महाविद्यायै नमः।

ॐ जगन्मात्रे नमः।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ शिवप्रियायै नमः।

ॐ विष्णुमायायै नमः।

ॐ शुभायै नमः।

ॐ शान्तायै नमः।

ॐ सिद्धायै नमः।

ॐ सिद्धसरस्वत्यै नमः।

ॐ क्षमायै नमः।

 

मंदिर की परिक्रमा करने के लाभ

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भगवान की पूजा-अर्चना के बाद हम मंदिर के चारो ओर परिक्रमा करते हैं। सामान्यत: हम सब देवी-देवताओं की परिक्रमा सभी करते हैं, लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि परिक्रमा क्यों की जाती है। और परिक्रमा करने से क्या लाभ मिलेगा।
मंदिर की परिक्रमा संबंध में हिंदू शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। परिक्रमा करने से हमारे पाप होते है। देवी-देवताओं की कृपा से पैसों की तंगी से मुक्ति मिलती है और धन की प्राप्ति होती है । घर-परिवार में प्रेम बना रहता है।

आरती, पूजन और मंत्र जप के चमत्कारी असर से मंदिर परिसर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाहन होता रहता है। जब परिक्रमा करते है तो मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा हमें अधिक मात्रा में प्राप्त होती है और इसी वजह से श्रद्धालुओं को शांति और सुख का अनुभव होता है। मंदिर से प्राप्त होने वाली सकारात्मक ऊर्जा अथवा दैवीय शक्ति हमें चिंताओं से मुक्त करती है। हमारा मन भगवान की भक्ति में लग जाता है और यही कारण ह की हम भगवान की भक्ति में लीन हो जाते है समाज व परिवार को त्याग देते है ।

परिक्रमा के माध्यम से हम दैवीय शक्तियों को ग्रहण कर सकते हैं और परिक्रमा के माधयम से हम देवी देवताओ को प्रश्न कर सकते है । इसी वजह से परिक्रमा की परंपरा बनाई गई है। जिससे भक्तों की सोच भी सकारात्मक बनती है और बुरे विचारों से मुक्ति मिलती है। प्रतिमा की परिक्रमा करने से हमारे मन को भटकाने वाले विचार समाप्त हो जाते हैं और शरीर ऊर्जावान व नयी उमंग उत्पन होती है। रुके कार्यों में सफलता मिलती है।

जीवन को खुशहाल बनाने वाले कुछ सरल उपाय

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यहाँ पर आपको जीवन को खुशहाल बनाने वाले कुछ सरल उपाय बताये जा रहे है जिनके द्वारा आप पुण्य अर्जित कर सकते है -

- प्रात:काल उठते ही माता-पिता, गुरु एवं वृद्धजनों को प्रणाम नित्य करें। उनका आत्मिक आशीर्वाद प्राप्त करके नित्य सुफल प्राप्त करें।

- नित्य प्रति गाय को गुड़, रोटी दें। हो सके तो गाय का पूजन करके आज के दिन यह कामधेनु वांछित कार्य करेगी, ऐसी भावना करें।

- नित्य प्रति कुत्तों को रोटी खिलानी चाहिए। पक्षियों को दाना भी डालें तो शुभ है।

- यदि आपके शहर, गांव के पास तालाब, नदी या सागर हो तो उसमें कछुए और मछलियों को कुछ आटे की गोलियां बनाकर खिलानी चाहिएं।

- नित्य प्रति चील-कौओं को खाने-पीने की वस्तुओं में से कुछ हिस्सा अवश्य डालना चाहिए तथा गौ ग्रास भी भोजन करते समय नियमित निकालें।

- घर आए अतिथियों की सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिए। उनकी ओर से प्राप्त संदेश ध्यान से सुनकर योग्य संदेश का अनुकरण करना चाहिए।

- हमेशा प्रात:काल भोजन बनाते समय माता-बहनें एक रोटी अग्रिदेव के नाम से बनाकर घी तथा गुड़ से बृहस्पति भगवान को अर्पित करें तो घर में वास्तु पुरुष को भोग लग जाता है, इससे अन्नपूर्णा भी प्रसन्न रहती है।

- प्रात: स्नान करके भगवान शंकर के शिवलिंग पर जल चढ़ा कर 108 बार ऊँ नम: शिवाय’ मंत्र की पूजा से युक्त दंडवत नमस्कार करना चाहिए।

- स्नान के पश्चात प्रात: सूर्यनारायण भगवान को लाल पुष्प चढ़ाकर बार-बार हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए।

- प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध थोड़ा चढ़ा कर सात परिक्रमा करके सूर्य, शंकर, पीपल इन तीनों की सविधि पूजा करें। चढ़े जल को नेत्रों में लगाएं और पितृ देवाय नम: भी 4 बार बोलें तो राहु, केतु, शनि, पितृ दोष का निवारण होता है।

- प्रात:काल सूर्य के सम्मुख बैठ कर एकांत में भगवत भजन या मंत्र या गुरु मंत्र का जप करना चाहिए।

- प्रत्येक प्राणी पर दया भाव के साथ तन-मन-धन से सहयोग यथा योग्य करना चाहिए। सेवा कर यश प्राप्ति की भावना नहीं रखें।

- अमक्ष्य वस्तुओं को कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

- सदैव ईश्वर की महान शक्ति पर पूर्ण विश्वास करते हुए जीवन जीना चाहिए तथा अधर्म (हिंसा) से डरते हुए यानी बचते हुए धर्म (अहिंसा) की भावना से मानव मात्र का कल्याण हो, ऐसा चिंतन होना चाहिए।

- प्रत्येक प्राणी के प्रति यथा शक्ति दया, स्नेह और सेवा की भावना रखें।

- रविवार या मंगलवार को कर्ज नहीं लें, लेना ही पड़े तो बुधवार को कर्ज लें। यह भी ध्यान रखें कि संक्रांति हो और वृद्धि योग हो अथवा हस्त नक्षत्र हो, तब कर्ज नहीं लें।

- मंगलवार को कर्ज चुकाना चाहिए।

- नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अंतिम रोटी कुत्ते को दें तो घर में रिद्धि-सिद्धि का आगमन एवं भाग्योदय होगा।

- पितृ दोष से मुक्ति के लिए नित्य महा गायत्री के महामंत्र की नियमित साधना करें तथा श्री रामेश्वर धाम की यात्रा कर वहां पूजन करें।

- मातृ दोष से मुक्ति के लिए विष्णु भगवान की पूजा करें, उनकी कथा सुनें, चंद्रायण व्रत करें और यथासंभव यमुना नदी में स्नान तर्पण करें।

- दरिद्रता दूर करने के लिए 108 लौंग और 108 इलायची के दाने लें। उन्हें ग्रहण काल में अथवा दीपावली के दिन जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को देवी-देवताओं की तस्वीर पर लगा कर नित्य दर्शन तथा प्रार्थना करें।

- यदि पलंग या खाट पर सोते हैं तो प्रात:काल उठते ही पृथ्वी को नमन करें।

- किसी भी नए कार्य के लिए प्रस्थान से पूर्व मंगलीक (गुड़) का सेवन जरूर करें।

February 14 ( Friday) evening special, try and remedy this miracle -

If you would like to receive the grace of Mahalakshmi rare yoga is coming this Friday . Measures taken in this yoga will give you wonderful fruit in a few days . On February 14, the full moon of the month of Magh according to Hindi calendar . The full moon is called the Magi . It is a full moon on Friday , conducted by the grace of Mahalaxmi . Mahalakshmi Friday told a special day of worship .

The particular method of worship of Mahalaxmi Know the photos . The liturgical method is complete in two stages . By doing so, you will receive a special grace of Mahalakshmi . Goddess Lakshmi is happy to get rid of the cash-strapped .

The first step of the method of Mahalakshmi Puja –

Full Moon on the evening of Friday and purifies the body , take a shower etc. deeds . After this Lakshmi Puja at home Prepare a clean and quiet place . Liturgy of saffron swastika on a plate or Create Bajot . Please make note of the swastika tee time . Wheat or rice then spread it. Red cloth and spread over rice or wheat .

Mahalakshmi is the statue of red cloth , but before the idol of Lakshmi clean water , milk , curd , honey , ghee Make bath . Red clothes on the shower after having installed the idol of Lakshmi .

Mahalakshmi Puja second stage of the method  -

After installing the statue of Mahalaxmi rice , flowers , offerings , etc. offer the puja materials . Devi Lal offer the garments . Clothing can be offered as a red thread .

पहले गणेश जी कि पूजा करना जरुरी होता है क्योकि …

ganesh-chaturthi-4किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी कि पूजा करना जरुरी होता है क्योकि ये संकटो को दूर करते है और घर में सुख- समृद्धि लाते है। ऐसा माना जाता है की पारद गणेश की मूर्ति स्थापना करने से मनोकामना जल्दी पूर्ण होती है। गणेश की स्थापना करने के लिए बुधवार का दिन सबसे श्रेष्ठ होता है।

गणपति पर रोजाना ११ पुष्प और ११ बार गणपति मंत्र का जाप करने से घर कि दरिद्रता दूर होती है।

यदि पारद गणेश जी की स्थापना दुकान में कि जाती है तो आपके व्यापार में निरंतर वृद्धि होती है।