mantra

Success mantra of life

Success mantra of life

giving up or escape. It certainly does not fall on recovering life or cause it to fail. So firmly holding the reins of life and responsibilities and the views are critical for keeping morale. The Hindu scriptures have described some threads in front of the worldly life.

Indeed, right-thinking initiative and maintain coordination between the action and the mind is essential to maintain the momentum. If either person is exposed to Hindu mythology formulas have learned The duties or responsibilities of weakness of mind getaway retreat instinct, creates the idea of ​​theology eagle fled in despair and frustration, but woke up and could make life a success.

This simple formula means that finger caught in the trap of falling in love or infatuations are also to blame if people are in the woods. But Snymshil person becomes home to Tapovan. Relationships and life appears to be a burden to him.

The exact way to avoid this is to keep a grip on the human desires and wishes with definite intentions are associated with such deeds, which may give kudos too.

Restraint on the human mind and karma keeping house and living happy and pleased to meet all responsibilities will be determined. It has been said in the scriptures sense restraint. Also bring out the positive side of life.

So here you can much method to determine their life for the success, that’s almost people use these type of success mantra. these mantra always create the best identity for the people thus check the people thinking towards us is very important and every time we get the success in it.

Sun mantra for removing any difficulty in life

Sun mantra for removing any difficulty in life

In practice occurring during any stage of the journey is to prove that the relief and energy. In his life journey filled with action-packed day today working on Sundays, would like to stop. Many people have the time, the day of rest or relaxation from work proves the power and energy-giving.

However, learning of Hindu religion with theology deeds of worship on Sunday Suryadev healing, energetic and special watch to be exalted status in Power concedes there.

Especially during sun worship, various measures have also been described, even in the short time are very auspicious.

Confidence, hard work, effort or lack of spirit exalted position, prestige healing, successful and prosperous life are difficult to fulfill the wish. God also has a weakness or lack of self-confidence. Sun worship in religious measures to overcome it is considered the best. This successful life soon meets every desire.

Every Sunday morning, woke up especially after bathing in the sun temple of the nine planets known by particular mantra is always healthy, wealthy and distinguished life would have wished to proves.

– After the bath the red sun idol worship materials such as red sandalwood, hibiscus flower, to present intact. By the indulgence of a sweet made of jiggery or guar spells sun, remember to write down each and aarti – prosperity –

prathh Smrami Klu tatsviturvarnum  Rupam hi Mndlmrichoth Tonuryjunsi,

Samani Ysy Kirna: Prbwadihetun brahmaharatmakamlakshymchityrupam.

– Greetings to the Sun god at the head touching the ground is the ruin of all sins.

– After the worship of the sun god body – mind gets freedom from diseases circled with purity. Pavnta items barefooted for the round.

– Sun mantra meditation, sun hymnal text, a desire to prove to chant the sun.

– Sunday or septum or white lotus flowers with a red sun worship, fasting – fasting person pleased by the sun all the fame, success and is rich in pleasures.

प्राचीन काल में मंत्रो द्वारा उत्पन्न विनाशक अस्त्र – शस्त्रो का रहस्य –

शास्त्रों में अनुसार पुराने समय के हथियारों में मंत्रों से पैदा की गई शक्तियां व क्षमता इतनी अद्भुत थी कि इनके सामने आज के दौर में तैयार किए जा रहे युद्ध के साजो-समान की ताकत व तकनीक भी बौनी नजर आती है। युद्ध, हथियारों के साथ मैदान में हो या फिर विचारों की जद्दोजहद के रूप में मन-मस्तिष्क में, इंसानियत और शांति के नजरिए से बेमानी माने जाते है।

धर्म की अधर्म व सत्य की असत्य पर जीत के प्रतीक इन धर्मयुद्धों में न केवल शूरवीरों द्वारा अपनाई गई मर्यादा और नीतियां निर्णायक बनीं, बल्कि महाबलियों ने कई ऐसे घातक अस्त्र-शस्त्र भी उपयोग किए गए, जो खासतौर पर मंत्र शक्तियों से साधे जाते थे और उनमें समाई अचूक शक्तियां शत्रु खेमे के लिए विध्वंसक होती थी।

प्राचीन काल में युद्ध के दौरान उपयोग किए जाने वाले हथियार इस प्रकार है–

पहले हैं अस्त्र, जिनको मंत्रों से साधकर दूर से ही फेंका जाता था। इनके जरिए अग्नि, विद्युत, गैस या यांत्रिक उपायों से शत्रु पर वार किया जाता था।

ब्रह्मास्त्र – यह ब्रह्मदेव का अस्त्र माना जाता है। यह सबसे घातक व मारक अस्त्र था, जो दुश्मन को तबाह करके ही छोड़ता था। इसकी काट केवल दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही संभव थी। आज के दौर के हथियारों से तुलना की जाए तो ब्रह्मास्त्र की ताकत कई परमाणु बमों से भी कहीं ज्यादा थी। रामायण के मुताबिक मेघनाद ने हनुमानजी पर भी ब्रह्मास्त्र चलाया, किंतु स्वयं रुद्र रूप हनुमान ने उसका सम्मान कर समर्पण कर दिया।

पाशुपत अस्त्र – यह शिव का अस्त्र माना जाता है। इस बाण में मंत्र से पैदा शक्ति व ऊर्जा एक ही बार में पूरी दुनिया का विनाश कर सकती थी। माना जाता है कि कुरुक्षेत्र में युद्ध के दौरान यह अस्त्र केवल अर्जुन के पास ही था।

नारायणास्त्र – नारायणास्त्र वैष्णव या विष्णु अस्त्र के नाम से भी जाना जाता है। यह पाशुपत की तरह ही भयंकर अस्त्र था। यहां तक कि माना जाता है कि एक बार नारायणास्त्र छोड़ने देने पर पूरी दुनिया में इसकी किसी दूसरे अस्त्र से कोई काट नहीं थी। बस, इससे बचने के लिए एक ही उपाय यह था कि शत्रु हथियार डालकर समर्पण कर धरती पर खड़ा हो जाए। अन्यथा यह अस्त्र लक्ष्य के लिए अचूक होता था।

आग्नेय अस्त्र – यह मंत्र शक्ति से तैयार ऐसा बाण था, जो धमाके के साथ अग्नि बरसाना शुरू कर देता था और साधे लक्ष्य को चंद पलों में जलाकर राख कर देता था। इसकी काट पर्जन्य बाण के जरिए संभव थी।

पर्जन्य अस्त्र – मंत्र शक्ति से सधे इस बाण से बिना मौसम भी बादल पैदा होते, भारी बारिश होती, बिजली कड़कती और हवाई बवंडर चलते थे। खासतौर पर यह आग्नेय बाण का तोड़ था।

पन्नग अस्त्र – मंत्र बोलकर इस बाण के जरिए सांप पैदा किए जाते थे, जो तय लक्ष्य को जहर के प्रभाव से निश्चेत कर देते थे। इसकी काट गरुड़ अस्त्र से ही संभव थी। रामायण में भगवान राम व लक्ष्मण भी इसी के रूप नागपाश के प्रभाव से मूर्छित हुए थे और गरुड़ देव ने आकर इनसे मुक्ति दिलाई थी।

गरुड़ अस्त्र – इस अचूक बाण में मंत्रों के आवाहन से गरुड़ पैदा होते थे, जो खासतौर पर पन्नग अस्त्र या नाग पाश से पैदा सांपों को मार देते थे या उसमें जकडें व्यक्ति को मुक्त करते थे।

वायव्य अस्त्र – मंत्र शक्ति से यह बाण इतनी तेज हवा व भयानक तूफान पैदा करता कि चारों ओर अंधेरा हो जाता था। इसी तरह एकाग्नि व ब्रह्मशिरा जैसे अलग-अलग देवी-देवताओं की शक्तियों से सराबोर मांत्रिक अस्त्रों का भी उपयोग किया जाता था।

गदा – छाती तक लंबाई व पतले हत्थे वाले इस शस्त्र का निचला भाग भारी होता था। इसका पूरा वजन तकरीबन 20 मन की होता था। महाबली योद्धा हर हाथ में दो-दो गदा तक उठाकर युद्ध करते थे। इनमें बलराम, भीम व दुर्योधन भी खासतौर पर शामिल थे।

असि – तलवार का ही एक नाम। यह धातु की बना टेढ़पन लिया हुआ धारदार शस्त्र।

त्रिशूल – निचला हिस्सा पतला और ऊपरी हिस्से पर तीन शूल होते हैं।

वज्र – ऊपरी तीन हिस्से टेढ़े-मेढ़े, बीच का भाग पतला व हत्था भारी होता है।

परशु – इसके ऊपरी हिस्से में लोहे का चौकोर धारदार फल होता है। यह तकरीबन 2 गज लंबा होता है। भगवान परशुराम के शस्त्र के रूप में भी प्रसिद्ध है।

चन्द्रहास – तलवार की तरह टेढ़ा कृपाण है। इसे खड्ग भी पुकारा जाता था।

चक्र – कांटेदार गोल लोहे या धातु से बना शस्त्र जो फेंककर चलाया जाता है।

तोमर – यह लोहे से बना तीर के आकार का होता था। इसका मुंह सांप की शक्ल का लोहे का ही होता था। पर निचला हिस्सा लकड़ी का बना होता था। लाल रंग का तकरीबन डेढ़ गज लंबे इस शस्त्र में नीचे पंख लगे होते थे, ताकि फेंकने के बाद हवा के साथ उड़ कर तेज गति से प्रहार कर सके।

शक्ति – दोनों हाथों से फेंके जाने वाला नीले रंग का यह हथियार भारी होता था। इसका हत्था बड़ा, मुंह शेर की तरह होता था, जिसमें धारदार जीभ व पंजे होते थे। इसकी लंबाई एक गज की व इसमें छोटी घंटिया भी लगी होती थीं।

बाण – ये कई तरह के आकार के होते हैं, जो शर, तीर, सायक आदि कई नामों से जाने जाते हैं।

धनुष – बाण चलाने का सबसे मुख्य शस्त्र हैं।