Goddess Vaishno Mantra in Hindi

भगवान को पाने के दो आसान उपाय

get to God

आज के समय में कोई भी काम करने का निश्चित समय नहीं है परन्तु कुछ समय पहले तक हर कार्य को करने का एक समय निश्चित होता था। सात-आठ घंटे काम करने के बाद घर में समय बिताया जाता या अन्य काम किए जाते थे। प्रतिस्पर्धा, टेक्नोलॉजी के तमाम साधन हाथ में आने के बाद भी लोग समय के मामले में गड़बड़ाते गए। कुछ लोग तो 24 घंटे काम में उलझ गए। अब 12-15 घंटे काम करना सामान्य बात है।

कब, कौन-सा काम किया जाए, इसकी प्राथमिकता गड़बड़ा गई। अत्यधिक सक्रिय रहने की वृत्ति को समाप्त भी नहीं करना चाहिए। चलिए, इतने सारे काम जब किए जा रहे हों तो अध्यात्म कहता है कि एक काम हमारा भी कर लें और वह है प्रार्थना।

प्रार्थना अपना परिणाम देने लगती है। प्रेम पनपने लगता है। यह एक मात्र कृत्य है जो सीढ़ी-दर-सीढ़ी बदलते हुए आपको और परमात्मा को एक कर देगा।

मनुष्य के पतन के कारण  –

मनुष्य के पतन के दो कारण होते हैं। पहला यह कि वह स्वयं को ठीक से न समझे और अपना नियंत्रण खो दे, तब वह आचरण से गिरता है। दूसरा कारण है गलत लोगों की संगति। खराब लोग आपके जीवन में आ जाएं और आप उन्हें पहचान न पाएं। जान भी जाएं तो भी उनसे न बचें। ऐसे में पतन हो जाता है, इसलिए कुसंग से बचें और अकेले में अपने मन के कुसंग से भी खुद को बचाएं।

जरा सा अकेलापन मिला और मन आपको गलत बातों में खींचेगा।

इसलिए संत-फकीरों ने कुसंग की जमकर आलोचना की है। सुंदरदास नाम के संत ने तो कहा है अगर आपको सांप डस ले, बिच्छू काट ले, तो भी खतरा उतना बड़ा नहीं है। उन्होंने आगे लिखा है – आगि जरो जल बूडि मरौ, गिरि जाइ गिरौ कछु भय मत आनौ। सुंदर और भले सब ही यह दुर्जन-संग भलौ जनि जानौ।। आग में जलना, जल में डूबकर मरना और पहाड़ से गिरकर नुकसान हो जाने में भी कोई बड़ी हानि नहीं है। इनमें भी कोई भलाई ढूंढ़ी जा सकती है। सबसे बड़ी हानि है दुष्टों की संगति में।

रावण का एक दोष ही उसकी सबसे बड़ी मूर्खता साबित हुई –

आप किसी से शत्रुता करें या मित्रता निभाएं, सामने वाले की बुद्धि और बल दोनों की थाह जरूर प्राप्त कर लें। जब तक सामने वाले के भीतर न उतरें, तब तक आप उसे पहचान नहीं पाएंगे। इसके लिए पहले हमें स्वयं अपने भीतर उतरना होता है। यह काम होता है योग से। मेडिटेशन भीतर उतरने की कला है। श्रीराम को रावण तक पहुंचने के लिए  समुद्र पार करना था। समुद्र अपनी गहराई के लिए जाना जाता है।

श्रीराम तो बिना गहरे उतरे कोई काम करते ही नहीं थे। उनकी रुचि रावण से ज्यादा उसके भीतर की बुराई मिटाने में थी। इसलिए श्रीराम रावण को अलग दृष्टि से देख रहे थे। रावण कभी किसी की गहराई में उतरता ही नहीं था। राक्षस लोग संबंधों का निर्वाह सतह पर ही करते हैं। इसलिए वह राम का लगातार गलत विश्लेषण कर रहा था। अपने भाई को भी ठीक से नहीं पहचान पा रहा था और इसीलिए उसने भरी सभा में टिप्पणी की : ‘सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई।। मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई। रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई।।’ स्वाभाविक ही डरपोक विभीषण के वचन को प्रमाण करके उन्होंने समुद्र से मचलना ठाना है। अरे मूर्ख! झूठी बढ़ाई क्या करता है।

बस, मैंने राम के बल और बुद्धि की थाह पा ली है। अहंकार लंबे समय टिके तो उसका अगला परिवर्तन मूर्खता ही होता है। अब उसने श्रीराम के साथ विभीषण की भी खिल्ली उड़ाई। यही विभीषण उसकी मृत्यु का कारण बना। ‘सचिव सभीत बिभीषन जाकें। बिजय बिभूति कहां जग ताकें।।’ जिसका विभीषण जैसा डरपोक मंत्री हो, उसे जगत में विजय कहां।

देवी मंत्रो से करे अपने जीवन की हर बाधा को दूर

 

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कार्यक्षेत्र या परिवार से जुड़े मामलों में मिले कई अनचाहे नतीजे कुछ अवसरों पर गहरी चिंता में डूबो देते हैं। असल में काम और सफलता में संकल्प शक्ति निर्णायक होती है। मजबूत संकल्प शक्ति के बिना मनोबल कमजोर होता है। इससे कर्म पूरे समर्पण भाव से नहीं होता और मनचाहे लक्ष्य या सफलता को पाना मुश्किल हो जाता है।

शास्त्रों में देवी उपासना पावन और मजबूत संकल्प शक्ति से ही मन और कर्म में संयम व संतुलन बनाकर जीवन से जुड़े हर मकसद को पूरा करने के लिए बेहद असरदार मानी गई है।

भय, संशय से मुक्त जीवन के लिए ही देवी उपासना के विशेष दिनों जैसे शुक्रवार विशेष देवी मंत्रों के ध्यान का महत्व बताया गया है। जानिए ऐसे ही 10 देवी मंत्र, जो बोलने में मुश्किल से चंद पल ही लेंगे, लेकिन बड़ी से बड़ी परेशानियों से निजात देंगे।

शुक्रवार की सुबह व शाम स्नान के बाद स्वच्छ व यथासंभव लाल वस्त्र पहनकर दुर्गा प्रतिमा या नवदुर्गा की तस्वीर को लाल चंदन, अक्षत, सुहाग सामग्री, चुनरी, लाल फूल व दूध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।

देवी पूजा के बाद यहां बताए जा रहे चंद पलों में बोले जा सकने वाले 10 छोटे-छोटे, किंतु असरदार देवी मंत्रों का स्मरण परेशानियों से छुटकारे की कामना से करें। देवी के सामने धूप व दीप जलाकर ये 10 देवी मंत्र गहरी श्रद्धा और सुख-सफलता भरे जीवन की चाहत के साथ स्मरण करें-

ॐ महाविद्यायै नमः।

ॐ जगन्मात्रे नमः।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ शिवप्रियायै नमः।

ॐ विष्णुमायायै नमः।

ॐ शुभायै नमः।

ॐ शान्तायै नमः।

ॐ सिद्धायै नमः।

ॐ सिद्धसरस्वत्यै नमः।

ॐ क्षमायै नमः।