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The second lunar of the year on 5 June 2020: know what measures to take

Four lunar eclipses have been reported in the year 2020. Due to almanac variation, their date is stated differently. As we know, the first lunar eclipse of this year has taken place on 10 January. The second one will take place on 5 June. The third will take place on 5 July and the fourth will take place on 30 November 2020.

Jyeshtha Shukla Purnima will be in the middle of Friday 5 June. It will start at 11:15 am on midnight and will be at 2.34 pm on 6 June. The total duration of this eclipse is 3 hours 19 minutes. Let’s know the precautions of lunar eclipse on 5 June 2020

What precautions are taken?

1. Do not start any new work during the eclipse.

2. Do not touch basil during the eclipse. These are some of the astrology tips that are helpful.

3. Keep fast during the eclipse and later add basil leaves to the food and drink ingredients.

4. During brushing, brushing, combing and excrement of excreta should also be avoided.

5. During pregnancy, pregnant women should not use sharp edged tools.

What measures should be taken on the day of lunar eclipse?

1. During the eclipse, religious and inspirational books should be read.

2. During the eclipse, you should chant the mantras of your Ishtadeva.

3. After the eclipse, Ganga water should be sprayed throughout the house.

4. After the eclipse, one should donate to the poor. You can also consult specialists to avail indian astrology tips.

5. The scavenger should donate a new bush and coin after the eclipse.

Other measures to avoid the ill effects of lunar eclipse-

1. Observe the fast of Somwar and Pradosh.

2. Do not keep shards and braid.

3. Eat saffron pudding on Monday and feed the girls.

4. White clothes should be donated on Monday.

5. Worship Shivji and donate rice.

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विवाह से पहले कुंडली क्यों अहम भूमिका निभाती है?

ज्यादातर भारतीय लोग सोचते हैं कि शादी से पहले कुंडली मिलान एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ज्योतिषियों की मदद से आप जोड़ों के जन्म चार्ट की तुलना और विश्लेषण कर सकते हैं। कुंडली मिलान का उद्देश्य न केवल अनुकूलता का आकलन करना है, बल्कि यह संतान से संबंधित है। ज्योतिषियों के अनुसार यह माना जाता है कि मिलान ज्योतिषीय चार्ट के अभ्यास से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि जोड़ों को शादी के बाद सुखी और आरामदायक जीवन मिलेगा। इसलिए अधिकांश जोड़ों को इस तथ्य के बारे में पता नहीं होता है कि यदि जोड़ों की तुलना में कम संगतता है, तो यह उनकी शादी में वित्तीय समस्या और कैरियर की समस्या का कारण बन सकता है।

इसलिए, शुरुआती समय से लोगों का यह मानना ​​है कि एक-दूसरे से शादी करने के बाद पुरुष और महिला एक ही पहचान बन जाते हैं। इसका अर्थ है कि आपके साथी की नियति, भाग्य और भाग्य लंबे समय में भी आपको प्रभावित करेंगे। यह नक्षत्र पर निर्भर करता है कि या तो यह सकारात्मक परिणाम देता है या यह निराशाजनक भविष्य की ओर जाता है। यही मुख्य कारण है कि कुंडली मिलान मेकिग विवाह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार

वैदिक ज्योतिष में, यह आकलन करने के लिए कुंडली मिलान के लिए अश्ट्रोथ मिलान प्रणाली का उपयोग करता है कि संगतता के विभिन्न और विभिन्न पहलुओं पर युगल अंक कितने हैं। इसलिए अगर दंपति इससे अधिक स्कोर करते हैं तो इसका मतलब है कि उनके पास बेहतर संगतता होगी, जबकि लोवे संगतता भागीदारों के बीच खराब संगतता को निर्धारित करती है। कुंडली मिलान के समय के दौरान उनकी मानसिक अनुकूलता, शारीरिक और अनुकूलता जैसे विभिन्न पहलुओं की गणना की जाएगी। उन्होंने कुल 36 अंकों का स्कोर बनाया। प्रेम विवाह समस्या का समाधान प्राप्त करे हमारे विशेषज्ञ से सम्पर्क करे।

ज्योतिषीय चार्ट से मेल खाते समय आठ गुना माना जाता है। ज्योतिषीय चार्ट में प्रत्येक गुन का एक विशिष्ट मान होता है, जो कि कुल आठ तोपों में से कुल 36 से निकलता है। ज्योतिष के अनुसार, यह माना जाता है कि जोड़ों के बीच होने के लिए न्यूनतम 18 अंकों का मेल होना चाहिए। शादीशुदा ज़िन्दगी की शुभकामनाएं। जबकि अगर वें अंक 27 से अधिक हैं तो यह जोड़ों का सबसे अच्छा मैच माना जाता है। इसलिए अगर विवाह से 18 अंक कम हैं तो सलाह नहीं दी जाती है।

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श्रीमद् भगवद्गीता से सीखने वाली कुछ महत्वपूर्ण बातें

श्रीमद् भगवद्गीता को हिन्दू धर्म में अमूल्य धरोहर की भाति ही है। श्रीमद् भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का एक भाग है। महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने और लेखन भगवान श्री गणेश ने किया। युद्ध के समय जब सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गईं तो अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया जो आज भी व्यवहारिक जीवन की समस्याओं के लिए समाधानकारक है।

साहसी होना

क्लैब्यं मा स्म गम: पार्थ नैतत्वय्युपपद्यते।

क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप।।

कायरता, कायरता है। चाहे वह करुणाजनित हो, या भय जनित। अत: अपने स्वत्व और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। अन्याय का सदैव प्रतिकार करना चाहिए और पलायन नहीं पुरुषार्थ का चयन करना चाहिए।

मधुर और हितकर वाणी

अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।

स्वाध्यायाभ्भ्यसनं चैव वांगमयं तप उच्यते।।

तप तीन प्रकार के बताए गए है- शरीर, वाणी और मन। तीनों का उपयोग लोकहित में करना चाहिए। वाणी मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र है। इससे व्यक्ति सारे संसार को अपना मित्र बना सकता है या शत्रु बना सकता है। अत: बोली की महत्ता, शब्दों का प्रभाव और वाणी को नियंत्रित और मर्यादित रखें।

दुर्गुणों का त्याग करना

दंभो दर्पोभिमानश्च क्रोध: पारुष्यमेव च।

अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ संपदामासुरीम्।।

पाखंड, घमंड, अभिमान, क्रोध, कठोर वाणी और अज्ञान- इनसे मनुष्य को दूर रहना चाहिए। सदगुणों को अपने जीवन में उतारना चाहिए जिससे जीवन में परम शांति का अनुभव होता है।

निर्भय होना

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।

तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृत निश्चय:।।

निर्भीक होकर कर्म करने से असफलता भी कीर्ति

यश और मान दिलाती है। भयग्रस्त मन-मस्तिष्क से किए कए काम में सफलता मिल भी जाए तो वह सम्मानीय, वंदनीय नहीं हो सकती।

तनाव रहित रहें

अश्योच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।

गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिता:।।

आगत-विगत कि चिंता से मुक्त होकर कर्मपथ पर आगे बढ़ते जाना चाहिए। घटनाएं प्रकृति के घटनाक्रम की कड़ी हैं और वे समयानुसार घटती रहती हैं। अनावश्यक चिंताओं में उलझना जीवन के अमूल्य समय को नष्ट करना है। इसलिए तनाव रहित होकर अपना कर्म करते जाना चाहिए।

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astrological remedies to improve financial issues

Astro Remedies to Improve Financial Status

With the help of the astro remedies to improve financial status or astrological remedies for the financial problems can be used for the financial growth. We will provide you some of the financial astrology predictions by the date of birth to improve financial status.

With the help of the Astro remedies to improve the financial status solve all the monetary problems. It also helps you to ensure that the money stays with you forever.

Below mention are some of the remedies that will help to deal with the financial issues:

  • We all know that Saturn is a malefic planet and it can increase your all financial problems. So you can chant the suitable mantra to appease the Saturn. So you should also pray to it regularly to the ward of the monetary issues in your life.
  • Another tip is that you should keep your locker in the Sount or in the Southwest direction of your house. When you open it in the north direction and it will help to attract money for you. Another thing you can do is place a mirror in front of the locker. Keep a Kuber yantra on a red cloth at the place of worship.
  • You should also treat the women respectfully. To attract the money you should pray to Maa Lakshmi twice a day. Donate some of the income every month. Donate white things to the poor people and worship the tulsi tree and lighted Diya. After bath daily applies saffron tilak on your forehead every day. By doing all of these you will earn the blessings of Goddess Lakshmi.
  • You should feed grass to cows every Wednesday. And then again declutter your house from broken utensils. Women of the house should throw a pot of the water at the main entrance to attract wealth. 
  • You can also recite Shri Shukla mantra for 16 times, Mahalakshmi Ashtakam for 11 times, and Narshima Lakshmi Karavalamban Stotra every day.

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kya hai paap aur puny

क्या आप जानते है क्या होते है पाप और पुण्य?

हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथ वेदों का संक्षिप्त है उपनिषद और उपनिषद संक्षिप्त गीता। स्मृतियां उक्त तीनों व्यवस्था और ज्ञान संबंधी बातों को क्रमशः और स्पष्ट तौर से समझाती है। जो विद्वान कहते है कि जीवन को ढालना चाहिए धर्मग्रंथ अनुसार। आज के लेख में हम धर्म के अनुसार प्रमुख दस पुण्य और दस पाप। तो इन्हे जानकर और इन पर अमल करके जो भी व्यक्ति है वो अपने जीवन में क्रांति कारी परिवर्तन ला सकते है।

जानिए कौनसे है दस पुण्य कर्म?

  • हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना।
  • दम- उदंड न होना।
  • क्षमा- बदला न लेना, क्रोध का कारण होने पर भी क्रोध न करना।
  • अस्तेय- दूसरे की वस्तु हथियाने का विचार न करना।
  • शौच- आहार की शुद्धता। शरीर की शुद्धता।
  • इंद्रियनिग्रह- इंद्रियों को विषयों (कामनाओं) में लिप्त न होने देना।
  • धी- किसी बात को भलीभांति समझना।
  • विद्या- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान।
  • सत्य- झूठ और अहितकारी वचन न बोलना।
  • अक्रोध- क्षमा के बाद भी कोई अपमान करें तो भी क्रोध न करना।

जानिए कौनसे है दस पाप कर्म?

  • दूसरों का धन हड़पने की इच्छा।
  • निषिद्ध कर्म (मन जिन्हें करने से मना करें) करने का प्रयास।
  • देह को ही सब कुछ मानना।
  • कठोर वचन बोलना।
  • झूठ बोलना।
  • निंदा करना।
  • बकवास
  • चोरी करना।
  • तन, मन, कर्म से किसी को दु:ख देना।
  • पर-स्त्री या पुरुष से संबंध बनाना।

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increase wealth and good luck by these tips

बढ़ाना चाहते है धन और सौभाग्य तो अपनाएं ये सरल से उपाय

चाहे वो कोई भी व्यक्ति हो उसके मन में हमेशा प्रश्न उठता है कि वह इंसान अपनी दरिद्रता और अपना दुर्भाग्य कैसे दूर करे इसके लिए हर व्यक्ति धन कमाने के प्रयास करता है। ऐसे बहुत से व्यक्ति है जो कि इसमें सफल हो जाते है और कुछ ऐसे है जो कुछ भी कर ले लेकिन सफल नहीं हो पाते है। आज के लेख में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिन्हे आजमाने से अवश्य शुभ फल प्राप्त होंगे।

आइये जानते है जीवन में सौभाग्य और सफल होने के सरल उपाय

  • गूलर की जड़ को कपडे में लपेटकर रख ले। इसके बाद में चांदी के कवच में डाल कर गले में पहनने से भी आर्थिक संपन्नता आती है।
  • अगर आप तिजोरी को धन से भरना चाहते है तो इसके लिए अपनी तिजोरी में नौ लक्ष्मीकरण कौड़ियां तांबे का सिक्का रखे।
  • एक नियम बाँध ले उसके हिसाब से केले के पेड़ में जल अर्पित करने और घी का दीपक जलाए ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है।
  • जब भी भोजन करे उससे पहले कुत्ते या गाय के लिए एक रोटी निकाल दे। ऐसा करने से कभी भी आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • हर गुरूवार को तुलसी पौधे में दूध चढ़ाए ऐसा करने से आर्थिक संपन्नता में वृद्धि होती है।
  • शुक्ल पक्ष की पंचमी को घर में श्रीसूक्त की ऋचाओं के साथ आहुति देने से भी दरिद्रता दूर होती है।
  • भगवान श्रीकृष्ण को महीने के पहले बुधवार को रात में कच्ची हल्दी की गांठ बांधकर अर्पित करे। दूसरे दिन इसको पीले धागे में बांधकर अपनी दाहिने भुजा में बाँध ले।

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अगर आप कर्ज से मुक्ति चाहते है तो इन पांच वृक्षों का सहारा ले

आजकल ऐसे बहुत से लोग है जो कि कर्जे की वजह से दबे हुए है। ऐसे कई लोग है जिनकी पास पैसा बचता ही नहीं है कि वो कैसे कर्जा उतारे या उतारने का सोचे। वही दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग है जिनकी पास पैसा तो है लेकिन फिर भी वो कर्ज नहीं उतार पाते है।

बरगद के पेड़ का उपाय

एक बरगद के पेड़ का पत्ता ले और उसके ऊपर आटे का दीया जलाकर किसी भी हनुमान मंदिर या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे रख आए। इस उपाय को करने से कर्जे से छुटकारा मिलेगा। अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखे, ऐसा करने से भंडार भरा रहेगा। हल्दी की गांठे, पान का पत्ता और सुपारी तिजोरी में रखने से धन का भंडार बना रहेगा।

पीपल के पेड़ के उपाय

शमशान के कुँए का जल लाकर किसी भी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह कार्य नियमित रूप से सात शनिवार को किया जाना चाहिए और शनिवार के दिन ही पीपल के नीचे दिया जलाना चाहिए। इस उपाय से कर्ज से छुटकारा मिलेगा।

केले के पेड़ का उपाय

जैसा की हम सब जानते है कि केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है और किसी भी धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। अगर आप कर्ज से मुक्ति चाहते है तो प्रति गुरूवार को केले के पेड़ की पूजा करना चाहिए। जब तुलसी और केले का पौधा घर में रखते है तो इससे बरकत बनी रहती है।

नारियल का वृक्ष

हिन्दू धर्म में नारियल के बगैर तो कोई मंगल कार्य संपन्न होता ही नहीं। पूजा के दौरान कलश में पानी भरकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है। एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।

बिल्व का वृक्ष

ऐसा माना जाता जिस घर में एक बिल्व का वृक्ष लगा होता है। उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। घर की पूर्व दिशा में गुलाब, चंपा, गूलर, चमेली, बेला, दुर्वा, तुलसी आदि के पौधे लगाने चाहिए। इससे शत्रुनाश, धनसंपदा की वृद्धि व संतति सुख प्राप्त होता है।

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husband wife problem solution

Astrological Solution for Relationship Problems Arise between Husband and Wife

We all know that the relationship between husband and wife is something sweet and sometimes bitter. There are some of the moments of happiness and sometimes everything is filled with the moments of the arguments. Therefore the little disagreement or the distraught helps in understanding each other better and thus it all helps to strengthen the bond. But the problem arises when the fight becomes more regular and trivial issues which start snowballing then it becomes a matter of the concern. When couples are facing regular fights and arguments then it causes mental stress and frustration which leads to the issues in the personal and professional lives of both the individuals involved. This is the time when problems arise in husband wife relation.

Marriage is a sacred relationship in which couples tied in the knot forever. With the present and modern hectic lifestyle of the people, it has become difficult to live a happy married life. There are several issues arise in the life of the couples. For the reason, it all depends on the couples that how they handle the issues of their life. Some of the couples are able to handle the issues, on the other hand, some of them are not able to handle the issues of married life. At that time they take the help of astrological solutions for love marriage problems to arise between husband and wife.

Due to the busy schedule couples have no time to share thoughts and emotions with each other it is leading to the communication gap and other ugly circumstances that ruins the beautiful relationship. Thus there are several reasons behind such kind of circumstances.

Problems arise in marriage life are:

  • Financial dependence on one partner
  • Short-tempered nature
  • Forcing the wife to leave the job and stay at home.
  • Lack of trust in each other
  • Over possessiveness of a partner.
  • Incompatibility in arrange marriage
  • Interference of the in-laws in the marital issues

Above all are some of the issues that are arising in the life of couples due to which they are facing a lot of the problems. So if you are also facing any of the problems then you can take the help of the consultancy of astrology. He will help you to get rid of the issues that you are facing in your married life. In the short span of time married life will come back on the right track.

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maha shivratri

जानिये महाशिवरात्रि कब है और शुभ मुहूर्त

इस साल यानी कि 2020 में महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व 21 फरवरी को आ रहा है। भगवान भोलेनाथ शिव शंकर को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन सभी हिन्दू भक्तों के लिए विशेष होता है।

इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी 2020 को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर यानी कि अगले दिन 22 फरवरी के दिन शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी क्योकि 22 तारीख को पंचक प्रारंभ हो रहा है इसलिए 21 फरवरी को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।

रात्रि प्रहार की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से रात को 12 बजकर 52 मिनट तक होगी। इसके दूसरे दिन बहुत ही विधि विधान से पूजा की जाएगी। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है।

लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। हर साल में होने वाली 12 शिवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण महाशिवरात्रि मानी जाती है।

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vastu tips for guest rooms

वास्तु शास्त्र के हिसाब से जाने कैसा हो अतिथि कक्ष या गेस्टरूम

ऐसे बहुत कम लोग है जो इस बात को जानते है कि बैठकरूम और अतिथि कक्ष में फर्क होता है। लेकिन क्या आप जानते है कि वास्तु शास्त्र के हिसाब से अतिथि कक्ष कैसा होना चाहिए और कहा होना चाहिए एवं उस रूम में क्या क्या होना चाहिए और क्या नहीं। आज के लेख में जाने ऐसे ही कुछ ख़ास टिप्स।

अतिथि कक्ष कहा होना चाहिए?

कुछ वास्तुकार के अतिथि कक्ष को वाव्यव कोण में होना लाभपद्र मानते है। क्योकि इस दिशा के स्वामी वायु होते है तथा ग्रह चंद्रमा। जैसा कि हम जानते कि वायु का प्रभाव मन पर पड़ता है। अतः वायव्य कोण में अतिथि गृह होने पर अतिथि कुछ ही समय तक रहता है। इसके बाद में आदर सत्कार पाकर वापस लौट जाता है। यही कारण है जिसकी वजह से पारिवारिक मतभेद पैदा नहीं होते है। इस बात को हमेशा याद रखे कि अतिथि कक्ष कभी भी दक्षिण- पश्चिम दिशा यानी कि नैऋत्य में नहीं बनाना चाहिए क्योकि यह दिशा केवल घर के स्वामी के लिए ही होती है। आप आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण पूर्वी या दक्षिण दिशा में भी गेस्ट रूम बना सकते है। लेकिन ध्यान रहे कि आप इस बारे में पहले किसी वास्तुशास्त्री से बात कर ले।

अतिथि कक्ष कैसा होना चाहिए?

जब भी अतिथि को किसी कमरे में ठहराए वह कमरा हमेशा साफ़ और व्यवस्थित होना चाहिए। गेस्ट रूम का दरवाजा वास्तु शास्त्र के हिसाब से पूर्व दिशा में या फिर दक्षिण दिशा में होना चाहिए। गेस्ट रूम की खिड़की उत्तर दिशा, पश्चिमी दिशा या फिर उत्तर पूर्व कोने में होनी चाहिए। अगर गेस्ट रूम वायव्य कोण या फिर आग्नेय कोण में है तो आपको इस रूम का बाथरूम नैऋत्‍य कोण में बनाना चाहि‍ए और उत्तर पूर्वी कोने में एक खि‍ड़की जरूर रखना चाहि‍ए। उत्तर-पूर्वी दि‍शा में बना पूर्वमुखी या उत्तरमुखी दरवाजा गेस्‍टरूम के लि‍ए सबसे उत्तम होता है। अगर आपके घर में वास्तु दोष है तो आप वास्तु दोष निवारण भी कर सकते है।

क्या क्या होना चाहिए?

कभी भी गेस्ट रूम में भारी भरकम लोहे का सामान नहीं रखना चाहिए। वरना अतिथि को लगेगा कि आप उसे बोझ समझा जा रहा है। यह ऐसी अवस्था होती है जब मेहमान तनाव महसूस कर सकता है जितना हो सके आप इस रूम को खाली रखे। इस रूम में रखने के लिए आप फोल्डिंग बेड, सोफा कम बेड या फिर दो अलग अलग बेड का भी इस्तेमाल कर सकते है। ऐसा करने से कमरा भरा भरा भी नहीं दिखेगा और सुविधायुक्त भी रहेगा। कमरे में एक ऐसी अलमारी की भी व्यवस्था करे, जिसमे मेहमान अपने कपडे रख सके।

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पूजा घर में रखेंगे ये चीजें तो होगा कल्याण

जैसा की हम जानते है कि घर हो या मंदिर इनमे कुछ विशेष सामग्री होना बहुत जरुरी होता है। उन सभी को मिलाकर पूजा होती है। जब हम पूजा की साम्रग्री की बात करते है तो वह बहुत सारी होती है। लेकिन आज के लेख में हम बहुत ही जरुरी वस्तुए बता रहे है जिनका पूजा घर में होना बहुत आवश्यक है।

शालग्राम

शालग्राम विष्णु भगवान की एक प्रकार की मूर्ती होती है जो प्रायः पत्थर की गोलियों या बटियों आदि के ही रूप में होती है और उसके ऊपर चक्र का चिह्न बना हुआ होता है। कहा जाता है जिस शिला के ऊपर यह चिह्न नहीं होता है उसे पूजन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इसे सभी मूर्तियों से बढ़कर माना जाता है और सिर्फ इसी की पूजा का विधान है।

शिवलिंग

जैसा की हम सब जानते है कि शिव की यह एक ऐसी प्रकार की मूर्ती है जो प्रायः गोलाकार में जनेऊ धारण किए हुए होती है। इसे शिवलिंग कहा जाता है जिसका मतलब है कि शिव की ज्योति। इसे सभी प्रकार की मूर्ती से बढ़कर है। ऐसा माना जाता है कि शालग्राम और शिवलिंग के घर में होने से ऊर्जा में संतुलन कायम होता है और हर प्रकार की शुभता बनी रहती है।

आचमन

हमेशा ध्यान रखे कि छोटे से तांबे के लोटे में जल भरकर उसमे तुलसी डालकर हमेशा पूजा स्थल में रखना चाहिए। इस जल को आचमन का जल कहते है। इस जल को दिन में तीन बार ग्रहण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हम जब आचमन करते है तो पूजा का दो गुना फल ज्यादा मिलता है।

पंचामृत

पांच प्रकार के अमृतों को पंचामृत है। जब दूध, दही, शहद, घी और शुद्ध जल का मिश्रण बनता है तो उसे पंचामृत कहते है। ऐसे कुछ विद्वान है जो दूध, दही, मधु, घृत और गन्ने के रस से बने द्रव्य को पंचामृत कहते है और कुछ लोग दूध, दही, घी, शक़्कर और शहद को मिलाकर पंचामृत बनाते है। जब मधुपर्क बनता है उसमे घी नहीं होता है। इसके मिश्रण से सम्मिश्रण में रोग निवारण गुण विद्यमान होता है और यह पुष्टिकारक होता है।

चंदन

जैसा की हम जानते है कि चंदन शांति और शीतलता का प्रतिक होता है। हमेशा एक चन्दन की बट्टी और सिल्ली पूजा स्थल पर हमेशा रहना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चन्दन की सुगंध से मन में से नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते है। चन्दन को शालग्राम और शिवलिंग पर लगाया जाता है। जब माथे पर चन्दन लगाते है तो मस्तिष्क शांत भाव में रहता है।

अक्षत

अक्षत को चावल भी कहा जाता है, अक्षत को श्रम से प्राप्त संपन्नता का प्रतिक माना जाता है। जब आप अक्षित अर्पित करते है तो इसका अर्थ यह है कि अपने वैभव का उपयोग अपने लिए नहीं और बल्कि मानव की सेवा के लिए करेंगे।

पुष्प

जब देवी देवता की मूर्ती के पास में फूल अर्पित करते है तो यह सुंदरता का अहसास जगाने के लिए है। इसका मतलब यह है कि हम भीतर और बाहर से सूंदर बने।

नैवेद्य

नैवेद्य के अंदर मिठास और मधुरता होती है। आपके जीवन में मिठास और मधुरता होना बहुत जरुरी होता है। अगर आप देवी देवताओं के नैवेद्य लगाते रहते है तो इससे आपके जीवन में मधुरता, सौम्यता और सरलता बनी रहती है। फल, मिठाई, मेवे और पंचामृत के साथ में नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

रोली

रोली चुने की लाल बुकनी और हल्दी को मिलाकर बनाई जाती है। इसको कुमकुम भी कहा जाता है। रोली को रोजाना नहीं लगाया जाता। जब भी पूजा होती है तब इसे चावल के साथ में माथे पर लगाया जाता है। इसे शुभ समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोली आरोग्य को धारण करता है। यह रक्त वर्ण साहस का भी प्रतिक है। रोली को माथे पर नीचे से ऊपर की ओर लगाना अपने गुणों को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

धूप

धूप से सुगंध का विस्तार होता है। सुगंध की मदद से आपके मन और मस्तिष्क में सकारात्मक भाव और विचारो का जन्म होता है। इसकी मदद से आपके मन और घर का वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। सुगंध का जीवन में बहुत महत्व होता है। धूप और अगरबत्ती अलग अलग होते है इसलिए घर में धूप जलाए। धूप जलाने के लिए एक अलग पात्र आता है।

दीपक

जो पारंपरिक दीपक होता है वह मिट्टी का ही होता है। दीपक को बनने में पांच तत्वों का उपयोग होता है; मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। कहते है कि इन पांच तत्वों से सृष्टि का निर्माण हुआ है। हिन्दू अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

गरुड़ घंटी

वह स्थान जहा गरुड़ घंटी की नियमित बजने की आवाज आती है उस जगह का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इसकी मदद से नकारात्मक शक्तियां हटती है। जब नकारात्मकता हटती है तो समृद्धि के द्वार खुलते है। घर के पूजा स्थान में हमेशा गरुड़ घंटी रहनी चाहिए।

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कुंडली के 10 संकेत बताएगे मरने के बाद कैसी होगी आपकी गति

हर कोई इंसान जानना चाहता है कि उसके साथ मरने के बाद में क्या होगा। उसकी गति कैसी होगी या अगले जन्म में वो कहा होगा। लेकिन इस बारे में कोई भी बात कहना मुश्किल है। लेकिन इस बारे में धर्म और ज्योतिष शास्त्र में कुछ इससे जुड़े हुए संकेत बताए गए है।

जानिये धर्म और शास्त्र इस बारे में क्या कहते है?

ऐसी कहावत है कि इंसान जैसा कर्म करता है भगवान उसे वैसा ही फल देता है। कर्मो को हमेशा दो भागो में तोला जाता है अच्छे कर्म और बुरे कर्म लेकिन इन दोनों ही कर्मो के बीच मध्यम कर्म भी होते है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कर्मो के आधार पर मुख्यत, दो प्रकार की गतियां होती है गति और अगति।गति के दौरान जीव को किसी भी लोक में जाना पड़ता है। गति के अंतर्गत चार लोक दिए गए है: ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक और नर्कलोक।

जो भी जीव होता है वह अपने कर्मो के हिसाब से उक्त लोकों में जाता है। इन लोकों में जाने के लिए तीन मार्ग होते है – अर्चि मार्ग, धूम मार्ग एवं उत्पत्ति और विनाश मार्ग। अर्चि मार्ग के जरिये ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा की जाती है। धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है वही दूसरी ओर उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है।

जो अगति होता है उसमे व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है और उसे वापस जन्म लेना पड़ता है। अगति के चार प्रकार होते है:1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति। क्षिणोदर्क अगति के दौरान जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्यु लोक में आता है और संतों सा जीवन जीता है। भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है। अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है। गति में वह कीट, कीड़ों जैसा जीवन पाता है।

जानिये ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से:

  1. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न में उच्च राशि का चन्द्रमा हो और कोई पापग्रह उसे देख नहीं रहा हो तो ऐसे व्यक्ति के मरने के बाद में सद्गति प्राप्त करते है।
  2. अगर किसी जातक की कुंडली में कही पर भी कर्क राशि में गुरु स्थित हुआ हो तो जातक मृत्यु के बाद में उत्तम कूल में जन्म लेता है। और इसके अलावा अगर किसी की जन्म कुंडली में चार ग्रह उच्च हो तो वह जातक की श्रेष्ठ मृत्यु का वरण करता है।
  3. किसी भी व्यक्ति की कुंडली के लग्न में उच्च का गुरु चंद्र को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो एवं अष्ठम स्थान ग्रहों से रिक्त हो तो जातक सैकड़ो पुण्य कार्य करते हुए सद्गति प्राप्त होता है।
  4. अगर किसी की कुंडली के लग्न में गुरु और चंद्र चतुर्थ भाव में है और तुला का शनि और सप्तम भाव में मकर राशि का मंगल हो तो जातक जीवन में मृत्यु उपरान्त ब्रह्मलोक नहीं तो देवलोक में जाता है।
  5. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के अष्टम भाव में राहु है तो वह जातक परिस्थिति के कारण पुण्यात्मा बन जाता है। और मृत्यु के बाद में वह इंसान राजकुल में जन्म लेता है।
  6. यदि कोई जातक की कुंडली के अष्टम भाव पर किसी भी प्रकार से शुभ और अशुभ ग्रहों की दृष्टि नहीं पड़ रही हो तो वह भाव ग्रहों से रिक्त हो जाने के बाद जातक ब्रह्मलोक नहीं तो देवलोक की यात्रा करता है।
  7. किसी मनुष्य की कुंडली के अष्टम भाव को गुरु, शुक्र और चंद्र, यह तीनों ग्रह देखते हो या फिर अष्टम भाव को शनि देख रहा हो तथा अष्टम भाव में मकर और कुंभ राशि हो तो जातक मृत्यु के बाद में विष्णुलोक प्राप्त करता है या फिर वैकुण्ड में निवास करता है।
  8. कुंडली के ग्यारहवे भाव में अगर किसी व्यक्ति के सूर्य और बुध हो, एवं नवें भाव में शनि तथा अष्टम भाव में राहु हो तो जातक मृत्यु के पश्चात देवलोक या ब्रह्मलोक को गमन करता है।
  9. कुंडली में अगर बाहरवां भाव शनि, राहु या फिर केतु से युक्त होता है तो अष्टमेश से युक्त हो अथवा षष्ठेश से दृस्ट हो जातक को मरने के बाद में नरक की यात्रा करनी पड़ती है लेकिन अगर उसने पुण्यकर्म किए है तो वह इससे बच जाता है।
  10. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु लग्न में हो और शुक्र सप्तम भाव में हो तो कन्या राशि का चन्द्रमा हो एवं धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो जातक मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करता है।

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