पूजा घर में रखेंगे ये चीजें तो होगा कल्याण

जैसा की हम जानते है कि घर हो या मंदिर इनमे कुछ विशेष सामग्री होना बहुत जरुरी होता है। उन सभी को मिलाकर पूजा होती है। जब हम पूजा की साम्रग्री की बात करते है तो वह बहुत सारी होती है। लेकिन आज के लेख में हम बहुत ही जरुरी वस्तुए बता रहे है जिनका पूजा घर में होना बहुत आवश्यक है।

शालग्राम

शालग्राम विष्णु भगवान की एक प्रकार की मूर्ती होती है जो प्रायः पत्थर की गोलियों या बटियों आदि के ही रूप में होती है और उसके ऊपर चक्र का चिह्न बना हुआ होता है। कहा जाता है जिस शिला के ऊपर यह चिह्न नहीं होता है उसे पूजन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इसे सभी मूर्तियों से बढ़कर माना जाता है और सिर्फ इसी की पूजा का विधान है।

शिवलिंग

जैसा की हम सब जानते है कि शिव की यह एक ऐसी प्रकार की मूर्ती है जो प्रायः गोलाकार में जनेऊ धारण किए हुए होती है। इसे शिवलिंग कहा जाता है जिसका मतलब है कि शिव की ज्योति। इसे सभी प्रकार की मूर्ती से बढ़कर है। ऐसा माना जाता है कि शालग्राम और शिवलिंग के घर में होने से ऊर्जा में संतुलन कायम होता है और हर प्रकार की शुभता बनी रहती है।

आचमन

हमेशा ध्यान रखे कि छोटे से तांबे के लोटे में जल भरकर उसमे तुलसी डालकर हमेशा पूजा स्थल में रखना चाहिए। इस जल को आचमन का जल कहते है। इस जल को दिन में तीन बार ग्रहण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हम जब आचमन करते है तो पूजा का दो गुना फल ज्यादा मिलता है।

पंचामृत

पांच प्रकार के अमृतों को पंचामृत है। जब दूध, दही, शहद, घी और शुद्ध जल का मिश्रण बनता है तो उसे पंचामृत कहते है। ऐसे कुछ विद्वान है जो दूध, दही, मधु, घृत और गन्ने के रस से बने द्रव्य को पंचामृत कहते है और कुछ लोग दूध, दही, घी, शक़्कर और शहद को मिलाकर पंचामृत बनाते है। जब मधुपर्क बनता है उसमे घी नहीं होता है। इसके मिश्रण से सम्मिश्रण में रोग निवारण गुण विद्यमान होता है और यह पुष्टिकारक होता है।

चंदन

जैसा की हम जानते है कि चंदन शांति और शीतलता का प्रतिक होता है। हमेशा एक चन्दन की बट्टी और सिल्ली पूजा स्थल पर हमेशा रहना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चन्दन की सुगंध से मन में से नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते है। चन्दन को शालग्राम और शिवलिंग पर लगाया जाता है। जब माथे पर चन्दन लगाते है तो मस्तिष्क शांत भाव में रहता है।

अक्षत

अक्षत को चावल भी कहा जाता है, अक्षत को श्रम से प्राप्त संपन्नता का प्रतिक माना जाता है। जब आप अक्षित अर्पित करते है तो इसका अर्थ यह है कि अपने वैभव का उपयोग अपने लिए नहीं और बल्कि मानव की सेवा के लिए करेंगे।

पुष्प

जब देवी देवता की मूर्ती के पास में फूल अर्पित करते है तो यह सुंदरता का अहसास जगाने के लिए है। इसका मतलब यह है कि हम भीतर और बाहर से सूंदर बने।

नैवेद्य

नैवेद्य के अंदर मिठास और मधुरता होती है। आपके जीवन में मिठास और मधुरता होना बहुत जरुरी होता है। अगर आप देवी देवताओं के नैवेद्य लगाते रहते है तो इससे आपके जीवन में मधुरता, सौम्यता और सरलता बनी रहती है। फल, मिठाई, मेवे और पंचामृत के साथ में नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

रोली

रोली चुने की लाल बुकनी और हल्दी को मिलाकर बनाई जाती है। इसको कुमकुम भी कहा जाता है। रोली को रोजाना नहीं लगाया जाता। जब भी पूजा होती है तब इसे चावल के साथ में माथे पर लगाया जाता है। इसे शुभ समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोली आरोग्य को धारण करता है। यह रक्त वर्ण साहस का भी प्रतिक है। रोली को माथे पर नीचे से ऊपर की ओर लगाना अपने गुणों को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

धूप

धूप से सुगंध का विस्तार होता है। सुगंध की मदद से आपके मन और मस्तिष्क में सकारात्मक भाव और विचारो का जन्म होता है। इसकी मदद से आपके मन और घर का वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। सुगंध का जीवन में बहुत महत्व होता है। धूप और अगरबत्ती अलग अलग होते है इसलिए घर में धूप जलाए। धूप जलाने के लिए एक अलग पात्र आता है।

दीपक

जो पारंपरिक दीपक होता है वह मिट्टी का ही होता है। दीपक को बनने में पांच तत्वों का उपयोग होता है; मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। कहते है कि इन पांच तत्वों से सृष्टि का निर्माण हुआ है। हिन्दू अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

गरुड़ घंटी

वह स्थान जहा गरुड़ घंटी की नियमित बजने की आवाज आती है उस जगह का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इसकी मदद से नकारात्मक शक्तियां हटती है। जब नकारात्मकता हटती है तो समृद्धि के द्वार खुलते है। घर के पूजा स्थान में हमेशा गरुड़ घंटी रहनी चाहिए।

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