घर बनाते समय आखिर ईशान कोण का क्या महत्व होता है?

जैसा की हम जानते है कि रोटी, कपडा और मकान हर इंसान की मूलभूत आवश्यकताए है। इसी के अभाव में संसार में मानव मात्र का ही जीवनयापन करना बहुत ही कठिन एवं दुष्कर हो जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कई चीजों को प्राप्त करने के चक्कर में हम जीवन में इन सुखो का उपभोग नहीं कर पाते है। सबसे पहला कारण है इसके पीछे हमारी जीवनशैली जो कि हमें पाश्चात्य जगत की ओर आकर्षित कर रही है किन्तु हमें हमारी मूल संस्कृति एवं परम्पराओ से विलग कर रही है।

 ईशान कोण का महत्व 

जब भी किसी मकान का निर्माण होता है तो उसमे ईशान कोण का एक अपना ही अलग महत्व होता है। आज के लेख में हम आपको ईशान कोण से जुडी हुई कुछ जानकारी देंगे। आज के दौर में भोजन, कपडा इसी के साथ साथ एक और सपना होता है। आजकल हर इंसान खुद का मकान प्राप्त करने के लिए बहुत से परिश्रम करता है लेकिन अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब किसी भी इंसान का यह स्वपन पूरा होता है तो वह उससे उतना सुख प्राप्त नहीं कर पाते जितनी अपेक्षा करते है। इसी वजह से वह निराशा से घिर जाते है। लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण है वास्तु दोष।

जब भी किसी घर का निर्माण हो तो सबसे आवश्यक बात ध्यान में रखने की होती है वह है वास्तु। आज के फैशनपरस्त युग में ऐसे कई लोग है जिसकी उपेक्षा कर के भवन निर्माण के पश्चात शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति उठाते है। जैसा की हम जानते है की वास्तु शास्त्र में बहुत सी बाते ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है लेकिन सबसे ज्यादा महत्व होता है ईशान कोण का।

ईशान कोण को ईश यानी कि भगवान का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। जब भी किसी मकान का निर्माण होता है तो उस समय ईशान कोण और ब्रह्म स्थान यानी की मध्य स्थान की पवित्रता का समुचित ध्यान रखा जाता बहुत ही आवश्यक है। तो ऐसा ना करने पर भवन स्वामी अनेकानेक परेशानियों से ग्रस्त हो जाता है। जनमानस में यह भ्रांति है की ईशान कोण केवल उत्तर पूर्व के कोने को कहा जाता है। लेकिन वास्तविकता में वास्तु कोनो का निर्धारण समूचे भूखंड को नौ खंडो में बराबर बराबर विभक्त करने से होता है।

जो घर का ईशान कोण होता है उसमे मंदिर के अलावा कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए। ऐसी मान्यता है की ईशान कोण में टॉयलेट, बाथरूम और पानी की टंकी जैसे भारयुक्त निर्माण का भी निषेध है। कहा जाता है ईशान कोण किसी भी तरह से भारयुक्त नहीं होना चाहिए। माना जाता है कि किसी भी घर का ईशान कोण एवं ब्रह्म स्थान जितना शुद्ध और पवित्र होगा उतना ही उस भवन का स्वामी सुख और समृद्धिशाली होगा। तो जब भी अपने भवन का निर्माण करवाए तो उस समय वास्तु दोष और ईशान कोण के बारे में अच्छे से जान ले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *