Category Archives: Tradition

Importance of Adhik Maas in Hindu Religion

What is Adhik Mass:-

Adhik Maas mean extra month or additional month within the lunisolar calendar is additionally referred to as Purushottam mass. Once it occurs in year than year have thirteen month rather than twelve month this further month is understood by numerous names: Adhik Maas, Mal Maas, Purushottam Maas, and Malimmacha. Indians follow 2 style of calendars is i.e. lunar and also the solar. A lunar month (Hindu) is on the average 29.5 days amount and also the month, is 30 or 31 days.

The satellite calendar year consists of 354 star days and astronomical year consists of twelve months, 6 minutes. Hence there’s a difference of eleven days between the satellite and astronomical year.

So in 3 years time this difference becomes regarding one month amount. So to match the 2 calendars, an additional month is extra. This is often the thirteenth month of the calendar, called ‘Adhik Maas’.

The Adhik Maas is extra once the Amavasya and also the surya Sankranti coincide.

What is to do throughout Adhik Maas:-

According to the Hindu scriptures, the subsequent things or activities have to to be done:

Vrat -According to the Bhavishyottar puran, the Lord Krishna Himself is that the Phal Daataa, Bhokta and Adhishthaata. Thus Adhik Maas Vrat produces positive results.

The reading of Holy Scriptures – throughout the Adhik Maas the reading or being attentive to the Holy Scriptures is taken into account terribly fruitful.

Daan or punya – in keeping with the Devi Bhagvat, the Daan -Punya no matter is completed throughout Adhik Maas, brings smart results to the one whom.

Other things – Anushthan for obtaining prevent too serious diseases, donations throughout eclipse etc. Parikrama of Govardhan giriraj, Bhajan, Keertan, giving food to Sadhoos, Saints or Brahamans etc.

It is written within the Bhavishyottar Sanskrit literature that Sri Krishna Himself has aforesaid relating to Adhik Maas Vrat that by finishing up the Vrat with the only aim of worshiping God, through fast, cleanliness, charity, puja etc. deserves are no inheritable that turn out unfailing results and every one forms of calamities are overcome.

दीपावली पर करे राशि अनुसार उपाय और करे माँ लक्ष्मी को प्रसन्न

 

दीपावली भारतीयों का सबसे बड़ा पर्व है इस दिन भगवान राम 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या नगरी यानि की अपने घर लौटे थे और इस खुशी में पूरी अयोध्या नगरी ने  उनके आने की  खुशी में अपने घरो में दिये जलाये थे और बहुत खुशिया मनाई थी।

इसी दिन से पुरे भारतवर्ष में कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्यौहार पुरे हर्षो  उल्लास के साथ मनाया जाता है।

वर्ष 2015 में यह त्यौहार 11 नवम्बर को मनाया जायेगा। इस दिन महालक्ष्मी  जी की पूजा की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। दीपावली पर राशि अनुसार उपाय करने से मां लक्ष्मी साधक पर प्रसन्न होती हैं और उसकी मनोकामना पूरी करती हैं। आज हम आपको दीपावली पर राशि अनुसार किए जाने वाले उपाय बता रहे हैं। ये उपाय बहुत ही सरल व अचूक हैं।

दीपावली पर करे राशि अनुसार उपाय और करे माँ लक्ष्मी को प्रसन्न

मेष राशि :मेष  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं सौ : ॥

वृषभ राशि:  वृषभ  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं श्रीं  ॥

और महालक्ष्मी जी के साथ साथ कमल के फूल का भी पूजन करे।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ क्लीं ऐ स :  ॥

लक्ष्मी और गणेश जी के पूजन के साथ दक्षिणावर्ती शंख की भी पूजा करे।

कर्क राशि : कर्क  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ क्लीं ऐ श्रीं   ॥

दीपावली  के दिन पीपल के पेड़ के निचे पंचमुखी दीपक जलाये।

 

सिंह  राशि: सिंह राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं श्रीं सौ   ॥

और गाय के घी  मुख्य दरवाजे पर जलाये।

कन्या  राशि: कन्या राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ श्रीं  ऐ सौ  ॥

लाल कपडे में बांध कर  पैसे रखने की जगह पर  रखे।

तुला  राशि: तुला राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं  श्रीं  ॥

बड़ के पेड़ के पत्ते पर सिंदूर व् घी से ॐ श्रीं श्रियै नमः और बहते पानी में प्रवाहित कर दे।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ  क्लीं  सौ ॥

अपने घर के बगीचे या  कहीं भी जहा जहाँ जगह हो केले का पेड़  लगाये और उसकी देखभाल करे।

धनु  राशि: धनु  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं सौ ॥

पान के पत्ते पर रोली से श्रीं लिख कर पूजा स्थान में रखे।

मकर  राशि: मकर राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं सौ : ॥

आक की रुई का दीपक घर के ईशान कोण में जलाये।

कुंभ  राशि: कुंभ राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं ऐ क्लीं श्रीं: ॥

नारियल के कठोर भाग में घी भर कर लक्ष्मी जी के समक्ष दीपक जलाए।

मीन राशि: मीन राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं सौ : ॥

दीपवली की रात में कपूर की कालिक से शत्रु का नाम लिखे और पैर से मिटा दे।

 

 

क्या आप जानते है किस देवता को कौनसे फूल चढ़ाने चाहिए ?

फूल या पुष्प का हर जगह अपना अलग ही महत्व होता है। और जैसे हमारे रिश्ते में हम रिश्ते के अनुसार फूल उपहार स्वरूप देते है जैसे की प्यार का प्रतीक लाल गुलाब, दोस्ती के लिए पिला गुलाब और घर परिवार में सफ़ेद या गुलाबी गुलाब।  वैसे ही भगवान को भी हर तरह का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, शास्त्रो के अनुसार भगवान को भी कुछ रंग और पुष्प प्रिय होते है तो हमे उन्हें उसी तरह का पुष्प अर्पित करना चाहिए जिससे वो हमसे अधिक प्रसन्न हो।

तो आइये जानते है कोनसे भगवान को कोनसा पुष्प प्रिय है , और उसी के अनुसार हम उन्हें पुष्प अर्पित करे।

1. गणेश जी : भगवान गणेश को तुलसी दल के अलावा सभी प्रकार के पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। हरी दूर्वा सबसे अधिक प्रिय होता है।

2. महादेव शिव : सफेद रंग के फूलों से शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। कारण शिव कल्याण के देवता हैं। सफेद शुभ्रता का प्रतीक रंग है।

3. भगवान विष्णु : विष्णु को कमल, मौलसिरी, जूही, कदंब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वैजयंती, चंपा ओर बसंती प्रिय हैं।

4. भगवान सूर्य :पूजा में सूर्य को लाल रंग के फूल चढ़ाने का विधान हैं। सूर्य को लालिमा प्रिय है। वे तेज के पुंज हैं। लाल रंग तेज का प्रतीक है। इसेक अतिरिक्त कमल, कनेर, मौलसिरी, चंपा, पलाश, आक और अशोक के फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। सूर्य भगवान को तगर अर्पित करना वर्जित है।

5. भगवती गौरी : मां गौरी को कनेर, बेला, पलाश, चंपा-चमेली और सफेद कमल के पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

6. भगवान श्रीकृष्ण : कृष्ण भगवान को कुमुद, करवरी, चणक मालती, नंदिक, लाश और वनमाला के फूल खासे प्रिय हैं।

7. काली : कालरात्रि को गुरहल का फूल बहुत पसंद है।

8. लक्ष्मीजी : धनलक्ष्मी को कमल-पुष्प सर्वाधिक प्रिय हैं। कमल की आठ पंखुडियां मनुष्य के अलग-अलग 8 गुणों की प्रतीक हैं, ये गुण हैं दया, शांति, पवित्रता, मंगल, निस्पृहता, सरलता, ईष्र्या का अभाव और उदारता है।

9. सरस्वती माँ : माँ सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी है। और शुभ्रता की प्रतीक है । सफेद गुलाब, सफेद कनेर, चम्पा एवं गेंदे के फूल से मां खुश होती हैं। इससे ज्ञान एवं बौद्घिक क्षमता बढ़ती है।

हमेशा भगवान को ताजे फूल अर्पित करने चाहिए कभी भी कटे या मुरझाये फूल ना चढ़ाये। और हमेशा फूलो को डंठलों सहित चढ़ाने चाहिए।

Some significant teaches from lord Krishna

Lord Krishna is avatar of lord Vishnu. Who live a simple life and gave us a guidebook for living of happy life. If we try to use their teachings in our life then our life will be fulfill with happiness and success. So we are going to tell you about some teachings of lord Krishna, which you should, implies in your life for easy and happy life.

  1. Believe in karma: – it’s is a most popular teaching of lord Krishna. Because he said that ever think about what will you get in your life just do your work and believe in karma and success automatically follow you. For example when we feed to bird then never think about the punya just think  about to satisfy the hunger of birds
  2. Don’t be hypocrite: – lord Krishna said that if you think you are being good to others, then you are being a hypocrite. And he aslo0 said to lying to you is also a hypocrite so never do this.
  3. Believe in friendship: – friendship of lord sudama and Krishna is not hidden from anyone. We all know that how beautiful their friendship is. By this friendship Krishna taught us the lesson that never get selfish in your friendship and always have a unconditional love for our friends.
  4. Lord Krishna teaches a very beautiful lesson that do not weep for past, do not worry for future just live in today and make your present as a memorable past for your life.
  5. Listen to your consciences: – lord Krishna teaches that always listen your inner soul’s voice your soul voice is consciences.  The voice of our heart and our soul will never get wrong so whenever you fell helpless just lesson your own inner voice

So these are some teachings of Krishna which we think that it will be very helpful for you if you admire this in your life.

 

Love marriage, pious relation of true commitment

Love marriage, pious relation of true commitment

In this modern and advanced era every person wants to marry with their love partner that they choose for themselves. Boys and girls want to find love partners in this way that they can go along with them for life time and hand in hand. But now days there are some individuals that have very rigid thought like intercast marriages are sin and love marriages take the society on wrong path. So to solve all these love marriage problems love marriage specialist astrologers tell us effective measures.

Astrology provides you the path to come out from all these love issues. Astrology deeds are prevalent from ancient time. In this field Astrology palmistry is one of the most popular techniques. Now a day’s people get marry but their views do not match because of that they take divorce. Divorce is not solution of marriage. If you want to stop divorce and want to live happily with your partner by forgetting all the issues then astrologers help to solve all the issues.

In palmistry astrology there is a marriage line that tells when you will get marry or where you will go after marry or the person with whom you will marry, which type of person is he. Marriage line effects are different for men and women. Some astrologers say that men’s right hand palm and women’s left hand palm should see. Love marriage palmistry also tell that which type of marry you will do, love marriage or arrange marriage.

Intercast love marriage is the biggest issue in India. There are many orthodox persons that assume that love marriages are the bad factor for society and two persons from different-2 cast cannot understand their rituals. They cannot adjust with their families. If you take help of astrologers then they will tell you impressive solutions. Except this some online astrology services are also available help you to solve all the love marriage related problems.

5 kinds of sacrifice, each one is special fruit

5 kinds of sacrifice, each one is special fruitThere are 5 types Vedanusar sacrifice –

(1) Brahma Yajna

(2) Deva Yajna

(3) Father’s Sacrifice

(4) Vashwdev sacrifice

(5) All prayers.

Sacrifice means good karma, great deeds, good deeds, deeds Vedsammt. Positive expressions of God – the nature of the elements of life going every wish are fulfilled.

(1) The ultimate sacrifice: Root and the man from the animal kingdom. I.e. ancestors of humans are more parents and teacher. Dev from ancestors is that are more of the nature of God and our sages 5 Sktiann and Dev. Brahman ie God. It takes place daily evening invocation of the divine sacrifice, self-education and to Vedpat. The sages of the debt are that ‘ sage debt ” is paid.

(2) Deva Sacrifice: dev sacrificial altar of the parables and the action takes place. Agni is the altar for burning home, the Agrihotr sacrifice. This is done with the change of Gayatri verses.

(3) Pitra Sacrifice: Father’s sacrifice truth and faith memorial service at the deeds and actions of the parents and the teacher are satisfied that the libation . Vedanusar the memorial service – are Tarpan our ancestors, parents and sense of respect for the teacher.

(4) Vashwdev sacrifice: the sacrifice called ghost . The five elements of the human body . Understanding compassion and duty of all creatures and plants them food – spoof is called the Bhuta Yajna or sacrifice Vashwdev.

(5) Each sacrifice: this means to serve guests, the food – spoof. Crippled, female, student, monk, physician services and defenders are of religion – to assist the guest sacrifice. This confirms retirement retreat. That is a virtue. This is a social duty.

God’s unique magic, the defender has only predator

God’s unique magic, the defender has only predatorA king had, thereby avoiding disease Hkimon Greek king of the opinion that no medicine can save lives. The king’s father found a young age to the person who can save the life. Now seemed like a teenager looking for. Finally got the son of a poor farmer. After his death, the boy’s parents agreed to a lot of wealth.

Qazi also gave the fatwa, “Badshah Salamat, killing one person’s life is not a crime.”

And as soon as the Emperor’s executioner raised the sword to kill the boy smiling boy looking up to the sky. The boy asked the king to wonder, what an opportunity it is to laugh.

The boy said, “My son is confident of their parents. Before Qazi are complaining of injustice. Antim justice and mercy are the hope of the king. So my parents some money by coming to the lure of money seeing this unique play God in such a situation that I laughed Niharun whom? ”

King’s words influenced the young child and she woke up saying no, I do felony few days it is not approved for life. I’ll die. The king lifted the baby and the tears of repentance out of love with her ​​farewell. Every child king had sent them a fortune. God has answered the king was recovered in two to four days. A little boy made ​​known to the king the knowledge of the universe.

Eternal Lord’s doing, is unique. He was not wasted any moment particles. They are thrifty and generous too. Whatever Say paradox mirrored in the behavior of the wise, but their behavior is always full.

Invisible Spirit is complete. Visible universe is too full. The whole visible universe is born of the Spirit. Brahma took to complete the whole visible universe still remains is the absolute Brahman.

”God must love more than the theologian. God then sends Karmbndhn by the theologian then cut Karmbndhn. God the birth – death the release of the band strapped to the theologian, create reality. “

What’s the difference between tradition and superstition?

What's the difference between tradition and superstition?In specific circumstances, some method – comply with legislation. At times we flow again and again when you call it a tradition. Tradition is found in every area of ​​life. This habitude mostly verbally proceeds. Master to pupil, parent and child, tradition is gone. Raghukul follow the truth, Mr. Durga Sptsti text of Navratra, Diwali lamp burning all these are examples of tradition. Behind every tradition is the presence of a good and lucky element.

New Year’s Day in South India has a tradition of eating jaggery and neem Pttee. These are signs of both pleasure and pain.

World of the senses through contact with objects and organisms are – but it’ll hurt the bear them so that tomorrow. In many religious traditions – rituals. Before following any tradition is essential to know the elemental basis. Do not call it superstition. From time to time while preserving the traditional elements that may change behavior. Tradition is the human being, the human personality is formed.