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Manglik Dosha Nivaran Through Kumbh Vivah

India could be a country that believes in religious power most. Religious power is that the prime of everything and each downside have the religious answer. In Hindu non secular, several doshas square measure impact the human life. Manglik dosha is one among the foremost unfavorable dosha that have an effect on the lifetime of that specific person and different who around to them. Several religious solutions square measure in star divination to stay safe from the unhealthy impact of those doshas. Kumbh vivah is additionally one among the religious solutions for those who having manglik dosha in their kundli or birth chart.

Kumbh vivah essentially combination of 2 Hindu words that square measure ‘Kumbh’ means that pot and ‘vivah’ means that marriage or wedding.

When an individual, despite that the person is lady or boy, having manglik dosha in his kundli or horoscope. Then kumbh vivah is that the method to marry with a pot for take away the unhealthy impact from their when wedding life and it shows actuality color when they got marry.

Manglik dosha have many varieties impact of the person and his partner’s life, like in anshik manglik dosha they need to be face major health problems, delivery problems with baby, dispute in between the bride and groom and within the major manglik dosha may well be happen like serious relationship problems, death of husband, major accident, death of better half, major illness etc.

Kumbh vivah is simply sort of a standard wedding of the fellows that have manglik dosha. All rituals got to be performing ordinarily like different wedding for example; kanya daan, phere with the pot and additionally intonation the wedding mantras during this marriage. Subsequently lady should modification the dress and takes away all threads and flow the pot in watercourse while not holding anyone is aware of. When this ritual done that lady is going to be unleashing out of the manglik dosha and may marry with different guy.

Mythology is during this kumbh vivah that Pot is here taking part in the role of initial husband of that lady that having manglik dosha in her kundli, thus all unhealthy result square measure flow with the pot in watercourse. Manglik dosha is never effect currently their married life when they did the kumbh vivah.

 

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नवरात्रि में घर ले आये इनमे से कोई एक चीज किस्मत बदल देगी माता रानी

नवरात्रि में घर ले आये इनमे से कोई एक चीज किस्मत बदल देगी माता रानी

नवरात्रि में माँ की पूजा अर्चना  का विशेष माना जाता है। अगर नवरात्रि में कोई विशि विधान से माँ की पूजा अर्चना करे तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।  वास्तु शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसी वास्तु बताई गयी है जिनका खास संबंध किसी विशेष देवी-देवता या दिन से माना जाता है। वास्तु के अनुसार, अगर  नवरात्र के दौरान घर में वास्तु लाई जाएं तो देवी प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है।

आईये जानते है उन वस्तु के बारे में।

देवी लक्ष्मी की तस्वीर :- देवी लक्ष्मी  की तस्वीर घर ले आये। जिसमे माँ कमल के फूल पर विराजमान हो।  इससे माँ लक्ष्मी और दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

मोर पंख :-  मोर पंख को माँ सरस्वती का  वाहन माना गया है।  मोर पंख को नवरात्रि के दौरान घर ले आये और उसे घर के मंदिर में रख दे।  इससे माँ की कृपा  होगी और घर में सुख शांति आएगी।

सोलह श्रृंगार का सामान :-  माँ को सोलह श्रृंगार चढाने से माँ की कृपा होती है।   नवरात्रि में  सोलह श्रृंगार ले आये और माँ दुर्गा को चढ़ाये। इससे माँ का आशीर्वाद मिलेगा और मनोकामना पूर्ण होगी।

नवरात्रि के दौरान घर में चांदी और सोने का सिक्का लाना अच्छा माना जाता है।  इससे माँ लक्ष्मी और नौ  देवियों का आशीर्वाद आपको प्राप्त होगा।

 

 

 

 

दीपावली पर करे राशि अनुसार उपाय और करे माँ लक्ष्मी को प्रसन्न

 

दीपावली भारतीयों का सबसे बड़ा पर्व है इस दिन भगवान राम 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या नगरी यानि की अपने घर लौटे थे और इस खुशी में पूरी अयोध्या नगरी ने  उनके आने की  खुशी में अपने घरो में दिये जलाये थे और बहुत खुशिया मनाई थी।

इसी दिन से पुरे भारतवर्ष में कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्यौहार पुरे हर्षो  उल्लास के साथ मनाया जाता है।

वर्ष 2015 में यह त्यौहार 11 नवम्बर को मनाया जायेगा। इस दिन महालक्ष्मी  जी की पूजा की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। दीपावली पर राशि अनुसार उपाय करने से मां लक्ष्मी साधक पर प्रसन्न होती हैं और उसकी मनोकामना पूरी करती हैं। आज हम आपको दीपावली पर राशि अनुसार किए जाने वाले उपाय बता रहे हैं। ये उपाय बहुत ही सरल व अचूक हैं।

दीपावली पर करे राशि अनुसार उपाय और करे माँ लक्ष्मी को प्रसन्न

मेष राशि :मेष  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं सौ : ॥

वृषभ राशि:  वृषभ  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं श्रीं  ॥

और महालक्ष्मी जी के साथ साथ कमल के फूल का भी पूजन करे।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ क्लीं ऐ स :  ॥

लक्ष्मी और गणेश जी के पूजन के साथ दक्षिणावर्ती शंख की भी पूजा करे।

कर्क राशि : कर्क  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ क्लीं ऐ श्रीं   ॥

दीपावली  के दिन पीपल के पेड़ के निचे पंचमुखी दीपक जलाये।

 

सिंह  राशि: सिंह राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं श्रीं सौ   ॥

और गाय के घी  मुख्य दरवाजे पर जलाये।

कन्या  राशि: कन्या राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ श्रीं  ऐ सौ  ॥

लाल कपडे में बांध कर  पैसे रखने की जगह पर  रखे।

तुला  राशि: तुला राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं  श्रीं  ॥

बड़ के पेड़ के पत्ते पर सिंदूर व् घी से ॐ श्रीं श्रियै नमः और बहते पानी में प्रवाहित कर दे।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ  क्लीं  सौ ॥

अपने घर के बगीचे या  कहीं भी जहा जहाँ जगह हो केले का पेड़  लगाये और उसकी देखभाल करे।

धनु  राशि: धनु  राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं सौ ॥

पान के पत्ते पर रोली से श्रीं लिख कर पूजा स्थान में रखे।

मकर  राशि: मकर राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ऐ क्लीं सौ : ॥

आक की रुई का दीपक घर के ईशान कोण में जलाये।

कुंभ  राशि: कुंभ राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं ऐ क्लीं श्रीं: ॥

नारियल के कठोर भाग में घी भर कर लक्ष्मी जी के समक्ष दीपक जलाए।

मीन राशि: मीन राशि के जातक दीपावली  की रात स्फटिक या कलगटटे की माला से निचे लिखे मंत्र का १०८ बार जाप करे

॥ ॐ ह्रीं क्लीं सौ : ॥

दीपवली की रात में कपूर की कालिक से शत्रु का नाम लिखे और पैर से मिटा दे।

 

 

क्या आप जानते है किस देवता को कौनसे फूल चढ़ाने चाहिए ?

फूल या पुष्प का हर जगह अपना अलग ही महत्व होता है। और जैसे हमारे रिश्ते में हम रिश्ते के अनुसार फूल उपहार स्वरूप देते है जैसे की प्यार का प्रतीक लाल गुलाब, दोस्ती के लिए पिला गुलाब और घर परिवार में सफ़ेद या गुलाबी गुलाब।  वैसे ही भगवान को भी हर तरह का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, शास्त्रो के अनुसार भगवान को भी कुछ रंग और पुष्प प्रिय होते है तो हमे उन्हें उसी तरह का पुष्प अर्पित करना चाहिए जिससे वो हमसे अधिक प्रसन्न हो।

तो आइये जानते है कोनसे भगवान को कोनसा पुष्प प्रिय है , और उसी के अनुसार हम उन्हें पुष्प अर्पित करे।

1. गणेश जी : भगवान गणेश को तुलसी दल के अलावा सभी प्रकार के पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। हरी दूर्वा सबसे अधिक प्रिय होता है।

2. महादेव शिव : सफेद रंग के फूलों से शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। कारण शिव कल्याण के देवता हैं। सफेद शुभ्रता का प्रतीक रंग है।

3. भगवान विष्णु : विष्णु को कमल, मौलसिरी, जूही, कदंब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वैजयंती, चंपा ओर बसंती प्रिय हैं।

4. भगवान सूर्य :पूजा में सूर्य को लाल रंग के फूल चढ़ाने का विधान हैं। सूर्य को लालिमा प्रिय है। वे तेज के पुंज हैं। लाल रंग तेज का प्रतीक है। इसेक अतिरिक्त कमल, कनेर, मौलसिरी, चंपा, पलाश, आक और अशोक के फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। सूर्य भगवान को तगर अर्पित करना वर्जित है।

5. भगवती गौरी : मां गौरी को कनेर, बेला, पलाश, चंपा-चमेली और सफेद कमल के पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

6. भगवान श्रीकृष्ण : कृष्ण भगवान को कुमुद, करवरी, चणक मालती, नंदिक, लाश और वनमाला के फूल खासे प्रिय हैं।

7. काली : कालरात्रि को गुरहल का फूल बहुत पसंद है।

8. लक्ष्मीजी : धनलक्ष्मी को कमल-पुष्प सर्वाधिक प्रिय हैं। कमल की आठ पंखुडियां मनुष्य के अलग-अलग 8 गुणों की प्रतीक हैं, ये गुण हैं दया, शांति, पवित्रता, मंगल, निस्पृहता, सरलता, ईष्र्या का अभाव और उदारता है।

9. सरस्वती माँ : माँ सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी है। और शुभ्रता की प्रतीक है । सफेद गुलाब, सफेद कनेर, चम्पा एवं गेंदे के फूल से मां खुश होती हैं। इससे ज्ञान एवं बौद्घिक क्षमता बढ़ती है।

हमेशा भगवान को ताजे फूल अर्पित करने चाहिए कभी भी कटे या मुरझाये फूल ना चढ़ाये। और हमेशा फूलो को डंठलों सहित चढ़ाने चाहिए।

Relation of Mars and Manglik Dosh

 

Manglik dosh is really not good for anyone’s life. When it reflects in anyone’s horoscope then it totally disturb a person’s life. And according to the astrology Manglik dosh arise when planet mars is placed in 12th, 8th, 2nd, 4th, and in 1st house. If except of these houses mars reflect in any other house then it gives malefic results but that does not belongs to Manglik dosh as Manglik dosh is a dosh which only reflect the person’s marriage.

The major disadvantage of having Manglik dosh in Kundali is creating lots of obstacles in person’s marriage. Or if somehow marriage is done then after marriage also it reflects on their relationship like there is no peace in relation, separation from spouse, death of spouse by any of reason etc.

Manglik dosh is also called kuja dosh, angaraka dosh, bhom dosha. Some of people have confusion in this that they have born on Tuesday that why they are Manglik….. But it’s totally misconceptions. Actually the thing is that Manglik dosh occur just cause of mars planet when it’s Accor in some above given houses.

According to Vedic astrology you can use these some remedies for Manglik dosh

  1. Should chant hanuman chalisa daily
  2. Chant gaytri mantra attest 108 time on daily basis
  3. Wear a red coral in gold in ring finger after consulting any good astrologer
  4. Marriage between two Manglik individuals is the best way for marriage of Manglik persons
  5. Kumbh vivah is also a good option for Manglik person’s marriage. According to Vedic astrology, Manglik person should firstly marry with the banana tree, silver golden ideal of lord Vishnu or people tree.
  6. Manglik person should do fast on Tuesday; it’s an effective remedy for Manglik peoples
  7. Manglik should chant navgrah mantra which is known as Mangal mantra. This mantra should be chant on Tuesday

So these are some remedies by using which you can reduce some effect of Mangal dosh from your Kundali.

Know medicinal properties of nine forms of goddess navdurga

navratri

In nine days of navratri goddess durga gives her lot of grace on peoples. Each form of goddess durga includes a medicinal property. Saint Maarkandaya demonstrate in kavach lesson of Durgasaptashati and say when I asked to srishti nirmata brahma that how can save human body from all type of disease then he said in real nine forms of goddess Durga contains medicinal properties and destroys all somatic, divine and physical ailments.

According to hindu scriptures the best time of goddess Lakshmi is the navratri. In Indian culture the festival of navratri is such festival that shows the dignity of women. In four navratri of year navratri is from shukla pratipada of Chaitra, Aashaadh and magh but in prasiddhi navratri of Chaitra and aashvin is considered best. Navratri of aashvin is performed more by devotees. Systematically these are called vaasanti and shardiya navratri. The beginning of it starts from the Chaitra and aashvin shukla pratipada. Therefore this navratri is good as Sammuki.

Hanuman Mantra

Hanuman Mantra

Hanuman Chalisa day Tuesday, Sunderkand, Ram defense sources, the epic verses in your heart to have his day off. Another name of Shri Hanuman Ji is devotion to earthly life. To conquer the difficulties of life following twelve names of Lord Hanuman show their miraculous effect. Chanting these names are earthly pleasures, not only in age but also leads to increase. Native continuous chanting of these namesis to protect against every type of Hanuman. Twelve of Hanuman miraculous Name:

1) Hanuman

2) AnjaniSut

3) Air Son

4) mahaabal

5) Ramesht

6) Falgun friend

7) Pingaksh

8) AmitVikram

9) Uddikramn

10) Sita mourning corrosion

11) Laxman life Advertisers

12) DsgrivDrpha

These Namoen when and at what time should chant:

- In the morning when they wake up in the state in which the person chanting the twelve names longevity is 11 times.

- In the afternoon, chanting the twelve names of 11 times the person is rich.

- Noon evening while chanting the twelve names of the person who is satiated family pleasures.

- While sleeping at night chanting the twelve names of the person who is the enemy victory.

These twelve continuous chanting of the names are of persons who are protected from all kinds of Shri Hanuman Ji.

Manglik dosh shanti pooja

Manglik dosh shanti pooja

India is a country where traditions are followed from the ancient time under the guidance of astrologers. Marriage is a pious relation in India and before marriage matching of kundali prevalent. If the girl or boy has manglik dosh then there is lot of troubles to get marry. So people take help astrologers to remove this effect or with the guidance of astrologers they organize a pooja that is called manglik dosh shanti pooja.

Manglik dosh in India like a phobia. Without removing this marriage cannot happen. This is known that manglik dosh is the bad effect of mangal on a person. Some people strongly believe in and some take it as a myth. Till now questions are raised on this it is real or not. It is known that when mangal graha is in their first home, fourth home, 12th home then mangal dosh comes into the existence.

If bride or groom has mangal dosh and also shani dosh then the effect of manglik dosh becomes null because mangal and shani are reciprocals to each other. The effect of one removes the effect of other.

A experienced and professional astrologers are highly educated and perfect in the Vedic and outside country astrology. If they have experience of more than 12 year and have read thousands of readings and kundali then easily they can solve all your problems like love related, education related, business related, marriage related, career related etc…

If people definitely detect mangal dosh in their kundali then people should conduct a highly experienced

Pandit ji and astrologers. Only they can remove your mangal dosh. In this condition never take manglik dosh in an easy way because this is effect of graha and Nakshatra. If in your kundali they are not on their correct position then they can harm your career. Never try to do this pooja on their own because of the money saving. So if you have this dosh then this highly recommendable that it must be remove.

 

Incarnations of Lord Shiva

Incarnations of Lord Shiva

Lord Shiva has many incarnations but we are describing five most of his incarnations, yet people do not know about them.

Tat Purusha: On earth, in the 21st Kalpa known as Peetavasa, Lord Brahma only wore yellow apparels.  Lord Brahma’s prayers resulted into the manifestation of an effulgent entity, considering those entities as Lord Shiva; Lord Brahma started chanting the Mantras of Shiva Gayatri. When he finished chanting the mantas, numerous avatars were born all wearing yellow clothes.

Namdeva: During the 20th Kalpa named ‘Rakta’ (blood), the complexion of Lord Brahma turned red, while he was busy in his deep meditation. That time, an entity was born whose complexion was also red. Lord Brahma named him Namdeva considering him to be an incarnation of Shiva; later on four sons were born to Namdeva.

Sadhojat: Lord Brahma gave him the name Sadhojat and eulogized him, later on from the physique of Sadhojat four of his disciples manifested, whose names were – Nandan, Sunand, Upanandan and Vishwanandan.

Ishan: During the Vishwaroop Kalpa, manifestations of Saraswati and Ishan Shiva took place. From Ishan Shiva four divine entities were born named, Jati, Shikhandi, Mundi and Ardhamundi.

Ghoresh: This time a black avatar was born while Lord Brahma was engrossed in his meditation. Their names were Krishna, Krishnashikha, Krishnamukha and Krishnakanthdhari.

देवी मंत्रो से करे अपने जीवन की हर बाधा को दूर

 

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कार्यक्षेत्र या परिवार से जुड़े मामलों में मिले कई अनचाहे नतीजे कुछ अवसरों पर गहरी चिंता में डूबो देते हैं। असल में काम और सफलता में संकल्प शक्ति निर्णायक होती है। मजबूत संकल्प शक्ति के बिना मनोबल कमजोर होता है। इससे कर्म पूरे समर्पण भाव से नहीं होता और मनचाहे लक्ष्य या सफलता को पाना मुश्किल हो जाता है।

शास्त्रों में देवी उपासना पावन और मजबूत संकल्प शक्ति से ही मन और कर्म में संयम व संतुलन बनाकर जीवन से जुड़े हर मकसद को पूरा करने के लिए बेहद असरदार मानी गई है।

भय, संशय से मुक्त जीवन के लिए ही देवी उपासना के विशेष दिनों जैसे शुक्रवार विशेष देवी मंत्रों के ध्यान का महत्व बताया गया है। जानिए ऐसे ही 10 देवी मंत्र, जो बोलने में मुश्किल से चंद पल ही लेंगे, लेकिन बड़ी से बड़ी परेशानियों से निजात देंगे।

शुक्रवार की सुबह व शाम स्नान के बाद स्वच्छ व यथासंभव लाल वस्त्र पहनकर दुर्गा प्रतिमा या नवदुर्गा की तस्वीर को लाल चंदन, अक्षत, सुहाग सामग्री, चुनरी, लाल फूल व दूध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।

देवी पूजा के बाद यहां बताए जा रहे चंद पलों में बोले जा सकने वाले 10 छोटे-छोटे, किंतु असरदार देवी मंत्रों का स्मरण परेशानियों से छुटकारे की कामना से करें। देवी के सामने धूप व दीप जलाकर ये 10 देवी मंत्र गहरी श्रद्धा और सुख-सफलता भरे जीवन की चाहत के साथ स्मरण करें-

ॐ महाविद्यायै नमः।

ॐ जगन्मात्रे नमः।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ शिवप्रियायै नमः।

ॐ विष्णुमायायै नमः।

ॐ शुभायै नमः।

ॐ शान्तायै नमः।

ॐ सिद्धायै नमः।

ॐ सिद्धसरस्वत्यै नमः।

ॐ क्षमायै नमः।

 

शिव मंत्र की शक्ति के चमत्कार

शिव मंत्र की शक्ति के चमत्कार

हिन्दू धर्म में भगवान शिव की महिमा अपरम्पार बताई है तथा शिवपुराण के अनुसार भगवान शंकर का सर्वाधिक प्रभावी एवं सरल पंचाक्षर मंत्र-   नमः शिवाय है। यह मंत्र सभी के लिए लाभदायी होता है। नम: शिवाय के जप में कोई जटिलता नहीं है। इससे पंचतत्वों से निर्मित मानव देह की शुद्धि होती है तथा बड़े से बड़े संकट का निवारण बड़ी सरलता से हो जाता है।  इनकी उपासना करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और भक्त निर्भय हो जाता है।

 

शिव पंचाक्षर स्त्रोत:-

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय|

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवायः॥

हे महेश्वर! आप नागराज को हार स्वरूप धारण करने वाले हैं। हे (तीननेत्रों वाले) त्रिलोचन आप भष्म से अलंकृत, नित्य (अनादि एवं अनंत) एवं शुद्ध हैं। अम्बर को वस्त्र सामान धारण करने वाले दिग्म्बर शिव, आपके न् अक्षर द्वारा जाने वाले स्वरूप को नमस्कार ।

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय|

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे “म” काराय नमः शिवायः॥

चन्दन से अलंकृत, एवं गंगा की धारा द्वारा शोभायमान नन्दीश्वर एवं प्रमथनाथ के स्वामी महेश्वर आप सदामन्दार पर्वत एवं बहुदा अन्य स्रोतों से प्राप्त्य पुष्पों द्वारापुजित हैं। हे म् स्वरूप धारी शिव, आपको नमन है।

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय |

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै”शि” काराय नमः शिवायः॥

हे धर्म ध्वज धारी, नीलकण्ठ, शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले महाप्रभु, आपनेही दक्ष के दम्भ यज्ञ का विनाश किया था। मां गौरी केकमल मुख को सूर्य सामान तेज प्रदान करने वाले शिव, आपको नमस्कार है।

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय|

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै”व” काराय नमः शिवायः॥

देवगणो एवं वषिष्ठ, अगस्त्य, गौतम आदि मुनियों द्वार पुजित देवाधिदेव! सूर्य, चन्द्रमा एवं अग्नि आपके तीन नेत्र सामन हैं। हे शिव आपके व् अक्षरद्वारा विदित स्वरूप को नमस्कार है।

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय|

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै “य” काराय नमः शिवायः॥

हे यज्ञस्वरूप, जटाधारी शिव आप आदि, मध्य एवं अंत रहित सनातन हैं। हे दिव्य अम्बर धारी शिव आपके शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले स्वरूप को नमस्कारा है।

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ| शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मंत्र कानित्य ध्यान करता है वह शिव के पूण्य लोक को प्राप्त करता है तथा शिव के साथ सुख पूर्वक निवास करता है।

भक्ति की जागृति के लिए भगवान शिव की, सद्गुरु की शरण जाना होगा। शिव राम की भक्ति देते हैं और भक्ति द्वारा जो लक्ष्य प्राप्त किया जाता है उसका नाम है मुक्ति।

जाने पूर्ण पुण्य फल प्राप्ति के लिए पूजा के बर्तन किस धातु के होने चाहिए

जाने पूर्ण पुण्य फल प्राप्ति के लिए पूजा के बर्तन किस धातु के होने चाहिए

हिन्दू धर्म में भगवान की पूजा के लिए कई प्रकार के बर्तनों का उपयोग किया जाता है। हिन्दू धर्म मे ऐसा माना जाता है कि जिस धातु से भगवान की पूजा निषेध बताई गई है और उस धातु से भगवान की  पूजा की जाती है तो पूर्ण पुण्य फल की प्राप्ति नहीं मिलती है। इस संबंध में भी शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं।

भगवान की पूजा एक ऐसा उपाय है जिससे जीवन की बड़ी-बड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं। पूजा में बर्तनों का भी काफी गहरा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग धातु अलग-अलग फल देती है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही वैज्ञानिक कारण भी है। सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तनों का उपयोग शुभ माना गया है। जबकि, पूजन में लोहा और एल्युमीनियम धातु से निर्मित बर्तन वर्जित किए गए हैं।

पूजा में लोहा और एल्युमीनियम धातु से निर्मित बर्तन उपयोग क्यों वर्जित है, जाने इसका रहस्य ???

पूजा और धार्मिक क्रियाओं में लोहा, स्टील और एल्युमीनियम को शास्त्रों के अनुसार अपवित्र धातु माना गया है। इन धातुओं की मूर्तियां भी नहीं बनाई जाती है। लोहे में हवा और पानी से जंग लग जाता है और एल्युमीनियम से भी कालिख निकलने लगती है। जो कि हमारे स्वास्थय के लिए हानिकारक होती हैं। पूजन में कई बार मूर्तियों को हाथों से स्नान कराया जाता है, उस समय मूर्तियों को रगड़ा भी जाता है। ऐसे में लोहे और एल्युमीनियम से निकलने वाली जंग और कालिख का हमारी त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए लोहा, एल्युमीनियम को पूजा में निषेध माना गया है। पूजा में सोने, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। इन धातुओं को रगड़ना हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक रहता है।