मंदिर की परिक्रमा करने के लाभ

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भगवान की पूजा-अर्चना के बाद हम मंदिर के चारो ओर परिक्रमा करते हैं। सामान्यत: हम सब देवी-देवताओं की परिक्रमा सभी करते हैं, लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि परिक्रमा क्यों की जाती है। और परिक्रमा करने से क्या लाभ मिलेगा।
मंदिर की परिक्रमा संबंध में हिंदू शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। परिक्रमा करने से हमारे पाप होते है। देवी-देवताओं की कृपा से पैसों की तंगी से मुक्ति मिलती है और धन की प्राप्ति होती है । घर-परिवार में प्रेम बना रहता है।

आरती, पूजन और मंत्र जप के चमत्कारी असर से मंदिर परिसर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाहन होता रहता है। जब परिक्रमा करते है तो मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा हमें अधिक मात्रा में प्राप्त होती है और इसी वजह से श्रद्धालुओं को शांति और सुख का अनुभव होता है। मंदिर से प्राप्त होने वाली सकारात्मक ऊर्जा अथवा दैवीय शक्ति हमें चिंताओं से मुक्त करती है। हमारा मन भगवान की भक्ति में लग जाता है और यही कारण ह की हम भगवान की भक्ति में लीन हो जाते है समाज व परिवार को त्याग देते है ।

परिक्रमा के माध्यम से हम दैवीय शक्तियों को ग्रहण कर सकते हैं और परिक्रमा के माधयम से हम देवी देवताओ को प्रश्न कर सकते है । इसी वजह से परिक्रमा की परंपरा बनाई गई है। जिससे भक्तों की सोच भी सकारात्मक बनती है और बुरे विचारों से मुक्ति मिलती है। प्रतिमा की परिक्रमा करने से हमारे मन को भटकाने वाले विचार समाप्त हो जाते हैं और शरीर ऊर्जावान व नयी उमंग उत्पन होती है। रुके कार्यों में सफलता मिलती है।

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