जाने शनिदेव की दृष्टि से क्यों डरते है –

REMEDY FOR SHANI DASHA

शनि एक पाप ग्रह माना जाता है। शनि की वक्र दृष्टि से अच्छे-भले मनुष्य का नाश हो जाता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शनि की टेढ़ी नजर यानि वक्र दृष्टि हर व्यक्ति के जीवन में हलचल मचाती है। सूर्य पुत्र शनि देव का नाम सुनकर लोग सहम से जाते हैं। शनि की टेढ़ी चाल से किसे डर नहीं लगता, उनके क्रोध से मनुष्य तो क्या देवता भी थर-थर कांपते हैं, यहां तक की भगवान श्री गणेश पर दृष्टि पड़ते ही उनका सिर कट गया। जानें आगे क्या हुआ

सनातन धर्म में शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश को भगवान श्री कृष्ण चन्द्र का ही अवतार माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार पुत्र प्राप्त करने की चाह से मां पार्वती ने भगवान श्री कृष्ण चन्द्र जी का ध्यान किया। अपने भक्त की पुकार सुन कर भगवान श्री कृष्ण चन्द्र जी ने वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर माता पार्वती को बताया कि वह गणेश रूप में उनके पुत्र बनकर अवतरित होंगे।

इस घटना के उपरांत मनमोहनी छवी का बालक मां पार्वती जी के समक्ष अवतरित हुआ। उस बालक के मुख मंडल पर इतना तेज था कि उसके आकर्षण में बंध कर समस्त देवी-देवता और ऋषि-मुनि बालक के दर्शनों हेतू आ गए। जब शनिदेव को ज्ञात हुआ की सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि मनमोहनी छवी के बालक के दर्शन करने गए हैं तो वो भी श्री गणेश के दर्शनों के अभिलाषी बन कर कैलाश पर्वत पर पंहुच गए।

वे खुशी-खुशी कैलाश पर्वत पर पंहुच तो गए मगर उन्होंने बालक गणेश के दर्शन नहीं किए क्योंकि शनिदेव को उनकी पत्नी का शाप था कि उनकी दृष्टि सदैव नीची ही रहेगी, जिस पर उनकी दृष्टि पड़ेगी उसका सिर कट जाएगा। इस भय से की उनके दर्शन करने से बालक का कोई अहित न हो जाए वह आंखे फेरे खड़े रहे।

माता पार्वती को बहुत आश्चर्य़ हुआ की सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि उनके पुत्र की मनमोहनी छवी को निहार रहे हैं वहीं शनि देव नजरे नीचे किए उनके पुत्र से दूरी क्यों बनाए हुए हैं। उन्होंने शनिदेव को अपने समीप बुलाया और कहा,” शनिदेव सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने मेरे पुत्र के दर्शन कर लिए हैं बस आप ही रह गए हैं। लिजिए गोद में उठा लें बालक को।”

शनिदेव बोले,” माफ करें माता मैं चाह कर भी इस मनमोहने बालक को अपनी गोद में उठा नहीं सकता और न ही इस पर अपनी दृष्टि डाल सकता हूं।”

माता पार्वती हैरानी से शनि देव की ओर देखने लगी। शनिदेव ने उन्हें अपनी पत्नी द्धारा दिए गए श्राप की बात बताई। किंतु माता बनने का सौभाग्य पाकर माता पार्वती बहुत हर्षित थी। उन्होंने शनिदेव की एक न सुनी और बालक गणेश के दर्शन करने को कहा।

माता पार्वती के प्रेमपूर्वक किए गए अग्रह को शनिदेव टाल न सके और उन्होंने बालक पर अपनी दृष्टि डाल दी। शनिदेव के बालक गणेश पर दृष्टि डालते ही उनका सिर कट गया। अपने पुत्र की ऐसी दशा देख माता पार्वती विलाप करने लगी। भगवान श्री हरि विष्णु जल्दी से गए और जाकर एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आए और उसे बालक गणेश के सिर पर लगा दिया। उसी दिन से श्री गणेश गजानन कहलाए।

 

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