increase wealth and good luck by these tips

बढ़ाना चाहते है धन और सौभाग्य तो अपनाएं ये सरल से उपाय

चाहे वो कोई भी व्यक्ति हो उसके मन में हमेशा प्रश्न उठता है कि वह इंसान अपनी दरिद्रता और अपना दुर्भाग्य कैसे दूर करे इसके लिए हर व्यक्ति धन कमाने के प्रयास करता है। ऐसे बहुत से व्यक्ति है जो कि इसमें सफल हो जाते है और कुछ ऐसे है जो कुछ भी कर ले लेकिन सफल नहीं हो पाते है। आज के लेख में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिन्हे आजमाने से अवश्य शुभ फल प्राप्त होंगे।

आइये जानते है जीवन में सौभाग्य और सफल होने के सरल उपाय

  • गूलर की जड़ को कपडे में लपेटकर रख ले। इसके बाद में चांदी के कवच में डाल कर गले में पहनने से भी आर्थिक संपन्नता आती है।
  • अगर आप तिजोरी को धन से भरना चाहते है तो इसके लिए अपनी तिजोरी में नौ लक्ष्मीकरण कौड़ियां तांबे का सिक्का रखे।
  • एक नियम बाँध ले उसके हिसाब से केले के पेड़ में जल अर्पित करने और घी का दीपक जलाए ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है।
  • जब भी भोजन करे उससे पहले कुत्ते या गाय के लिए एक रोटी निकाल दे। ऐसा करने से कभी भी आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • हर गुरूवार को तुलसी पौधे में दूध चढ़ाए ऐसा करने से आर्थिक संपन्नता में वृद्धि होती है।
  • शुक्ल पक्ष की पंचमी को घर में श्रीसूक्त की ऋचाओं के साथ आहुति देने से भी दरिद्रता दूर होती है।
  • भगवान श्रीकृष्ण को महीने के पहले बुधवार को रात में कच्ची हल्दी की गांठ बांधकर अर्पित करे। दूसरे दिन इसको पीले धागे में बांधकर अपनी दाहिने भुजा में बाँध ले।

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पूजा घर में रखेंगे ये चीजें तो होगा कल्याण

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अगर आप कर्ज से मुक्ति चाहते है तो इन पांच वृक्षों का सहारा ले

आजकल ऐसे बहुत से लोग है जो कि कर्जे की वजह से दबे हुए है। ऐसे कई लोग है जिनकी पास पैसा बचता ही नहीं है कि वो कैसे कर्जा उतारे या उतारने का सोचे। वही दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग है जिनकी पास पैसा तो है लेकिन फिर भी वो कर्ज नहीं उतार पाते है।

बरगद के पेड़ का उपाय

एक बरगद के पेड़ का पत्ता ले और उसके ऊपर आटे का दीया जलाकर किसी भी हनुमान मंदिर या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे रख आए। इस उपाय को करने से कर्जे से छुटकारा मिलेगा। अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखे, ऐसा करने से भंडार भरा रहेगा। हल्दी की गांठे, पान का पत्ता और सुपारी तिजोरी में रखने से धन का भंडार बना रहेगा।

पीपल के पेड़ के उपाय

शमशान के कुँए का जल लाकर किसी भी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह कार्य नियमित रूप से सात शनिवार को किया जाना चाहिए और शनिवार के दिन ही पीपल के नीचे दिया जलाना चाहिए। इस उपाय से कर्ज से छुटकारा मिलेगा।

केले के पेड़ का उपाय

जैसा की हम सब जानते है कि केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है और किसी भी धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। अगर आप कर्ज से मुक्ति चाहते है तो प्रति गुरूवार को केले के पेड़ की पूजा करना चाहिए। जब तुलसी और केले का पौधा घर में रखते है तो इससे बरकत बनी रहती है।

नारियल का वृक्ष

हिन्दू धर्म में नारियल के बगैर तो कोई मंगल कार्य संपन्न होता ही नहीं। पूजा के दौरान कलश में पानी भरकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है। एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।

बिल्व का वृक्ष

ऐसा माना जाता जिस घर में एक बिल्व का वृक्ष लगा होता है। उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। घर की पूर्व दिशा में गुलाब, चंपा, गूलर, चमेली, बेला, दुर्वा, तुलसी आदि के पौधे लगाने चाहिए। इससे शत्रुनाश, धनसंपदा की वृद्धि व संतति सुख प्राप्त होता है।

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husband wife problem solution

Astrological Solution for Relationship Problems Arise between Husband and Wife

We all know that the relationship between husband and wife is something sweet and sometimes bitter. There are some of the moments of happiness and sometimes everything is filled with the moments of the arguments. Therefore the little disagreement or the distraught helps in understanding each other better and thus it all helps to strengthen the bond. But the problem arises when the fight becomes more regular and trivial issues which start snowballing then it becomes a matter of the concern. When couples are facing regular fights and arguments then it causes mental stress and frustration which leads to the issues in the personal and professional lives of both the individuals involved. This is the time when problems arise in husband wife relation.

Marriage is a sacred relationship in which couples tied in the knot forever. With the present and modern hectic lifestyle of the people, it has become difficult to live a happy married life. There are several issues arise in the life of the couples. For the reason, it all depends on the couples that how they handle the issues of their life. Some of the couples are able to handle the issues, on the other hand, some of them are not able to handle the issues of married life. At that time they take the help of astrological solutions for love marriage problems to arise between husband and wife.

Due to the busy schedule couples have no time to share thoughts and emotions with each other it is leading to the communication gap and other ugly circumstances that ruins the beautiful relationship. Thus there are several reasons behind such kind of circumstances.

Problems arise in marriage life are:

  • Financial dependence on one partner
  • Short-tempered nature
  • Forcing the wife to leave the job and stay at home.
  • Lack of trust in each other
  • Over possessiveness of a partner.
  • Incompatibility in arrange marriage
  • Interference of the in-laws in the marital issues

Above all are some of the issues that are arising in the life of couples due to which they are facing a lot of the problems. So if you are also facing any of the problems then you can take the help of the consultancy of astrology. He will help you to get rid of the issues that you are facing in your married life. In the short span of time married life will come back on the right track.

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maha shivratri

जानिये महाशिवरात्रि कब है और शुभ मुहूर्त

इस साल यानी कि 2020 में महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व 21 फरवरी को आ रहा है। भगवान भोलेनाथ शिव शंकर को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन सभी हिन्दू भक्तों के लिए विशेष होता है।

इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी 2020 को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर यानी कि अगले दिन 22 फरवरी के दिन शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी क्योकि 22 तारीख को पंचक प्रारंभ हो रहा है इसलिए 21 फरवरी को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।

रात्रि प्रहार की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से रात को 12 बजकर 52 मिनट तक होगी। इसके दूसरे दिन बहुत ही विधि विधान से पूजा की जाएगी। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है।

लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। हर साल में होने वाली 12 शिवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण महाशिवरात्रि मानी जाती है।

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vastu tips for guest rooms

वास्तु शास्त्र के हिसाब से जाने कैसा हो अतिथि कक्ष या गेस्टरूम

ऐसे बहुत कम लोग है जो इस बात को जानते है कि बैठकरूम और अतिथि कक्ष में फर्क होता है। लेकिन क्या आप जानते है कि वास्तु शास्त्र के हिसाब से अतिथि कक्ष कैसा होना चाहिए और कहा होना चाहिए एवं उस रूम में क्या क्या होना चाहिए और क्या नहीं। आज के लेख में जाने ऐसे ही कुछ ख़ास टिप्स।

अतिथि कक्ष कहा होना चाहिए?

कुछ वास्तुकार के अतिथि कक्ष को वाव्यव कोण में होना लाभपद्र मानते है। क्योकि इस दिशा के स्वामी वायु होते है तथा ग्रह चंद्रमा। जैसा कि हम जानते कि वायु का प्रभाव मन पर पड़ता है। अतः वायव्य कोण में अतिथि गृह होने पर अतिथि कुछ ही समय तक रहता है। इसके बाद में आदर सत्कार पाकर वापस लौट जाता है। यही कारण है जिसकी वजह से पारिवारिक मतभेद पैदा नहीं होते है। इस बात को हमेशा याद रखे कि अतिथि कक्ष कभी भी दक्षिण- पश्चिम दिशा यानी कि नैऋत्य में नहीं बनाना चाहिए क्योकि यह दिशा केवल घर के स्वामी के लिए ही होती है। आप आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण पूर्वी या दक्षिण दिशा में भी गेस्ट रूम बना सकते है। लेकिन ध्यान रहे कि आप इस बारे में पहले किसी वास्तुशास्त्री से बात कर ले।

अतिथि कक्ष कैसा होना चाहिए?

जब भी अतिथि को किसी कमरे में ठहराए वह कमरा हमेशा साफ़ और व्यवस्थित होना चाहिए। गेस्ट रूम का दरवाजा वास्तु शास्त्र के हिसाब से पूर्व दिशा में या फिर दक्षिण दिशा में होना चाहिए। गेस्ट रूम की खिड़की उत्तर दिशा, पश्चिमी दिशा या फिर उत्तर पूर्व कोने में होनी चाहिए। अगर गेस्ट रूम वायव्य कोण या फिर आग्नेय कोण में है तो आपको इस रूम का बाथरूम नैऋत्‍य कोण में बनाना चाहि‍ए और उत्तर पूर्वी कोने में एक खि‍ड़की जरूर रखना चाहि‍ए। उत्तर-पूर्वी दि‍शा में बना पूर्वमुखी या उत्तरमुखी दरवाजा गेस्‍टरूम के लि‍ए सबसे उत्तम होता है। अगर आपके घर में वास्तु दोष है तो आप वास्तु दोष निवारण भी कर सकते है।

क्या क्या होना चाहिए?

कभी भी गेस्ट रूम में भारी भरकम लोहे का सामान नहीं रखना चाहिए। वरना अतिथि को लगेगा कि आप उसे बोझ समझा जा रहा है। यह ऐसी अवस्था होती है जब मेहमान तनाव महसूस कर सकता है जितना हो सके आप इस रूम को खाली रखे। इस रूम में रखने के लिए आप फोल्डिंग बेड, सोफा कम बेड या फिर दो अलग अलग बेड का भी इस्तेमाल कर सकते है। ऐसा करने से कमरा भरा भरा भी नहीं दिखेगा और सुविधायुक्त भी रहेगा। कमरे में एक ऐसी अलमारी की भी व्यवस्था करे, जिसमे मेहमान अपने कपडे रख सके।

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things to keep in pooja ghar

पूजा घर में रखेंगे ये चीजें तो होगा कल्याण

जैसा की हम जानते है कि घर हो या मंदिर इनमे कुछ विशेष सामग्री होना बहुत जरुरी होता है। उन सभी को मिलाकर पूजा होती है। जब हम पूजा की साम्रग्री की बात करते है तो वह बहुत सारी होती है। लेकिन आज के लेख में हम बहुत ही जरुरी वस्तुए बता रहे है जिनका पूजा घर में होना बहुत आवश्यक है।

शालग्राम

शालग्राम विष्णु भगवान की एक प्रकार की मूर्ती होती है जो प्रायः पत्थर की गोलियों या बटियों आदि के ही रूप में होती है और उसके ऊपर चक्र का चिह्न बना हुआ होता है। कहा जाता है जिस शिला के ऊपर यह चिह्न नहीं होता है उसे पूजन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इसे सभी मूर्तियों से बढ़कर माना जाता है और सिर्फ इसी की पूजा का विधान है।

शिवलिंग

जैसा की हम सब जानते है कि शिव की यह एक ऐसी प्रकार की मूर्ती है जो प्रायः गोलाकार में जनेऊ धारण किए हुए होती है। इसे शिवलिंग कहा जाता है जिसका मतलब है कि शिव की ज्योति। इसे सभी प्रकार की मूर्ती से बढ़कर है। ऐसा माना जाता है कि शालग्राम और शिवलिंग के घर में होने से ऊर्जा में संतुलन कायम होता है और हर प्रकार की शुभता बनी रहती है।

आचमन

हमेशा ध्यान रखे कि छोटे से तांबे के लोटे में जल भरकर उसमे तुलसी डालकर हमेशा पूजा स्थल में रखना चाहिए। इस जल को आचमन का जल कहते है। इस जल को दिन में तीन बार ग्रहण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हम जब आचमन करते है तो पूजा का दो गुना फल ज्यादा मिलता है।

पंचामृत

पांच प्रकार के अमृतों को पंचामृत है। जब दूध, दही, शहद, घी और शुद्ध जल का मिश्रण बनता है तो उसे पंचामृत कहते है। ऐसे कुछ विद्वान है जो दूध, दही, मधु, घृत और गन्ने के रस से बने द्रव्य को पंचामृत कहते है और कुछ लोग दूध, दही, घी, शक़्कर और शहद को मिलाकर पंचामृत बनाते है। जब मधुपर्क बनता है उसमे घी नहीं होता है। इसके मिश्रण से सम्मिश्रण में रोग निवारण गुण विद्यमान होता है और यह पुष्टिकारक होता है।

चंदन

जैसा की हम जानते है कि चंदन शांति और शीतलता का प्रतिक होता है। हमेशा एक चन्दन की बट्टी और सिल्ली पूजा स्थल पर हमेशा रहना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चन्दन की सुगंध से मन में से नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते है। चन्दन को शालग्राम और शिवलिंग पर लगाया जाता है। जब माथे पर चन्दन लगाते है तो मस्तिष्क शांत भाव में रहता है।

अक्षत

अक्षत को चावल भी कहा जाता है, अक्षत को श्रम से प्राप्त संपन्नता का प्रतिक माना जाता है। जब आप अक्षित अर्पित करते है तो इसका अर्थ यह है कि अपने वैभव का उपयोग अपने लिए नहीं और बल्कि मानव की सेवा के लिए करेंगे।

पुष्प

जब देवी देवता की मूर्ती के पास में फूल अर्पित करते है तो यह सुंदरता का अहसास जगाने के लिए है। इसका मतलब यह है कि हम भीतर और बाहर से सूंदर बने।

नैवेद्य

नैवेद्य के अंदर मिठास और मधुरता होती है। आपके जीवन में मिठास और मधुरता होना बहुत जरुरी होता है। अगर आप देवी देवताओं के नैवेद्य लगाते रहते है तो इससे आपके जीवन में मधुरता, सौम्यता और सरलता बनी रहती है। फल, मिठाई, मेवे और पंचामृत के साथ में नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

रोली

रोली चुने की लाल बुकनी और हल्दी को मिलाकर बनाई जाती है। इसको कुमकुम भी कहा जाता है। रोली को रोजाना नहीं लगाया जाता। जब भी पूजा होती है तब इसे चावल के साथ में माथे पर लगाया जाता है। इसे शुभ समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोली आरोग्य को धारण करता है। यह रक्त वर्ण साहस का भी प्रतिक है। रोली को माथे पर नीचे से ऊपर की ओर लगाना अपने गुणों को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

धूप

धूप से सुगंध का विस्तार होता है। सुगंध की मदद से आपके मन और मस्तिष्क में सकारात्मक भाव और विचारो का जन्म होता है। इसकी मदद से आपके मन और घर का वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। सुगंध का जीवन में बहुत महत्व होता है। धूप और अगरबत्ती अलग अलग होते है इसलिए घर में धूप जलाए। धूप जलाने के लिए एक अलग पात्र आता है।

दीपक

जो पारंपरिक दीपक होता है वह मिट्टी का ही होता है। दीपक को बनने में पांच तत्वों का उपयोग होता है; मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। कहते है कि इन पांच तत्वों से सृष्टि का निर्माण हुआ है। हिन्दू अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

गरुड़ घंटी

वह स्थान जहा गरुड़ घंटी की नियमित बजने की आवाज आती है उस जगह का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इसकी मदद से नकारात्मक शक्तियां हटती है। जब नकारात्मकता हटती है तो समृद्धि के द्वार खुलते है। घर के पूजा स्थान में हमेशा गरुड़ घंटी रहनी चाहिए।

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know what happend after your death

कुंडली के 10 संकेत बताएगे मरने के बाद कैसी होगी आपकी गति

हर कोई इंसान जानना चाहता है कि उसके साथ मरने के बाद में क्या होगा। उसकी गति कैसी होगी या अगले जन्म में वो कहा होगा। लेकिन इस बारे में कोई भी बात कहना मुश्किल है। लेकिन इस बारे में धर्म और ज्योतिष शास्त्र में कुछ इससे जुड़े हुए संकेत बताए गए है।

जानिये धर्म और शास्त्र इस बारे में क्या कहते है?

ऐसी कहावत है कि इंसान जैसा कर्म करता है भगवान उसे वैसा ही फल देता है। कर्मो को हमेशा दो भागो में तोला जाता है अच्छे कर्म और बुरे कर्म लेकिन इन दोनों ही कर्मो के बीच मध्यम कर्म भी होते है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कर्मो के आधार पर मुख्यत, दो प्रकार की गतियां होती है गति और अगति।गति के दौरान जीव को किसी भी लोक में जाना पड़ता है। गति के अंतर्गत चार लोक दिए गए है: ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक और नर्कलोक।

जो भी जीव होता है वह अपने कर्मो के हिसाब से उक्त लोकों में जाता है। इन लोकों में जाने के लिए तीन मार्ग होते है – अर्चि मार्ग, धूम मार्ग एवं उत्पत्ति और विनाश मार्ग। अर्चि मार्ग के जरिये ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा की जाती है। धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है वही दूसरी ओर उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है।

जो अगति होता है उसमे व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है और उसे वापस जन्म लेना पड़ता है। अगति के चार प्रकार होते है:1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति। क्षिणोदर्क अगति के दौरान जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्यु लोक में आता है और संतों सा जीवन जीता है। भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है। अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है। गति में वह कीट, कीड़ों जैसा जीवन पाता है।

जानिये ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से:

  1. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न में उच्च राशि का चन्द्रमा हो और कोई पापग्रह उसे देख नहीं रहा हो तो ऐसे व्यक्ति के मरने के बाद में सद्गति प्राप्त करते है।
  2. अगर किसी जातक की कुंडली में कही पर भी कर्क राशि में गुरु स्थित हुआ हो तो जातक मृत्यु के बाद में उत्तम कूल में जन्म लेता है। और इसके अलावा अगर किसी की जन्म कुंडली में चार ग्रह उच्च हो तो वह जातक की श्रेष्ठ मृत्यु का वरण करता है।
  3. किसी भी व्यक्ति की कुंडली के लग्न में उच्च का गुरु चंद्र को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो एवं अष्ठम स्थान ग्रहों से रिक्त हो तो जातक सैकड़ो पुण्य कार्य करते हुए सद्गति प्राप्त होता है।
  4. अगर किसी की कुंडली के लग्न में गुरु और चंद्र चतुर्थ भाव में है और तुला का शनि और सप्तम भाव में मकर राशि का मंगल हो तो जातक जीवन में मृत्यु उपरान्त ब्रह्मलोक नहीं तो देवलोक में जाता है।
  5. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के अष्टम भाव में राहु है तो वह जातक परिस्थिति के कारण पुण्यात्मा बन जाता है। और मृत्यु के बाद में वह इंसान राजकुल में जन्म लेता है।
  6. यदि कोई जातक की कुंडली के अष्टम भाव पर किसी भी प्रकार से शुभ और अशुभ ग्रहों की दृष्टि नहीं पड़ रही हो तो वह भाव ग्रहों से रिक्त हो जाने के बाद जातक ब्रह्मलोक नहीं तो देवलोक की यात्रा करता है।
  7. किसी मनुष्य की कुंडली के अष्टम भाव को गुरु, शुक्र और चंद्र, यह तीनों ग्रह देखते हो या फिर अष्टम भाव को शनि देख रहा हो तथा अष्टम भाव में मकर और कुंभ राशि हो तो जातक मृत्यु के बाद में विष्णुलोक प्राप्त करता है या फिर वैकुण्ड में निवास करता है।
  8. कुंडली के ग्यारहवे भाव में अगर किसी व्यक्ति के सूर्य और बुध हो, एवं नवें भाव में शनि तथा अष्टम भाव में राहु हो तो जातक मृत्यु के पश्चात देवलोक या ब्रह्मलोक को गमन करता है।
  9. कुंडली में अगर बाहरवां भाव शनि, राहु या फिर केतु से युक्त होता है तो अष्टमेश से युक्त हो अथवा षष्ठेश से दृस्ट हो जातक को मरने के बाद में नरक की यात्रा करनी पड़ती है लेकिन अगर उसने पुण्यकर्म किए है तो वह इससे बच जाता है।
  10. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु लग्न में हो और शुक्र सप्तम भाव में हो तो कन्या राशि का चन्द्रमा हो एवं धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो जातक मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करता है।

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importance of north east corner of house

घर बनाते समय आखिर ईशान कोण का क्या महत्व होता है?

जैसा की हम जानते है कि रोटी, कपडा और मकान हर इंसान की मूलभूत आवश्यकताए है। इसी के अभाव में संसार में मानव मात्र का ही जीवनयापन करना बहुत ही कठिन एवं दुष्कर हो जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कई चीजों को प्राप्त करने के चक्कर में हम जीवन में इन सुखो का उपभोग नहीं कर पाते है। सबसे पहला कारण है इसके पीछे हमारी जीवनशैली जो कि हमें पाश्चात्य जगत की ओर आकर्षित कर रही है किन्तु हमें हमारी मूल संस्कृति एवं परम्पराओ से विलग कर रही है।

 ईशान कोण का महत्व 

जब भी किसी मकान का निर्माण होता है तो उसमे ईशान कोण का एक अपना ही अलग महत्व होता है। आज के लेख में हम आपको ईशान कोण से जुडी हुई कुछ जानकारी देंगे। आज के दौर में भोजन, कपडा इसी के साथ साथ एक और सपना होता है। आजकल हर इंसान खुद का मकान प्राप्त करने के लिए बहुत से परिश्रम करता है लेकिन अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब किसी भी इंसान का यह स्वपन पूरा होता है तो वह उससे उतना सुख प्राप्त नहीं कर पाते जितनी अपेक्षा करते है। इसी वजह से वह निराशा से घिर जाते है। लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण है वास्तु दोष।

जब भी किसी घर का निर्माण हो तो सबसे आवश्यक बात ध्यान में रखने की होती है वह है वास्तु। आज के फैशनपरस्त युग में ऐसे कई लोग है जिसकी उपेक्षा कर के भवन निर्माण के पश्चात शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति उठाते है। जैसा की हम जानते है की वास्तु शास्त्र में बहुत सी बाते ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है लेकिन सबसे ज्यादा महत्व होता है ईशान कोण का।

ईशान कोण को ईश यानी कि भगवान का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। जब भी किसी मकान का निर्माण होता है तो उस समय ईशान कोण और ब्रह्म स्थान यानी की मध्य स्थान की पवित्रता का समुचित ध्यान रखा जाता बहुत ही आवश्यक है। तो ऐसा ना करने पर भवन स्वामी अनेकानेक परेशानियों से ग्रस्त हो जाता है। जनमानस में यह भ्रांति है की ईशान कोण केवल उत्तर पूर्व के कोने को कहा जाता है। लेकिन वास्तविकता में वास्तु कोनो का निर्धारण समूचे भूखंड को नौ खंडो में बराबर बराबर विभक्त करने से होता है।

जो घर का ईशान कोण होता है उसमे मंदिर के अलावा कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए। ऐसी मान्यता है की ईशान कोण में टॉयलेट, बाथरूम और पानी की टंकी जैसे भारयुक्त निर्माण का भी निषेध है। कहा जाता है ईशान कोण किसी भी तरह से भारयुक्त नहीं होना चाहिए। माना जाता है कि किसी भी घर का ईशान कोण एवं ब्रह्म स्थान जितना शुद्ध और पवित्र होगा उतना ही उस भवन का स्वामी सुख और समृद्धिशाली होगा। तो जब भी अपने भवन का निर्माण करवाए तो उस समय वास्तु दोष और ईशान कोण के बारे में अच्छे से जान ले।

lunar eclipse 2020

10 जनवरी को साल का पहला सूतक, इस बार नहीं है ग्रहण का सूतक

10 जनवरी 2020 को साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। कुछ लोग यह सोचकर परेशान है कि चंद्रग्रहण पर सूतक लगेगा या नहीं लगेगा। लेकिन आपको बता दे कि चंद्रग्रहण 10 जनवरी को लगेगा वह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। अगर हम धर्मशास्त्र की बात करे तो इसे माद्य ग्रहण कहते है। जब यह ग्रहण होता है तब चन्द्रमा पर ग्रहण नहीं लगता है लेकिन इसका बिंब धुंधला हो जाता है।

कहा जा रहा है यह चंद्रग्रहण दूसरे चंद्र ग्रहण से काफी हद तक कमजोर होगा इसलिए ज्योतिषों का कहना है कि भारत में इस ग्रहण का असर ना के बराबर होगा। इस ग्रहण पर सूतक नई लगेंगे और मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं होंगे। ज्योतिषी शास्त्र के हिसाब से कहा जा रहा है कि इस ग्रहण को ग्रहण की कोटि में नहीं रखा जाएगा।

chndra grhan

इसलिए कहा जा रहा है कि ग्रहण के समय धार्मिक कार्य करने की मनाही भी नहीं होगी। 10 जनवरी से माघ का मेला लग रहा है और इस दिन पौष पूर्णिमा भी है इसलिए इस दौरान श्रद्धालु गंगा जी में डुबकी लगाएगे। पौष पूर्णिमा के दिन बाद और ग्रहण के बाद में दान पुण्य किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने में दान पुण्य का करोड़ों गुना फल मिलता है।

ऐसी मान्यता है कि पौष माह की पूर्णिमा पर स्नान और दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए मोक्ष की कामना रखने वाले बहुत ही शुभ मानते है। क्योकि इसके बाद में माघ महीने की शुरुआत होती है। ऐसी मान्यता है कि यदि चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी सरोवर में स्नान किया जाता है तो सभी पाप धूल। एवं इसके अलावा गेहू, चावल और गुड़ जैसी चीजों का भी दान करना चाहिए।

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solar eclipse december 2019

26 दिसम्बर को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

यह वर्ष बीतने वाला है और नया वर्ष आने वाला है। इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसम्बर 2019 को लगने जा रहा है जो कि वलयाकार होगा। इसका मतलब यह है कि यह ग्रहण पूर्णग्रास नहीं बल्कि खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। इसी साल में इससे पहले छह जनवरी और दो जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण लगा था।

हाल ही में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा जारी किए हुए ए`क बयान में बताया गया है कि भारत में सूर्योदय के बाद इस वलयाकार सूर्य ग्रहण को देश के दक्षिणी भाग में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्सों में इसे देखा जा सकता है। लेकिन देश के कई हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।

भारतीय समय के अनुसार आंशिक सूर्यग्रहण सुबह आठ बजे आरम्भ होगा लेकिन वलयाकार सूर्यग्रहण की अवस्था सुबह 9:06 बजे शुरू हो जाएगी। जो सूर्यग्रहण की वलयाकार अवस्था दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। कहा जा रहा है कि ग्रहण की आंशिक अवस्था दोपहर एक बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।

कहा जा रहा है यह ग्रहण देश के दक्षिणी हिस्से में कुछ स्थानों जैसे कन्नानोर, कोयंबटूर, कोझीकोड, मदुरई, मंगलोर, ऊटी, तिरुचिरापल्ली जगहों से होकर गुजरेगा। ऐसा माना जा रहा भारत में वलयाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का करीबन 93 फीसदी तक का हिस्सा चाँद से ढका हुआ रहेगा।

वलयाकार पथ से देश के उत्तर और दक्षिण की ओर बढ़ने पर आंशिक सूर्य ग्रहण की अवधि घटती जाएगी। सूर्य का वलयाकार ग्रहण भूमध्य रेखा के निकट उत्तरी गोलार्ध में एक संकीर्ण गलियारे में दिखाई देगा। अगला सूर्य ग्रहण भारत में 21 जून, 2020 को दिखाई देगा।

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12 zodiac signs that make the best couples

12 Zodiac Signs That Make the Best Couples

Each and everyone wants or desires in their life for the right person with whom they can spend their rest of the life and can share happiness, sorrow, feelings, sentiments, and emotions of their life. But without seeing compatibility in any relationship or in marriage one has to face lots of circumstances and problems in their life and it is a reason behind their pathetic and worse life. Compatibility in a relationship, relation or in marriage is very essential which prescribed and leads a peaceful, powerful, strong and long-lasting bond between the couples.

12 combination of zodiac which makes best couples

zodiac signs

Here are 12 zodiac signs and combination mention below which are considered as a best and powerful bond in between the couples –

1)     Aries and Aquarius:

The relation and bond between Aries and Aquarius are considered as the best pair and as the best match because both signs are ferociously adventures; the compatibility in both the zodiac sign is very good they both enjoy each other’s company and loves to spend good time together by horoscope predictions.

2)     Taurus and Cancer:

The relation and bond between Taurus and Cancer is a good one they both zodiac signs takes their relationship very seriously and both signs are well physically and mentally strong and both have better understanding between them which creates a mutual understanding and a strong bond they both are enjoying the companies of each other.

3)     Gemini and Aquarius:

These two zodiac signs have an emotional crazy relationship together they both are creative and innovative personalities. They both like to spending time with each other or for each other, they love as their independence and they do not seem to bother the reason behind is that they both understand each other well they both have a better tune to talk.

4)     Cancer and Pisces:

The relation between Cancer and Pisces is considered as the best and very good pair or match because they both are cool water signs and they have a great connection with each other and they understand well each other properly. Both zodiac signs have a better compatibility and a good sense of humor or which makes a solid and strong bond between them. Cancer is keen to the encouragement of the persons who are in the region of them while Pisces is all about connecting with others.

5)     Leo and Sagittarius:

Both zodiac signs are extremely passionate about love and what they want in their life; Leo and Sagittarius enjoy their life at max and they are extremely encouraging. The bond between these two zodiac signs is a very interesting one and both the sign indicate fire and thoughtful understanding with each other.

6)     Virgo and Taurus:

Virgo and Taurus, these both zodiacs are earth sign and truly having a better understanding, they both are cool and calm and this is what makes their relationship strong. They both are very loyal and honest with each other and having a capability that makes their relationship long-lasting. They both are not only having a lot of honesty and trust but they also have the same distinctiveness and principles.

7)     Libra and Gemini:

The relation between Libra and Gemini is an outstanding match and these two have a strong connection, great understanding, and appreciation for each other. They want to live with peace in their relationship and having mutual understanding, with knowledge in their relationship.

8)     Scorpio and Cancer:

The relation between these two zodiac signs is good; these two zodiac signs both are very serious and having great emotions, feelings, and sentiments. They both have good compatibility with each other and they both support each other in every circumstance of life, they both are having caring nature towards each other.

9)     Sagittarius and Aries:

Aries and Sagittarius both are a fire sign and having good compatibility with each other. They both are loving and caring towards both of them and have the power to fight with any problems and conflicts in their relationship or in life for each other. They have a crazy, wild amount of energy that makes their relation more strong and powerful.

10) Capricorn and Taurus:

The relation between Capricorn and Taurus is considered as an excellent and outstanding match in astrology. They are having the power to remain life- long with each other or together with happiness in their life they actually enjoy each other companies until they die or end. They both zodiac signs having an endless love in their relationship and they both respect each other very much.

11)Aquarius and Gemini:

The relation between Aquarius and Gemini is a good one they both are air signs and they have a great psychological connection in their relationship. They both are very loving and caring towards each other they do not think and care about what people told and thinking they just love to be in each other’s company and creates a strong bond in their relationship.

12)Pisces and Scorpio:

The relation between Pisces and Scorpio is very good because they both understand their value in their life and they trust and believe their partner very much and they both are honest for each of them they both are very spur-of-the-moment for each other. They understand their partner in all the situations and ready to be pair with them.

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shani ki saade saati

शनि की साढ़ेसाती में किस अंग पर पड़ता है बेहद असर

शनि की ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही अहम् भूमिका है। शनि को नवग्रहों में न्यायाधिपति माना जाता है। ज्योतिषी फलकथन में शनि की स्थिति एवं दृष्टि बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है। चाहे वो कोई भी जातक हो उसकी जन्मपत्रिका का परिक्षण कर उसके भविष्य के बारे में संकेत करने के लिए जन्मपत्रिका में शनि के प्रभाव का आंकलन करना अति आवश्यक है।

शनि स्वभाव में क्रूर एवं अलगाववादी ग्रह है। जब यह जन्मपत्रिका में किसी अशुभ भाव के स्वामी बनके किसी भी शुभ भाव में स्थित होते है तब जातक के अशुभ फल में अतीत वृद्धि कर देते है। शनि एक ऐसा ग्रह है जो कि मंद गति से चलता है। शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहता है। शनि की तीन दृष्टियां होती है- तृतीय, सप्तम एवं दशम।

ऐसा माना जाता है कि शनि जन्मपत्रिका में जिस भाव में स्थित होते है वहा से तीसरे, सातवे और दसवे भाव पर अपना दृष्टि प्रभाव रखते है। ज्योतिष अनुसार शनि दुःख के स्वामी भी है एवं शनि के शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर सदैव दुखी चिंतित रहता है।

जो शुभ शनि होते है वो अपनी साढ़ेसाती एवं ढैय्या में जातक को आशातीत लाभ प्रदान करते है वही दूसरी ओर अशुभ शनि दोष अपनी साढ़ेसाती एवं ढैय्या में जातक को घोर एवं असहनीय कष्ट देते है। साढ़ेसाती की अवधि के दौरान शनिदेव जातक के विभिन्न अंगों पर अपना शुभाशुभ प्रभाव डालते है। आज के लेख में हम आपको बताएगे कि साढ़ेसाती के दौरान शनि जातक के किस अंग को कितनी अवधि तक प्रभावित करते है।

  1. मस्तिष्क- 10 माह- सुखदायक
  2. मुख- 3 माह 10 दिन- हानि
  3. दाहिना नेत्र- 3 माह 10 दिन- शुभ
  4. बायां नेत्र- 3 माह 10 दिन- शुभ
  5. दाहिनी भुजा- 1 वर्ष 1 माह 10 दिन- विजय
  6. बायीं भुजा- 1 वर्ष 1 माह 10 दिन- उत्साह, पराक्रम
  7. ह्रदय- 1 वर्ष 4 माह 20 दिन- धनलाभ
  8. दाहिना पैर- 10 माह- यात्रा
  9. बायां पैर- 10 माह- संघर्ष
  10. गुदा- 6 माह 20 दिन- मानसिक चिन्ता व कष्ट

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