शनि – रत्न ‘नीलम’ (Saphire)

7,000.00

nilam 7000 per carete

nili price 1025

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Description

नीलम शनिग्रह का मुख्य रत्न है हिंदी में नीलम तथा अंग्रेजी में सेफायर कहते है l

पहचान- असली नीलम चमकीला, चिकना मोरपंख के समान वर्ण जैसा, नीलो किरणों से युक्त एवं पारदर्शी होगा।

पहचान- (1) असली नीलम को गाय के दूध में डाल दिया जाये तो दूध का रंग नीला लगता है।

पहचान- (2) पानी से भरे कांच से गिलास में डाला जाये नीली किरणें दिखाई देंगी।

पहचान- (3) सूर्य की धुप में रखने से नीले रंग की किरणें दिखाई देंगी।

गुण- नीलम धारण करने से धन-धान्य, यश-कीर्ति, बुद्धि चातुर्य, सर्विस एवं व्यवसाय तथा वंश में वृद्धि होती है। स्वास्थ्य सुख का लाभ होता है।

धयान रहे, बहुधा नीलम चौबीस घंटे  के भीतर ही प्रभाव करना शुरू कर देता है। यदि नीलम अनुकूलन न बैठे तो भारी नुकसान की आशंका हो जाती है। अतएव परीक्षा के तौर पर काम से काम ३ दिन तक पास रखने पर यदि बुरे स्वप्न आए, रोग-उत्पन्न हो या चेहरे की बनावट में अंतर आ जाये तो नीलम मत पहने।

रोग शांति- नीलम धारण करने या औषधि रूप में ग्रहण करने से दमा, क्षय, कुष्ट रोग, ह्रदय रोग, अजीर्ण, मूत्राशय सम्बन्धी रोगो में लाभकारी है।

धारण विधि- नीलम 5, 7, 9, 12  अथवा अधिक रत्ती के वजन का, पंचधातु, लोहे अथवा सोने की अंगूठी में शनिवार को शनि की होरा में एवं पुष्य, उ. भा., चित्रा, स्वा, धनि या शतभिषा नक्षत्रों में शनि की बीज मंत्र प्रां. प्रीं. प्रौं. सः शनये नमः मंत्र से 23000 की संख्या में अभिमंत्रित करके मध्यमा अंगुली में धारण करें। तत्पश्चात शनि की वस्तुओ का दान दक्षिणा सहित करना कल्याणकारी होगा।