मंगल – रत्न ‘मूंगा’ (Coral)

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Description

इसे संस्कृत में अंगारकमणी तथा अंग्रेजी में कोरल कहते है l

गोल, चिकना, चमकदार एवं औसत  से अधिक वजनी, सिंधुरी से मिलते-जुलते रंग का मूंगा श्रेष्ट माना जाता है l इसका स्वामी ग्रह मंगल है l

परीक्षा-(1) असली मूंगे को खून में डाल दिया जाये तो उसके चारों ओर गाढ़ा रक्त जमा होने लगता है l

परीक्षा-(2) असली मूंगा यदि गौ के दूध में डाल दिया जाये तो उसमे लाला रंग की झाई सी दीखने लगती है l

श्रेष्ट जाती का मूंगा धारण करने से भूमि, पुत्र एवं भ्रातृ सुख, निरोगता आदि की प्राप्ति होती है l इसके अतिरिक्त रक्त-विकार, भूत, प्रेत बाधा, दुर्बलता, मंदाग्नि, ह्रदय-रोग, वायु-कफादि विकार, पेट विकरादि में मूंगे की भस्म अथवा मिट्टी का प्रयोग किया जाता है l मेष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर, कुम्भ व् मीन राशि एवं लग्न वालो को सुयोग ज्योतिषी के परामर्शानुसार धारण करना लाभप्रद होगा l