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ॐ के शारीरिक लाभ:

 
ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है..
                अ उ म् ।
 "अ"  का  अर्थ  है उत्पन्न  होना,
"उ"  का  तात्पर्य  है  उठना,  उड़ना  अर्थात्  विकास,  "म"  का  मतलब  है  मौन  हो  जाना  अर्थात्  "ब्रह्मलीन"  हो  जाना।
 
  ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
 
जानीए 
ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...
 
            
ॐ और थायराॅयडः-
ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
ॐ और घबराहटः-
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।
 ॐ और तनावः-
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
 
. ॐ और खून का प्रवाहः-
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
ॐ और पाचनः-
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।
. ॐ लाए स्फूर्तिः-
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।
ॐ और थकान:-
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।
 
. ॐ और नींदः-
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।
ॐ* और फेफड़े:-
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।
 
 ॐ और रीढ़ की हड्डी:-
ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
 दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।
 
     पहला  सुख  निरोगी  काया  कर ले तू प्राणायाम,,,,
कर ले तू प्राणायाम, सब रोग दूर हो जाएगा ।
रोना नही होगा, जीवन खुशियों से भर जाएगा ।।
 
जीवन तुम्हारा दुर्भर है आज, कल तू ही इतराएगा।
आज तुझे विश्वास नहीं, कल दुनिया को बतलाएगा ।।
करले तू प्राणायाम……………..
 
पांच मिनट भास्त्रिका करले, रक्त शुद्ध हो जायेगा ।
सर्दी जुकाम एलर्जी दूर, मन स्थिर हो जायेगा।।
 
पन्द्रह मिनट कपालभाती कर, मुखमंडल तेज हो जायेगा ।
गैस कब्ज, मधुमेह सहित, मोटापा दूर हो जाएगा ।
कर ले तू प्राणायाम ………………
 
पांच बार बाह्य प्राणायाम कर, चंचलता दूर हो जायेगा ।
उदर रोग सब दूर होकर , जठराग्नि प्रदीप्त हो जायेगा ।।
 
दस मिनट अनुलोम-विलोम कर, सिरदर्द ठीक हो जायेगा ।
नकारात्मक चिन्तन से दूर, आनंद, उत्साह बढ़ जायेगा ।।
कर ले तू प्राणायाम……………….
 
ग्यारह बार भ्रामरी कर , सब तनाव दूर हो जायेगा ।
रक्तचाप हृदय रोग सहित, उत्तेजना मिट जाएगा ।।
 
इक्कीस बार ओंकार जनकर, अनिद्रा रोग ठीक हो जायेगा ।
बुरे स्वप्नों से छुटकारा पाकर, ध्यान तेरा लग जायेगा ।।
कर ले तू प्राणायाम……………….
 
तीन बार नाड़ी शोधन कर, रक्त संचार ठीक हो जायेगा ।
बहरापन, लकवारोग मिटे, ऑक्सीजन बढ़ जायेगा ।।
 
पांच बार उज्जायी कर, गला मधुर हो जायेगा।
सर्दी जुकाम सहित, हकलाना, ठीक हो जायेगा ।।
कर ले तू प्राणायाम…………….
 
ग्यारह बार शीतकारी कर , पायरिया दूर हो जाएगा ।
दंत रेाग दूर होकर, शीतल शरीर हो जायेगा ।।
 
ग्यारह बार शीतली कर, भूख प्यास मिट जायेगा ।
मुंह गले के रोग सहित, पित्त रेाग मिट जायेगा ।।
कर ले तू प्राणायाम……………….
 
तीन बार सिंहासन कर ले, दर्द गले का ठीक हो जायेगा ।
अंत में हृस्यासन कर ले, हंसते जीवन बीत जायेगा।।
 
कर ले तू प्राणायाम, सब रोग दूर हो जाएगा ।
रोना नही होगा, जीवन खुशियों से भर जाएगा ।
 
दोस्तों,योग सिर्फ स्वस्थ रहने के लिये व्यायाम ही नहीं, यह प्रकृति का परम सूत्र है, आपको जोड़ने का, आपको व्यापक बनाने का सीमाओं से परे!! योग और प्राणायाम के निरंतर अभ्यास द्वारा आप जीवन का यथार्थ देखने में सक्षम हो जाते हैं, अपनी शक्तियों का आभास करते हैं और समझ जाते हैं कि आपका ही परम रूप परमात्मा है।

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