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शनि का गोचर 2018 में

शनि देव एक राशि में 30 महीनो तक रहते हैं | और शनि 26 अकतुबर 2017 से धनु राशि में हैं, मतलब पूरे 2018 में शनि देव इसी राशि में ही रहेंगे | और धनु राशि में शनि मूल नक्षत्र में लगभग नवम्बर 2018 तक गोचर करेंगे | इसी बीच शनि कुछ समय के लिये ( 17 अप्रैल - 5 सितम्बर ) वक्री होंगे | और दिसम्बर से पुर्वाशाढ नक्षत्र में गोचर करेंगे |  मूल नक्षत्र केतु का है और पूर्वाशाढ शुक्र का | और 2018 दिसम्बर में आखिर के 15 दिनो में शनि सुर्य के प्रभाव में आने के कारण अस्त भी होंगे | हालांकि शनि इस समय भी अस्त चल रहे हैं, और 8 जनवरी को उदय हो जाएंगे और धनु राशि में होने का प्रभाव दिखायेगे | 
# हालाकि केतु के नक्षत्र में होने के कारण इस समय नौकरी कारोबार में वो गति और लाभ नज़र नहीं आयेगा | नौकरी कारोबार में लाभ तभी मिलेगे जब शनि शुक्र के नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, और तभी लक्ष्मी आएगी बरकत लेकर |  और केतु के नक्षत्र में होने के कारण लाभ सिर्फ़ उन लोगो को मिलेगा जिनकी कुण्डली में केतु अच्छी स्थिति में है, मतलब जिनकी संतान ( लड़का )  अच्छे व्यवहार और आचरण वाला है | और शनि की दशा या अन्तर दशा से भी वो गुज़र रहे हैं | और जिनकी संतान ( लड़का ) माता - पिता और धर्म के विपरीत आचरण करने वाली है, उनको इस समय में शनि देव के कारण कश्ट का सामना करना होगा | और जिन पर शनि की दशा अन्तर दशा नहीं है, उन पर शनि के इस गोचर का खास लाभ या हानि नहीं होगी | 
# शनि के धनु राशि में होने के कारण वृष और कन्या राशि वालो पर ढैया का प्रभाव रहेगा, और वृश्चिक, धनु और मकर राशि के जातक साडेसाती के प्रभाव में रहेंगे | इस लिये इन राशि वालो को भी कुण्डली में शनि और केतु की अच्छी या बुरी स्थिति के कारण परिणाम अच्छे या बुरे मिलेगे | 
# और जिनकी कुण्डली में शनि वक्री हैं, उनको अप्रैल से सितम्बर के बीच विशेष सफ़लता मिलेगी | नौकरी और कारोबार में विशेष तरकी और सफ़लता के मौके उनके लिये आयेंगे |

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