logo
India Free Classifieds

घर की समृद्धि हेतु वास्तु के २७ सूत्र

1. सफ़ेद रंग की सुगन्धित मिट्टी वाली भूमि ब्राह्मणो के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। 

2. लाल रंग कि कसैले स्वाद की भूमि क्षत्रिय, राजनेता, सेना व पुलिस अधिकारियो के लिए शुभ मानी गई है।

3. हरे या पीले रंग की खट्टे स्वाद वाली भूमि व्यापारियो, व्यापारिक स्थलो तथा वित्तीय संस्थानो के लिए शुभ मानी गई है। 

4. काले रंग की कड़वे स्वाद वाली भूमि अशुभ होती है।  यह शूद्रो के लिए उपयुक्त है। 

5. मधुर, समतल, सुगन्धित व ठोस भूमि भवन बनाने हेतु उपयुक्त होती है। 

6. खुदाई में चींटी, दीमक, अजगर, सांप, हड्डी, कपडे, राख, कौड़ी, जली हुई लकड़ी  व लोहा मिलना अशुभ होता है। 

7. भूमि का ढलान उत्तर व पूर्व में शुभ तथा छत की ढ़लान एशन में शुभ होती है। 

8. भूखंड के दक्षिण या पश्चिम में ऊँचे मकान, पहाड़, टीले या पेड़ अशुभ होते है। 

9. भूखंड से पूर्व या उत्तर की और कोई नदी या नहर हो तथा उसका प्रवाह उत्तर या पूर्व की और हो तो वह भूखंड शुभ होता है। 

10. भूखंड के उत्तर, पूर्व या ईशान में भूमिगत जलस्त्रोत, कुआँ, तालाब व बावड़ी शुभ होती है।  भूखंड या भवन दो बड़े भूखंडो के बीच अशुभ होता है। 

11. आयताकार, वृताकार, व गोमुखी भूखंड गृह हेतु शुभ होता है। वृताकार भूखंड निर्माण में निर्माण भी  वृताकार होना चाहिए।  सिंहमुखी भूखंड व्यवसायिक भवन हेतु शुभ है। 

12. भूखंड का उत्तर या पूर्व या ईशान कोण में विस्तार शुभ है। 

13. भूखंड के उत्तर या पूर्व में मार्ग शुभ होता है।  दक्षिण व पश्चिम में मार्ग व्यापारिक स्थल में शुभ होते है। 

14. भवन के द्वार के सामने मंदिर, खम्भा व गड्डा अशुभ होते है। 

15. यदि आवासीय परिसर में बेसमेंट बनानी हो तो उत्तर या पूर्व में ब्रह्म स्थान को बचाते हुए बनाना चाहिए।  बेसमेंट की उंचाई कम से कम ६ फीट हो तथा ३ फीट तल से ऊपर हो जिससे प्रकाश व हवा निर्बाध रूप से आ सके। 

16. कुआँ, बोरिंग व भूमिगत टंकी उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में बनाये। 

17. भवन की प्रत्येक मंजिल में छत की उंचाई १२ फीट होनी चाहिए।  १० से कम तो होनी ही नहीं चाहिए।  भवन का दक्षिणी भाग हमेशा उत्तरी भाग से ऊँचा होना चाहिए, भवन का पश्चिमी भाग हमेशा पूर्वी भाग से ऊँचा होना चाहिए।  भवन में नैऋत्य सबसे ऊँचा व ईशान नीचा होना चाहिए। 

18. भवन का मुख्य द्वार ब्राह्मणो को पूर्व में, क्षत्रियो को उत्तर में, वैश्य को दक्षिण में तथा शूद्रो को पश्चिम में बनाना चाहिए।  इसके लिए ८ १ पदो का वास्तुचक्र बनाकर निर्यण करे। 

19. द्वार की चौडाई उसकी उंचाई से आधी होनी चाहिए।  बरामदा घर में उत्तर या पूर्व में ही बनाना चाहिए।  खिड़कियाँ घर के उत्तर या पूर्व में अधिक तथा दक्षिण या पश्चिम में कम होनी चाहिए।  ब्रह्म स्थान को खुला, साफ़ तथा हवादार होना चाहिए। 

20. गृहनिर्माण में ८१ पदवाले वास्तुचक्र में ६ स्थान के नियत किये गये है। 

21. दीवारो की मोटाई सबसे ज्यादा दक्षिण में, उससे कम पश्चिम में, उससे कम उत्तर में तथा सबसे कम पूर्वदिशा में छोड़े। 

22. घर के ईशानकोण में पूजाघर, कुआँ, बोरिंग, बच्चो का कमरा, भूमिगत वाटर टैंक, बरामदा, लिविंग रूम, ड्राइंग रूम व बेसमेंट बना सकते है। 

23. घर की पूर्वदिशा में स्नानघर, तहखाना, बरामदा, कुआँ, बगीचा व पूजाघर बना सकते है।  घर के आग्नेयकोण में रसोईघर, बिजली के मीटर, जनरेटर, इन्वर्टर व मेन स्विच लगा सकते है।  दक्षिण दिशा में मुख्य शयन कक्ष, भंडार गृह, सीढियां, ओवरहेड वाटर टैंक व शौचालय व ऊँचे वृक्ष लगा सकते है। 

24. घर के वायव्य कोण में अथिति घर, कुंवारी कन्याओ का शयन कक्ष, रोदन कक्ष, लिविंग रूम, ड्राइंग रूम, सीढियां, अन्न भंडार व शौचालय बना सकते है।

25. घर की उत्तर दिशा में कुआँ, तालाब, बगीचा, पूजाघर, तहखाना, स्वागतकक्ष, कोषागार, व लिविंग रूम बना सकते है।  घर भारी सामान नैऋत्य कोण, दक्षिण या पश्चिम में रखना चाहिए।  घर का हल्का सामान उत्तर या पूर्व या ईशान में रखना चाहिए।  घर के नैऋत्य कोण में किरायेदार या अथितियो को नहीं ठहराना चाहिए। 

26. सोते समय सिर पूर्व या दक्षिण की और होना चाहिए।  अथवा मतान्तर से अपने घर में पूर्वदिशा में सिर करके सोना चाहिए, ससुराल में दक्षिण की ओर, परदेश में पश्चिम में सिर रहना चाहिए।  दिन में उत्तर की ओर तथा रात्रि में दक्षिण की ओर मुख करे मूत्र का त्याग करना चाहिए।  घर में पूजा के स्थान में बड़ी मुर्तिया नहीं होनी चाहिए।  दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्यदेव की प्रतिमा, दो गोमती चक्र व दो शालिग्राम नहीं रखने चाहिए।  भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। 

27. सीढियों के नीचे पूजाघर, शौचालय व रसोईघर नहीं बनाना चाहिए।  धन की तिजोरी का मुँह उत्तर की दिशा में होना चाहिए। 

More Vastu

ज्योतिष ज्ञान

img

पुत्र प्राप्ति यन्त्र

रविवार के दिन सर्पाक्षी के पत्तो से युक्त डाली लाकर एक...

Click here
img

कुन्डली रहस्य

पंचम भाव में शनि मंगल लग्नेष के साथ हो तो...

Click here
img

संतान का लिंग बताता है चीनी कैलेंडर

मनचाही संतान प्रापित के लिए सवरोदय विज्ञान का...

Click here
img

रत्नों की जांच कैसे हो

कभी भी ज्योतिष की सलाह के बिना रत्न धारण नहीं...

Click here
img

रूद्राक्ष के प्रयोग

यदि मन्त्र षकित (विधान) के साथ धारण किया...

Click here
img

ग्रह दान वस्तु चक्रम

टीका-साधु, ब्रáणों और भूखों को भोजन कराने...

Click here
img

मंगली दोश के उपाय

जातक के लग्न में अषुभ मंगल होने से मंगली दोश बनता हो तो जातक को...

Click here

Can ask any question