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शुभ कार्य करने के लिये अशुभ योगों का त्याग

शुभाशुभ कर्मो अथवा दैनिक कार्यो में भी मुहूर्त साधना प्राचीन परंपरा रही है इससे मनुष्य भविष्य में होने वाली अशुभ घटनाओं से बच सकता है। कुछ प्रमुख अशुभ योग का विवरण दिया जा रहा है यह आपके लिए अवश्य लाभदायक रहेगा।

कुयोग👉  (अशुभ) वार, तिथि एवं नक्षत्रों के संयोग से अथवा केवल नक्षत्र के आधार पर कुछ ऐसे अशुभ योग बनते हैं जिन्हें, कुयोग कहा जा सकता है। इन कुयोगों में कोई शुभ कार्य प्रारंभ किया जाए तो वह सफल नहीं होता अपितु उसमें हानि, कष्ट एवं भारी संकट का सामना करना पड़ता है।
कुयोग-सुयोग: यदि किन्हीं कारणों से एक कुयोग तथा एक सुयोग एक ही दिन पड़ जाए तो भी उस दिन को त्याग देना चाहिये ।

 दग्ध नक्षत्र👉  रविवार को भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगलवार को उत्तराषाढ़ा, बुधवार को धनिष्ठा, गुरुवार को उत्तरा फाल्गुनी, शुक्रवार को ज्येष्ठा, शनिवार को रेवती नक्षत्र दग्ध नक्षत्र कहलाते हैं। इनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाना चाहिए।

मास-शून्य नक्षत्र👉  चैत्र में अश्विनी और रोहिणी, वैशाख में चित्रा और स्वाति, ज्येष्ठ में उत्तराषाढ़ा और पुष्य, आषाढ़ में पूर्वा फाल्गुनी और धनिष्ठा, श्रवण में उत्तराषाढा़ और श्रवण, भाद्रपद में शतभिषा और रेवती, अश्विनी में पूर्वा भाद्रपद, कार्तिक में कृतिका और मघा, मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा, पौष में आर्द्रा और अश्विनी, माघ में श्रवण और मूल तथा फाल्गुन में भरणी और ज्येष्ठा मास-शून्य नक्षत्र होते हैं। इनमें शुभ कार्य करने से धन नाश होता है।

जन्म नक्षत्र👉 जातक का जन्मनक्षत्र, १० वां अनु जन्म नक्षत्र तथा १९ वां त्रिजन्म नक्षत्र कहलाते है। ये तीनों समान रूप से जन्म नक्षत्र की श्रेणी में आते हैं। शुभ कार्य प्रारंभ करने हेतु जन्म नक्षत्र त्यागना चाहिए।

चर योग👉 रविवार को उत्तराषाढा, सोमवार को आर्द्रा, मंगल को विशाखा, बुध को रोहिणी, गुरू को शतभिषा
शुक्रवार को मघा तथा शनिवार को मूल नक्षत्र हो तो चर योग बनता है। इस योग में कार्य की अस्थिरता रहती है।

दग्ध योग👉 रविवार को १२, सोमवार को ११, मंगल को ५, बुध को ३, गुरू को ६, शुक्र को ८, और शनिवार को ९, तिथि होने पर दग्ध योग अशुभ कारक होता है।

मृत्युदा तिथिया👉  रविवार को १, ६, ११,  सोमवार को २, ७, १२, मंगल को १, ६, ११,  बुध को ३, ८, १३,  गुरू को ४, ९, १४,  शुक्र को २, ७, १२,  शनिवार ५, १०, १५ तिथियां होने पर मृत्युकारक होती हैं।

मृत्यु योग👉  रविवार को अनुराधा, सोमवार को उत्तराषाढा, मंगल को शतभिषा, बुध को अश्विनी, गुरूवार को मृगशिरा, शुक्रवार को अश्लेषा , तथा शनिवार को हस्त नक्षत्र मृत्युयोग बनाते हैं।
इनमे शुभ कार्य करने से जनहानि होती है।

यमघंट योग👉 रविवार को मघा , सोम को विशाखा ,मंगल को आर्द्रा , बुक को मूल , गुरू को कृतिका , शुक्र को रोहिणी तथा शनिवार को हस्त नक्षत्र के होने पर यमघंट योग अशुभ कारक होगा।

यमदंष्ट्रा योग👉 रविवार को मघा व धनिष्ठा, सोम को मूल व विशाखा, मंगल को भरणी व कृतिका , बुध को पुनर्वसु व रेवती ,गुरू को अश्विनी व उत्तराषाढा, शुक्र को रोहिणी व अनुराधा , तथा शनिवार को श्रवण व धनिष्ठा नक्षत्र होने पर यह योग बनता है ,आय्यंत पीडादायक होता है।

वज्र मुसल योग👉  रविवार+भरणी,सोमवार+चित्रा, मंगल+उत्तराषाढा, बुध+धनिष्ठा, गुरू+उत्तराफाल्गुनी
, शुक्रवार+ज्येष्ठा , तथा शनिवार +रेवती नक्षत्र से यह योग भी अशुभ कारक होता है जोकि कार्य में विवाद उत्पन्न करता है ।

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