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वास्तु दोष निवारक उपाय - निवास अथवा व्यवसाय में प्रगति के लिए

यदि आपके पास निवास अथवा व्यवसाय स्थल पर किसी ने वास्तु दोष बताया है अथवा आपको अचानक हानि होती है तो यह उपाय आपके लिए बहुत लाभकारी है।  यह उपाय आप नवरात्रि में कर सकते है।  नवरात्रि की प्रथमा को अर्थात प्रथम तिथि को आप जिस स्थान पर वास्तु दोष है, उस स्थान के ईशान कोण में एक मटकी रखे व उसमे अभिमंत्रित एक - एक कौड़ी, गोमती चक्र व हरी इलायची डाले। 

इस प्रकार आप ग्यारह - ग्यारह की संख्या में कौड़ी, गोमती चक्र व हरी इलायची डाले अर्थात हर बार तीनो ही एक - एक संख्या में लगातार ग्यारह बार डाले।  उसके ऊपर मिटटी की प्लेट रखकर उसके ऊपर दक्षिणमुखी गणेश जी की मूर्ति अथवा तस्वीर को स्थान दे ( दक्षिणमुखी उन्हें कहते है जिनकी सूंड हमारी और से दाई और गणेश की दिशा से बाई ओर हो ) . अगले दिन तक मटकी ऐसे ही रखे रहने दे।  इसमें यह ध्यान रखे कि कोई उसे स्पर्श न करे। 

अगले दिन आप गोमती चक्र व कौड़ी निकालकर धोकर अलग रख दे और इलायची व जल किसी पेड़ में डाल दे।  फिर जल भरकर यही प्रक्रिया करे अर्थात एक - एक की संख्या में गोमती चक्र, कौड़ी व हरी इलायची ग्यारह बार मटकी में डाले और गणेश जी को स्थान दे दे और फिर अगले दिन दोनों चीज़ धोकर अलग रख दे और इलायची व जल पेड़ में दल दे। 

इस प्रकार आप लगातार नौ दिन तक यह करते रहे।  दसवे दिन आप पानी को पेड़ में डालने के स्थान पर अपने वास्तुदोष वाले सारे स्थान पर छिड़क ले और गणेश जी की तस्वीर अथवा मूर्ति जो भी हो को अपने  व्यवसाय स्थल में स्थान दे दे।  मटकी में गोमती चक्र,हरी इलायची व कौड़ियो को ले जाकर किसी चौराहे पर फोड़ दे।  बिना पीछे देखे वापस आ जाये।  इस उपाय से आप देखेंगे कि आपकी सारी बाधा समाप्त हो गई है और जो भी समस्या आ रही थी वह भी नहीं आ रही है।  यह एक बहुत ही शक्तिशाली उपाय है। 

 

शारीरिक तथा व्यवसायिक सुरक्षा के लिए रक्षा कवच

आज का समय ऐसा चल रहा है कि कोई किसी अन्य को सुखी नहीं देख सकता है।  वह किसी किसी को सुखी देखकर स्वयं अधिक दुखी है।  वह सदैव यही प्रयास करता है कि किसी प्रकार से सामने वाला दुखी हो।  इसके लिए वह तंत्र का सहारा लेता है जिसके माध्यम से वह अपने शरीर को, घर के सुख के साथ व्यापार को भी क्षति पहुँचाने का प्रयास करता है।  इसके लिए यदि आपका शरीर अधिकतर अस्वस्थ रहता है अथवा आपके व्यापार में अचानक हानि होती है तो इसके लिए आप किसी शुभ समय में कवच तैयार कर अपने परिवार के साथ अपने व्यापार को भी हानि होने से बचाये। यह कवच आप इस प्रकार तैयार कर सकते है -

शुभ समय में आप भोजपत्र पर माँ आदिशक्ति का कवच बनाकर सवा लाख अथवा इससे दुगुने मंत्रो से कवच सिद्ध कर अपने शरीर पर धारण करे।  दूसरा कवच मुख्यद्वार पर लगाये।  इसके प्रभाव से आपका कोई भी जाना - अनजाना शत्रु आपको किसी भी प्रकार से हानि नहीं पंहुचा सकता है। 

निवास की नीव खुदने पर उपाय

आप जब भी अपने नए निवास का आरम्भ करवाये और उसकी नीव खुदवाना आरम्भ करे तो सर्वप्रथम किसी से शुभ मुहूर्त निकलवाने के साथ यह अवश्य ध्यान दे कि जिस और से नीव खोदने का कार्य आरम्भ करना बताया है, उस स्थान पर गोचरवश कालपुरुष के पैर होने चाहिए।  जब नीव खुदने के बाद आप पूजन करे तो किसी ताम्बे के पात्र में चांदी अथवा स्वर्ण का अपनी सामर्थ्य अनुसार नाग - नागिन का जोड़ा, एक चांदी का चौकोर पत्तर,पांच लग्नमंडप सुपारी, साबुत हल्दी की सात गांठे, कुमकुम व केसर आदि वस्तुओ को पात्र में रखकर गंगाजल भरकर किसी पीले वस्त्र से बंद कर दबा दे।  साथ ही पांच पत्थर भी दबाए।  ईशान कोण पर एक अभिमंत्रित 'श्री श्रीयंत्र', ग्यारह गोमती चक्र पीले वस्त्र में बांधकर रखे।  नेतृत्य कोण पर 'वास्तुदोष निवारण यन्त्र' दबा कर नीव भरवाना आरम्भ करे।  जब निवास का कार्य पूर्ण हो जाये तो मुख्यद्वार पर दिशा अनुसार कोई अभिमंत्रित यन्त्र व अभिमंत्रित काले घोड़े की नाल अवश्य लगवाये।  इसमें आप 'श्री गणेश प्रतिमा' व 'श्रीनवदुर्गे बीसा यंत्र' भी लगवा सकते है।  अन्य यंत्र जैसे 'श्री भैरो यन्त्र' अथवा 'श्री हनुमान यंत्र' आदि दक्षिणमुखी द्वार पर अधिक लाभ देते है।  आप एक बात का अवश्य ध्यान दे कि मुख्यद्वार पर जैसी "श्री गणेश जी" की तस्वीर, मूर्ति या टाइल्स लगवाते है वैसी ही एक अंदर की और लगवाये।  जिसकी पीठ बाहर वाली प्रतिमा से मिली हो क्योकि श्री गणेश जी के नेत्रो में समृद्धि व पीठ में दरिद्रता होती है।  इसीलिए आप किसी भी प्रकार से पीठ अंदर की और न होने दे।  इसके साथ ही कई लोग सलाह देते है कि मुख्यद्वार पर श्री लक्ष्मी - गणेश की मूर्ति लगवा दे परन्तु आप ऐसी भूल न करे क्योकि यदि आप माँ लक्ष्मी को ही अपने निवास से बाहर बैठा देंगे तो आपको समृद्धि कैसे मिलेगी ? आप मुख्यतः इतना समझे कि मुख्यद्वार पर जिनकी भी तस्वीर लगाए उनका कोई न कोई रूप रक्षक अथवा विघ्नहर्ता के रूप में अवश्य हो। इस प्रकार से आप जब तक उस निवास में रहेंगे, तब तक आपको किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आयेगी।  

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