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होटल रेस्टोरेंट और वास्तु शास्त्र के 22 सिद्धांत

होटल ,रेस्टोरेंट और घर का निर्माण वास्तु सिद्धान्त के अनुरूप ही बनाना आवशयक है ,वास्तु

अनुसार बनाये गये होटल रेस्टोरेंट घर का निर्माण मालिक के लिये धन ,,समृद्धी और प्रतिष्टा

और मान  सम्मन प्रदायक होते है ,तथा अतिथियों के लिये आरामदेह व सुविधाजनक और

कर्मचारीयों के लिये लाभदायक और उन्नति कार्क सिद्धः होते है ,हम आपको उन्ही सिद्धांतोँ के

बारे मे बताएंगे ,

 

१। होटल या रेस्टोरेन्ट निर्माण के लिये भूमि आयताकार या वर्गाकार होनी चाहिये ,
 
२। भूमिगत जल स्त्रोत उतर पूर्व मे होना चाहीये। 
 
३। निर्मित भवन का नेत्रेत्य कौण सबसें उन्नत होणा चाहियें। 
 
४। पानी का ढलान उतर पूर्व कि और होना चाहिये ,
 
५।  रसोई घर होटल / रेस्टोरेन्ट का सबसे अहम भाग है ,इसे भवन के आग्नेय कोण मे होना 
 
चाहिए।
 
 इसे वायव्य कोण में भी बनाया जा सकता है ,परन्तु इस दिशा मे अग्नि भय अर्थात आग ,करंट 
 
आदि दुर्घटनाओं क अंदेशा रहता है।
 
६। रसोई की स्लेब यानि प्लेटफॉर्म दक्षिण पुर्व मे रहे और शैफ का  मुह पूर्व दिशा मे रहे 
 
७। भारी वस्तुओं का स्टोर भूखंड के दक्षिण पश्चिम कोने मे होना चाहिये 
 
८। भवन का उतर पूर्वी भाग अधिक खुला होना चाहिये 
 
९। इस उतर पूर्वी भाग में छोटे छोटे पोधों कि क्यारिया ,झरना ,फवारा आदि जल स्त्रोत 
 
लाभदायक 
 
होते है ,बडे बङे वृक्ष दक्षीण व पश्चिम दिशा मे होना श्रेष्कर होता है   
 
१०। गेस्ट रूम  उतर पश्चिम 'वायव्य कोण ' की तरफ़ होना चाहिये 
 
११। इन कक्षों में सिरहाना दक्षिण दिशा की तरफ़ होना चाहिए 
 
१२। कक्षों में टी वी और म्यूजिक सिस्टम अग्नेय कोण की और रखे जाने चाहिये 
 
१३। पार्किंग पूर्व ,ईशान उतर या वायव्य की तरफ़ होनी चाहिये 
 
१४। ओवरहेड पानी का टैंक नेत्रेत्य कोंन मे होणा चाहिये 
 
१५। डाईनिंग हॉल पश्चिम दिशा मे तथा बार व केसिनो दक्षिण दिशा मे होना चाहिये 
 
१६। स्विमिंग पूल पूर्व ईशान या उतरी भाग में होना चाहिए। इसे कभी भी नेत्रत्य आग्नेय व
 
 ब्रहमा स्थान [ मध्य भाग ] में ना बनाये 
 
१७। रिसेप्शन व कैश काउंटर मे व्यक्ति को उत्तराभिमुख होकर बैठना चाहिए 
 
१८। टॉयलेट वायव्य कोण में बनाना श्रेष्ट होता है 
 
१९। एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस पूर्व दिशा मे बनाये 
 
२०। मालिक व डायरेक्टर का ऑफिस नेत्रतेय भांग मे बनाना उचित है 
 
२१। जनरेटर ,मेन स्विच बिजली उपकरण ए सी आग्नेय कोन मे रखना चाहिए 
 
२२। म्यूजिक थीम की लाइटिंग फवारे ईशान या उतरी दिशा मे होने चाहियें जिससे अधिक से
 
 अधिक सकरात्मक उर्ज़ा का संचार हो सके 
 
 
                                                    www.astroyatra.com

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