logo
India Free Classifieds

वास्तु से जानें कहाँ हो जल स्थान ?

बहुत सारे रोगों का कारण भूमिगत जल की स्थिति होती है । घर में हम जहाँ कुआँ, बोरिंग अथवा भूमिगत टैंक बनाते है, वे कब और कितना परिणाम देंगे ? यह हमे मालूम नही होता । किसी विशिष्ट भूमिगत ऊर्जा नाड़ी को जलाशय के माध्यम से जब हम विकृत कर देते है, तो व् शरीर के किसी अंग में कोई न कोई रोग उत्पन्न कर देता है । 
                    उत्तम दिशा के मध्य में भूमिगत जलाशय धनप्रदायक माने गए है उत्तम में जलाशय न केवल धन देता है बल्कि संतान को भी सुन्दर और निरोगी बनाता है । ऐसे व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होती है । ये लोग स्थित बुद्धि वाले होते है । यघपि कभी - कभी चंचल स्वभाव का प्रदर्शन करते है । 
                     उत्तर  - पूर्व में जलाशय  होने की भी शास्त्रो में पुष्टि होना बताया गया है। अर्थात भवन में रहने वाले सभी लोगो के जीवन में सुख -समर्धि और शांति होती है। यह जलाशय उत्तर दिशा स्थित जलाशय की तुलना में तीव्र गति से धन नहीं देता,परन्तु एक परिवार के सभी प्राणियों की उन्नति का माध्यम अवश्य बनता है। पूर्व दिशा का जल साधन पड़ोसियों से ईर्ष्या भाव  संतान को हानि पहुचने वाला होता है। पूर्व दिशा में जल साधन से जो रोग उत्पन होते है,उनका सम्बन्ध नाभि प्रदेश से नीचे वाले अंगो में जल के आधिक्य अथवा जल की कमी से होने वाले रोगो से होता है। 
 
अग्नि कोनसे जल साधन से शरीर में कान्ति  का आभाव,यौन अंगो से संभंधित बीमारिया,डिप्रेसन,स्नायु विकार जैसे रोग देता है। यहाँ का जलाशय अल्प सन्तति,संतान से विवाद तथा उसके कारण मानसिक तनाव पैदा करता है। शरीर के निर्जलीकरण या डिहाइड्रेसन का कारण प्राय अग्निकोण में स्थित जलाशय होता है। दक्षिण दिशा में जलाशय होने से उस घर की महिला रुग्ण होती है। नेत्रत्य कोण का जलाशय संतान से तीव्र मतभेद,परिवार में विद्वेष तथा जल से उतपन्न होने वाले रोग पैदा करता है। पश्चिम दिशा वाला जलाशय शरीर में रसाधिक्य प्रधान करता है। ऐसे जातको को थायरायड सम्बन्धी रोग  सकते है। यह जलाशय धन से सम्बंधित परेशानिया भी देता है देता है। ब्रह्म स्थान में अर्थात भूखंड के केंद्र में कुआ अथवा बोरिंग होने से व्यक्ति शीघ्र निर्णय नहीं कर सकता है। 
 
इन सभी स्थितियों  जलाशय भूखंड की सीमा के अंदर के परिणाम बताये गए है। यदि जलाशय भूखण्ड से बहार किसी भी दिशा में स्थित हो तो उसका प्रभाव पृथक होता है। भूखंड से बाहर पश्चिम का जल सम्पनता लाता है। उत्तर दिशा औरउत्तर - पूर्व दिशा के जलाशय शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे सिद्ध होते है। ऐसे लोगो को सनस्ट्रोक या सनबर्न जैसे रोग नहीं होते है त्वचा संबधी रोग भी नहीं होते है  

More Vastu

ज्योतिष ज्ञान

img

पुत्र प्राप्ति यन्त्र

रविवार के दिन सर्पाक्षी के पत्तो से युक्त डाली लाकर एक...

Click here
img

कुन्डली रहस्य

पंचम भाव में शनि मंगल लग्नेष के साथ हो तो...

Click here
img

संतान का लिंग बताता है चीनी कैलेंडर

मनचाही संतान प्रापित के लिए सवरोदय विज्ञान का...

Click here
img

रत्नों की जांच कैसे हो

कभी भी ज्योतिष की सलाह के बिना रत्न धारण नहीं...

Click here
img

रूद्राक्ष के प्रयोग

यदि मन्त्र षकित (विधान) के साथ धारण किया...

Click here
img

ग्रह दान वस्तु चक्रम

टीका-साधु, ब्रáणों और भूखों को भोजन कराने...

Click here
img

मंगली दोश के उपाय

जातक के लग्न में अषुभ मंगल होने से मंगली दोश बनता हो तो जातक को...

Click here

Can ask any question