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वास्तु का प्रभावित करते पेड़ पौधे

पेड़ पौधे भवन व स्थल की सुन्दरता में  भी वृद्धि करतें है, भवन के आस पास पीछे लॉन बगीचे में पेड़ पौधे की उपस्थिति सौन्दर्य व आकर्षण में वृद्धि करती है। ये पेड़ पौधे हमारी आंखो को प्रिये लगतें हैं। हमारी आखों को ठंडक पहुंचातें हैं। पेड़ पौधे वातावरण को शीतल रखतें हैं।

        पेड़ पौधे हमारे लिए काफी उपयोगी हैं। पेड़ पौधों से हमें खानें के लिए भोजन व फल मिलतें हैं। यह हमारें स्वास्थ्य को उत्तम बनातें हैं। फल खानें से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है. हम विभिन्न रोगों से दूर रहतें हैं। पेड़ पौधे वातावरण को शुद्ध व प्रदूषण मुक्त रखतें हैं। ये प्राण - ऊर्जा के प्रतीक हैं। पेड़ पौधे से हमें भरपूर आक्सीजन प्राप्त होती है। हम शुद्ध हवा लेतें हैं। इतनें उपयोगी पेड़ पौधों का भला वास्तु  में क्यों नहीं महत्व हो?

        पेड़ पौधे भवन व स्थल की सुन्दरता में वृद्धि करतें हैं। भवन के आस पास  सामनें पीछे  लॉन बगीचों में पेड पौधों की उपस्थिति सौंन्दर्य व आकर्षण में वृद्धि करती है। ये पेड़ पौधे हमारी आंखों को प्रिये लगतें है हमारी आखों को ठण्डक पहुंचातें है। पेड़ पौधे वातावरण को शीतल रखतें है। गर्मियों में राह चलनें वाला राही कड़ी धूप से बचनें के लिए पेड़ पौधों की छाया तलाश करता है और पेड़ देखते ही देखते उसकी तरफ खींचा चला आता है। पेड़ पौधे उत्साह व आन्नद के प्रतीक होतें है ये अपना भोजन बनानें के लिए किसी पर आश्रित नहीं होतें है। यह प्रकार संलेष्ण की किया द्वारा सम्पूर्ण वातावरण को जीवंत बनातें हैं।प्राण् ऊर्जा की सृष्टि करतें हैं। ये आस पडौस से आनें वाली अशुभ ऊर्जा को रोकतें हैं। इतना ही नही ये परेशान करनें वाले कोणो को भी ढक लेतें है।

        पेड़-पौधे जीवित प्राणी हैं। इनका रूप् आकार भार आदि में बदलाव होता रहता है। इसके कारण आस-पास की ऊर्जाओं का अनुपात भी बदल जाता है। वास्तु शास्त्र में पेड़ पौधों की उपस्थिति जीवन व जगत के लिए आनिवार्य मानी गई हैं। भवन के पीछे विस्तृत हरित क्षेत्र होना अत्यंत शुभ माना गया है। भवन के पीछे बड़े बड़े पेड़ घने वृक्ष आदर् हैं। जबकि भवन के दरवाजे के सामनें या खिड़की के सामनें पेड़ नहीं होना चाहिए। मुख्य प्रवेश  द्वार के सामने भी पेड़ नहीं होना चाहिए, विशेषत बड़े वृक्ष का  होना ठीक नहीं है। वास्तु में उसको सही नहीं माना गया है, यह समृद्धि को रोकता है। पेड़ पौधे वास्तु को कैसे प्रभावित करते है इससे ज्यादा यह जानना जरूरी है कि हमारें घर में पेड़ पौधों की उपस्थिति कहां कैसे व किस प्रकार हो।

•      भवन के आगे या पीछे के द्वार के एकदम सामनें कोई बड़ा वृक्ष नहीं लगाये। ये घर में आने वाली सौर किरणों को रोकतें है पेड़ाें से घिरे दरवाजों वाले घरों मेंं लोग सुस्त व निक्कमें हो जातें हैं।

• नार्वे स्वीडन डेनमार्क आदि देशों में लोगों को सूर्य का प्रकाश बहुत कम मिलता है । सर्दियों में तो यह बिल्कुल ही नहीं मिलता है। या अत्यन्त कम  मिलता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन से यह पता चला है कि सूर्य का प्रकाश नहीं मिलनें या इसकी कमी से निवासी शराब, आत्मघाती व अवसाद का शिकारा हो जातें हैं।

• भवन परिसर में कांटेदार पेडों का होना शुभ नहीं होता है। कोणीय या तीखे पौधे अत्यधिक रजस ऊर्जा की सृष्टि करतें हैं। यह निवासियों को आवशक्ता से अधिक सक्रिय कर देतें है। आफिस मे लाल गुलाब का पौधा लगानें से सृजननात्मक और सक्रियता बढ जाती है। इस तरह कुछ कांटेदार पौधे अपवाद होतें है,घर में बबूल का पेड़ व मरूस्थलीय झाडि़या नहीं लगानी चाहिए। वास्तु में यह शुष्क व कठोर व्यवहार के प्रतीक मानें गए है। घर में इनकी उप-स्थती के प्रभाव से लोग संवेदनहीन हो जातें है।

• रबर प्लांट, बरगद के वृक्ष तामसी वातावरण का निर्माण करतें है अत: भवन के आस पास ये न हों। ये निवासियों को आलसी व मूर्ख बना देतें हैं। ‘ये धूप को भी घर में प्रवेश करनें से रोकतें हैं।

• वृक्ष वृद्धि, विकास व दीर्घायु के प्रतीक होतें है ये निवासियों तथा प्रकृति में अच्छा तालमेल रखतें हैं।

• पतझड़ वाले पौधे भी बजाय सदाबहार के अधिक उतम् है बंद घरों में बाहरी पेड पौधो से निकलनें वाली प्राण ऊर्जा नहीं पहुंच पाती है। इसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है व अवसाद के कारण अक्सर शरीर बीमार हो जाता है

•घर के अन्दर कुछ विशेष प्रकार के पेड़ पौधे लगानें से घर की नकारात्मक उर्जा दूर होती है वास्तु के अनुसार घर के आस पास हरे पेड़ पौधे होनें चाहिए,ये प्राण उर्जा के प्रतीक हैं।

• बंजर धरती में स्थित हरित क्षेत्र मानवों के निवास के लिए उत्तम मानें जातें है। गरम मरूस्थल के बीच स्थित मरूधान ऐसी जगह का एक उदाहरण है।

• पेड़ पौधों की पत्तियां और फूल विभिन्न रंगो के होतें है प्रकृति की इस रंग चिकित्सा से खराब वास्तु के अनेक दुष्प्रभावों का कम व निष्फल किया जा सकता हैं।

• अशुभ या अनिशचित द्रश्यो से बचनें के लिए घर के इर्द गिर्द पेड़ पौधों को ढाल के रूप में लगाया जा सकता है। मन्दिरों शमसान घाट कूड़ाघर तीव्रगति वाहन खम्भों व कोनों से बचनें के लिए पेड़ पौधो का प्रयोग करना अत्यधिक शुभ रहता है।

• घर के पास शमशान घाट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो घर के चारो तरफ बाड लगाकर इसको अलग किया जा सकता है। तब  शमशान घाट या क्रबिस्तान की अशुभ उर्जा को घर में प्रवेश करनें से बाड़ रोक देती है। प्राय: यह कहा जाता है कि घर के पास कबिस्तान हो तो घर के निवासी दुखी, मायूस व अवसाद के शिकार हो जातें हैं।

• टी नुमा मार्ग के दुष्प्रभावों से बचनें के लिए वृक्ष का प्रयोग किया जा सकता है। वृक्षों का आकार गोल या पिरामिण्ड नुमा होना चाहिए। रात में इनके आकार डरावनें ना दिखें।

• नुकीले  पत्तों वाले पेडों के बजाय गोल पतों वाले पेड़ लगाना उचित रहता है।

• घर में बोनसाई के पौधों को नहीं लगाना चाहिए। ये दास के प्रतीक है घर के बदलते वातावरण का आयास करातें है। यदि घर में तुलसी का पौधा या अन्य औषधीय पौधे बढ नहीं पातें है या सूख जातें है तो यह समझना चाहिए कि घर में अशुभ ऊर्जाओं की उपस्थती हो गई हैं। याद रखे पौधे ऐसी जगहों पर अच्छी तरह उगतें है जहां खुली ताजी हवा, सौर प्रकाश सही तापमान और नमी हो जहां हानिकारक प्रदूषण न हो। यदि आपके घर में लगाया गया कोई पौधा अनुकूल वृद्वि व विकास करता है तो यह समझ लेना चाहिए कि घर में सब कुछ ठीक चल रहा है। कोई खतरा नहीं।

• घर में मुरझाए कुम्हलाए पौधों को नहीं रखना चाहिए, ये अशुभ ऊर्जाओं के द्योतक हैं। सुगन्धित प्रकृति के पौधे सबसे उत्तम होतें है। सुगन्ध प्राण वायु को आकर्षित करती है। दुर्गन्ध विकर्सित करती है। कुछ शुभ पेड़ पौधे इस प्रकार है चेरी बांस चमेली मोगरा केला चन्दन नारियल जैतून शहतूत पान नीम सुपारी तुलसी लौंग गुड़हल अमलतास शरीष चंपा कुमुद कमल एलिलि मैथी अदरक पुदीना अदरक इलायची आदि। भवन के अन्दर छोटे पेड़ लगाना शुभ रहता है। अत यह कहा जा सकता है कि सुन्दर वास्तु के निर्माण में पेड़ पौधें महत्वपूर्ण भूमिका निभातें हैं।

 

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