logo
India Free Classifieds

घर के आन्तरिक वास्तु से सुधारे भाग्य -टॉयलेट

विचारणीय होती है। घर में प्रायः

करवाया जाता है। इसके निर्माण में विषेष सावधानी रखनें

आवष्यक्ता होती हैं, क्यों कि  इसके निर्माण में अन्य वास्तु निर्माण स्थान की स्वच्छता रखी जानी आवष्यक हैं। यदि वहाँ गंदगी के परेषानी का सामना करना

होगा। दृष्टिकोण से अत्यधिक उत्पन्न होकर घर के विभिन्न हिस्सों मे जाकर परेषानी उत्पन्न करतें स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव भी पड़ सकता है। या अधिक रूप में पृथक

 
शोचालय का निर्माण निजि कक्ष के
 
निर्माण में वास्तु सिद्धान्तों के अतिरिक्त उसकी आन्तरिक साज
 
में भी वास्तु नियमों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सामान्यतः 
 
टायलेट से सम्बन्धित विभिन्न वास्तु नियमों
 
बिन्दूओं से स्पष्ट किया जा रहा है, जिनका पालन करने से निष्चित ही 
 
लाभ होता है-
 
 शौचालय में डब्लयू सी इस प्रकार रखनी चाहिये कि मल मूत्र 
 
त्यागते हुए व्यक्ति का मुख पूर्व दिषा के अतिरिक्त किसी भी 
 
दिषा में हो अर्थात डब्लयू.सी. पूर्व से पश्चिम   की ओर नही होनी 
 
चाहिये।
 
 टायलेट में पानी का नल उतर अथवा पूर्व की ओर रखना चाहिए। में पानी का नल अथवा पात्र नही होना नीचे दायें अथवा बांयी ओर
 
अनुसार शयन कक्ष के साथ जुड़ा हुआ टायलेट भी अशुभ
 
गया है, परन्तु वर्तमान में इसका प्रयोग बहुतायत रूप से हो चुका वह वायव्य कोण से उतर के
 
में कदापि सैप्टिक टैंक नही होना चाहिए। बडे़ शहरों मे
 
टैंक की आवष्यकता नही होती, क्यों कि यहाँ सीवर लाईन की का निर्माण नही करवाना
 
टायलेट बनाना भी अशुभ होता है। इन स्थानों पर
 
उसे हटवा दे  अथवा उसका प्रयोग ना करें। यदि उन्हे हटवाना शौचालय के बाहर की ओर पौधे और लताओं आच्छादित करें।
 
 यदि घर में शयन कक्ष अथवा अन्य कक्ष से जुड़ा हुआ टायलेट दक्षिण नैर्ऋत्य, पष्चिम अथवा वायव्य की ओर ओर टायलेट बनवाया गया
 
दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब करके उसके फर्श  का विभाजन करके
 
दोष को समाप्त किया जा सकता है।
 
 टायलेट में कमोड अथवा डब्लयू सी के ऊपर लटकता हुआ बीम, चाहिए। इससे वास्तुदोष उत्पन्न होता होनी चाहिए। यदि रंग रोगन
 
का उपयुक्त होता है।
 
 टायलेट मे पानी की निकासी सदैव पूर्व अथवा उतर वाली दिवार चाहिए। वर्तमान में बाथरूम
 
के दरवाजों का प्रयोग बहुतायत रूप से किया जाता है। इन 
 
दरवाजों कमा रंग ऐसा होना चाहिए जो घर अथवा कक्ष की दीवारों अन्य द्वारा के समान हो।
 
 घर में प्रवेश करते ही सर्वप्रथम टायलेट का निर्माण करना गलत टॉयलेट को वहा¡ से हटवा दें अथवा उसका वहीं नहीं है, तो उसे उपयुक्‍त दिशा
 
आन्‍तरिक वास्‍तु के द़ष्ट‍ि‍कोण से भी टॉयलेट का
 
नकारात्‍मक है, तो उसे आप परिवर्तित कर सकते हैा आपकेशीट पूर्व से पश्चिम की ओर नहीं मूत्र  करते परिवर्तित कर लें. इसके अतिरिक्‍त
 
डब्‍ल्‍यू;सी; के साथ लगने वाली पानी की छोटी टंकी को कदातपि की ओर नहीं लगवाना चाहिए। 
 
 

 

 

More Vastu

ज्योतिष ज्ञान

img

पुत्र प्राप्ति यन्त्र

रविवार के दिन सर्पाक्षी के पत्तो से युक्त डाली लाकर एक...

Click here
img

कुन्डली रहस्य

पंचम भाव में शनि मंगल लग्नेष के साथ हो तो...

Click here
img

संतान का लिंग बताता है चीनी कैलेंडर

मनचाही संतान प्रापित के लिए सवरोदय विज्ञान का...

Click here
img

रत्नों की जांच कैसे हो

कभी भी ज्योतिष की सलाह के बिना रत्न धारण नहीं...

Click here
img

रूद्राक्ष के प्रयोग

यदि मन्त्र षकित (विधान) के साथ धारण किया...

Click here
img

ग्रह दान वस्तु चक्रम

टीका-साधु, ब्रáणों और भूखों को भोजन कराने...

Click here
img

मंगली दोश के उपाय

जातक के लग्न में अषुभ मंगल होने से मंगली दोश बनता हो तो जातक को...

Click here

Can ask any question