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जानिये --असली हीरे की पहचान और उसके गुण

हीरे केवल सफ़ेद ही नहीं होते अशुद्धियों के कारण इसका शेड नीला, लाल,संतरा,पिला,हरा,और काला भी होता है,हरा हीरा सबसे दुर्लभ है,हीरे को यदि oven में 763 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाये तो जलकर कार्बनडाई आक्साइड बना लेता है तथा बिलकुल भी राख नहीं बचती है,इससे यह सिद्ध होता है की हीरा कार्बन का शुद्ध रूप है,हीरा उष्मीय किरणों के प्रति बहुत अधिक सवेदनशील होता है,काले हीरे का प्रयोग कांच काटने या दूसरे हीरे को काटने हीरे पर पोलिश करने तथा चट्टानों में छेद करने के लिये किया जाता है,ज्योतिष में भी हीरे का व्यापक महहत्व है,इसके अनुसार हीरा रत्न अनामिका में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को अभिमंत्रित करके शुक्र के सोलह हज़ार जाप ॐ शूं शुक्राय नमः जप करके धारण करना चाहिये,शास्त्रोनुसार हीरे के आठ भेद होते है,जो निम्न प्रकार से है-

०१-वनस्पति हीरा-- यह हीरा जल या सिरस पत्र के रंग के समान होता है,इसे वरुण देव धारण करते है,

०२ - बसंती हीरा -- यह हीरा गेंदा पुष्प गुलदाउदी या पुखराज के रंग का होता है,इसे शिवजी स्वय धारण करते है,

०३- वज्रनील हीरा -- यह हीरा असली पुष्प अथवा नीलकंठ पक्षी के रंग के समान नील वर्ण होता है,इसे देवराज इंद्र धारण करते है,

०४ - कमलापति हीरा --यह हीरा गुलाबी रंग के कमल पुष्प के रंग का होता है इसे लक्ष्मीपति भगवान विष्णु धारण करते है,

०५- हंसपति हीरा -- यह हीरा हंस बगुले के पंख के समान तथा दूध व दही के समान श्वेत होता है,ब्रह्माजी हंसपति हीरे को ही धारण करते है,

०६-संलोई हीरा -- यह सुर्ख भूरे रंग का होता है

०७- तेलिया हीरा-- यह अत्यंत चिकना तथा स्याही के रंग का होता है,इसे यमराज धारण करते है

०८- श्याम वज्र-- यह कृष्ण वर्ण होता है,इसे भी यमराज धारण करते है,

                            [   हीरे के लाभ ]

०१। जन्मकुंडली में यदि शुक्र वक्री,नीच,पाप ग्रहो के साथ स्थित हो तो उसे हीरा पहनना चाहिये,

०२। कुंडली में शुक्र शुभ भावो  स्वामी होकर अपने भाव से छठे  आठवे भाव में हो तो हीरा पहनना चाहिये

०३। किसी भी गृह  महादशा में यदि शुक्र का अंतर चल रहा हो तो उसे हीरा पहनना चाहिये

०४। सेल्समैन एव व्यापारिक बंधुओं को हीरा धारण करना चाहिये,इससे व्यापार में उन्नति होगी

एव सेल्समैन की धाक जमेगी।

०५। प्रेमी प्रेमिका को हीरा धारण करना चाहिये, इससे प्रेम में प्रगाढ़ता आती है,

०६। आनंदमय वैवाहिक जीवन बिताने के लिये हीरा धारण करना चाहिये।

०७। ऊपरी बाधा वालो के लिये हीरा पहनने से बाधाये समाप्त हो जाती है,

०८। विषधर जंतुओं के प्रभाव से बचने के लिये हीरा फायदेमंद होता है ,

०९। तुला और वृष राशि वालो को हीरा धारण करना शुभ होता है,

१०। पति पत्नी के मनमुटाव को दूर करने में हीरा बहुत महत्वपूर्ण होता है ,

११। दुर्लभ शरीर,अतिसार,अजीर्ण,वायु,प्रकोप में हीरा पहनना स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होता है।

१२।  हीरा धारण करने से पुरुषत्व में वृद्धि होती है,


                            [ ऐसे करे असली हीरे की पहचान ]  

१। काष्ठ पर यदि पन्ना और पुखराज को रखा जाये तो पन्ना स्वय दहक ने लगता है।पुखराक सूर्य की भांति चमकने लगता है ,परन्तु यदि हीरे को काष्ठ पर रखा जाये तो उसमे स्वय का तो कोई परिवर्तन नहीं होता है ,परन्तु वह काष्ठ अधिक श्वेत अत्यधिक मनोहर ,रवेदार और विशुद्ध दिखाई देता है,हीरा विधुत का कुचालक होता है। यह सतह पर रगड़ने से धन विधुत का आवेश पैदा करता है,परन्तु हीरा ताप का सुचालक है,इसलिये यह स्पर्श में शीतल प्रतीत होता है.    

२। हीरा जल जाता है। ऑक्सीजन गैस से परिपूर्ण शीशे के बर्तन में हीरा रखकर उस पर आतशी शीशे द्वारा  सूर्य की किरणे केंद्रित करने पर  जलने लगता है,[ इसे सर हम्फ्री डेवी ने सन 1816 में जलाकर सिद्ध किया था ,दरअसल हीरे में मौजूद दोष ही उसे बाकि पथरो से अलग करता है,सफाई से बना क्यूबिक जिर्कोनिआ और मोइसा नाइट हीरे से काफी सस्ते है,इसलिये उन्हें सस्ती धतूयो में इस्तेमाल किया जाता है,लेकिन एक नकली हीरा कभी भी सोने की धातु में इस्तेमाल नहीं होता है

३। असली हीरे में कुछ न कुछ खांचे होते है,जो बारह सौ गुणा ताकतवर माइक्रो स्कोप की मदद से देखे जा सकते है। आप हीरे को अखबार पर रखे और उसके पार से अक्षरो को पढ़ने की कोशिश करे। अगर आपको टेढ़ी लकीरे दिखे तो इसका मतलब है की आपका हीरा नकली है।

४। हीरे को परा बैंगनी किरणों [ अल्ट्रा वायलेट ]में देखने की कोशिश करे। अगर परा बैंगनी किरणों में हीरा नीली आभा के साथ चमकेंगा तो हीरा असली है। परन्तु हीरे से हलकी पीली हरी या फिर स्लेटी रंग की आभा निकले तो समझ लीजिये की ये मोइसा नाइट है।

५। इसको परखने का एक और भी तरीका है जहा असली हीरा पानी में डालते ही डूब जाता है वही नकली हीरा पानी के ऊपर तैरता रहता है।      

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