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मृत्युभोज - आस्था या अंधविश्वास (Astha or Andhvishwas)

मृत्युभोज समाज की वो कुरीति है जो वर्षो से हमारे समाज में पनप रही है। एक तो घर से इंसान चला जाता है उसका दुःख काम नहीं होता इससे पहले ही उस पर दूसरा दुःख भी आ जाता है। किसी को समाज के दर से तो किसी को समाज में अपनी प्रतिष्ठा ज़माने के लिए तो किसी को आत्माओं के भय का कारण मृत्युभोज करना पड़ता है। और इसमें सबसे ज्यादा भार  गरीब और मिडिल कलास परिवार पर पड़ता है। उसे उधार  लेकर ये  मृत्युभोज करना पड़ता है। और जिंदगी भर साहूकारों का ब्याज चुकाना पड़ता है। और इसी में उसकी जिंदगी निकल जाती है। मिडिल कलास परिवार की खून पशीने की कमाई इसी मृत्युभोज में चली जाती है। मृत्युभोज हमारे देश के राजस्थान बिहार उत्तर प्रदेश में इसका चलन ज्यादा है। जो की निराधार है। परन्तु ऐसा किसी शास्त्र में नहीं लिखा है की परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के पश्चात परिवार वालो को मृत्युभोज का आयोजन करना पड़ेगा।

क्या मृत्युभोज कराने से मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है। क्या मृत्युभोज कराने से आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। लोग इसी आस्था में मृत्युभोज का आयोजन करते है

आप ही बताये 'मृत्युभोज ' आस्था है या अन्धविश्वास

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